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राजनीतिक दलों को 2000 तक कैश डोनेशन की इजाजत क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार,चुनाव आयोग और पार्टियों को नोटिस देकर जवाब मांगा

राजनीतिक दलों को 2000 तक कैश डोनेशन की इजाजत क्यों:  सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार,चुनाव आयोग और पार्टियों को नोटिस देकर जवाब मांगा


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नई दिल्ली12 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और अन्य से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें इनकम टैक्स के उस प्रोविजन की वैधता को चुनौती दी गई है जो राजनीतिक दलों को 2,000 रुपए तक कैश डोनेशन पर टैक्स में छूट देता है। याचिका में दावा किया गया है कि देशभर में हर जगह डिजिटल पेमेंट बहुत ही बढ़िया तरीके से हो रहा है, फिर 2000 रुपए तक के नकद चंदे की परमिशन दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें राजनीतिक दलों के चंदे में पारदर्शिता की मांग उठाई गई थी।

याचिका में कहा गया है कि पारदर्शिता की यह कमी चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करती है। यह प्रोविजन इससे वोटर्स को राजनीतिक दलों को पैसा कहां से मिल रहा है,दानकर्ता कौन हैं, उनका उद्देश्य क्या है, इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित करता है। इससे वे वोट डालते समय तर्कसंगत, बुद्धिमानी और पूरी तरह से सही फैसला नहीं ले पाते।

नकद पैसा नहीं लेना रजिस्ट्रेशन के लिए शर्त बने

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, चुनाव आयोग और अन्य को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह राजनीतिक दल के पंजीकरण और चुनाव चिह्न के आवंटन के लिए एक शर्त के रूप में यह निर्धारित करे कि कोई भी राजनीतिक दल नकद में कोई राशि प्राप्त नहीं कर सकता।

याचिका में राजनीतिक दलों की तरफ से दाखिल इनकम टैक्स रिटर्न और चंदा रिपोर्ट में बड़ा अंदर होने का भी आरोप लगाया गया है।

इनकम टैक्स अधिनियम के प्रावधान को चुनौती

याचिकाकर्ता ने इनकम टैक्स अधिनियम के उस प्रावधान को चुनौती दी है, जो राजनीतिक दलों को 2000 रुपए तक का नकद डोनेशन दिए जाने की परमिशन देता है। याचिका में दावा किया गया है कि देशभर में हर जगह डिजिटल पेमेंट बहुत ही बढ़िया तरीके से हो रहा है, फिर 2000 रुपए तक के नकद चंदे की परमिशन दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है।

2000 रुपये तक का नकद डोनेशन पर दलील

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सीनियर अधिवक्ता विजय हंसारिया की दलीलें सुनने के बाद चुनाव आयोग समेत प्रतिवादियों से इस पर जवाब तलब किया।विजय हंसारिया ने कहा कि राजनीतिक दलों को इस प्रोविजन के तहत टैक्स छूट इस आधार पर मिलती है कि वे कंट्रीब्यूटर्स की डिटेल्स को PAN डिटेल और बैंक डिटेल के साथ बताएं। मामले में आगे सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।

शुरुआत में, बेंच ने वरिष्ठ वकीस विजय हंसारिया, जो याचिकाकर्ता खेम सिंह भाटी और वकील स्नेहा कलिता की ओर से पेश हुए थे, से पूछा कि उन्होंने पहले हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया। इस पर हंसारिया ने कहा कि यह याचिका देश भर के सभी राजनीतिक दलों और उन्हें मिलने वाले धन से संबंधित है। बेंच ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई और चुनाव आयोग, केंद्र और भाजपा व कांग्रेस जैसे कई राजनीतिक दलों सहित अन्य को नोटिस जारी किए।

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