मौके पर पहुंची विभाग की टीम व किसान
कैथल जिले में पूंडरी हलके के गांव पिलनी में खेतों में तेंदुए के पंजों के निशान मिलने की सूचना अफवाह निकली। जब वाइल्डलाइफ विभाग की टीम खेतों में गई तो उन्हें पंजों के निशान तो मिले, लेकिन यह पुष्टि नहीं हो पाई कि ये निशान सही में तेंदुए या चीते के हैं
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मौके पर मिली हडि्डयां
वहीं दूसरी ओर जहां कुछ किसानों ने भी इसे एक अफवाह करार दिया तो कुछ किसानों को आज भी अंदेशा है कि निशान किसी बड़े जानवर के हैं। किसान खेतों में चौकन्ने होकर जा रहे हैं कि कहीं कोई बड़ा जानवर उन पर अचानक से हमला न कर दे। किसान कृष्ण कुमार व सुदामा राम ने बताया कि वे विभाग की जांच से संतुष्ट हैं, लेकिन जिस प्रकार से पंजों के निशान और जानवर द्वारा उल्टी कर फेंकी गई हडि्डयां मौके से मिली हैं, उससे डर है कि कोई बड़ा जानवर ही क्षेत्र में न आया हो।

खेत में मिले जानवर के पंजों के निशान
गत वर्ष भी फैली थी अफवाह
बीते वर्ष भी नवंबर माह में पूंडरी क्षेत्र के पिलनी सहित आसपास के गांवों में अफवाह फैली थी कि यहां कोई बड़ा जंगली जानवर आया है। इसी प्रकार किसानों ने पंजों के निशान देखकर विभाग को सूचना दी थी। विभाग की टीम को जांच के दौरान कोई जानवर वहां पर नहीं मिला। इस बार भी इसे अफवाह माना जा रहा है।
किसानों ने दी टीम को सूचना
बता दें कि सोमवार को किसानों ने खेतों में तेंदुए जैसे जानवर के पैरों के निशान दिखाई दिए। उन्होंने तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। टीम मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई। जानवर के पैरों के निशान से यह सही पता लगाने का प्रयास किया गया। इसकी सूचना डायल 112 और वाइल्डलाइफ की टीम को दी। वाइल्डलाइफ की टीम मौके पर पहुंची व जानवर के पंजों को चैक किया। साथ ही वाइल्डलाइफ की टीम ने गन्ने के खेतों में सर्च किया, जिस ओर जाने के वे निशान थे।
वन विभाग के जांच अधिकारी रणबीर सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर उनकी टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। जांच में ये निशान किसी जंगली बिल्ले के पाए गए। तेंदुए या चीते के निशान नहीं मिले। उन्होंने किसानों को चौकन्ना रहने और अकेले खेतों में न जाने की सलाह दी थी।
