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YouTube से सीखी खेती, रोज कमा रहे 15 हजार रुपए: इंजीनियरिंग की जॉब छोड़ वापस लौटे गांव, कृषि में नई तकनीक का ले रहे सहारा – Chatra News

YouTube से सीखी खेती, रोज कमा रहे 15 हजार रुपए:  इंजीनियरिंग की जॉब छोड़ वापस लौटे गांव, कृषि में नई तकनीक का ले रहे सहारा – Chatra News


झारखंड के चतरा जिले के उदय कुमार ने इंजीनियरिंग की पारंपरिक धारणा को बदला है। पुणे की एक मल्टीनेशनल कंपनी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की नौकरी छोड़ने के बाद, वे अब अपने गांव लावालौंग के अंबाटांड में सब्जियों की खेती कर रहे हैं। यूट्यूब से सीखे उन्नत तरी

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पॉलिटेक्निक और फिर बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद उदय को पुणे की एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी मिली थी। वे एसी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में क्वालिटी इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे।

शहर की चकाचौंध और 26 हजार रुपए के मासिक वेतन से उदय का मन इस नौकरी में नहीं लगा। उन्होंने मात्र छह महीने में ही रिजाइन कर दिया और अपने पैतृक गांव लौट आए।

उदय ने नौकरी छोड़ने के बाद खेती को ही करियर बनाने की योजना पर काम किया।

प्रतिदिन अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे उदय

गांव वापस आकर, उदय ने यूट्यूब को अपना गुरु बनाया और आधुनिक कृषि तकनीकों का गहन अध्ययन किया। आज, वे इन्हीं तकनीकों के दम पर सफल किसान बन गए हैं, जो मिट्टी से जुड़कर प्रतिदिन अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कृषि और तकनीक के मेल से कुछ नया करना चाहते हैं।

उदय ने बताया कि शहर में रहते हुए भी मन गांव की मिट्टी में अटका था। मुझे लगा कि इंजीनियरिंग की डिग्री सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि अपनी जमीन पर कुछ नया करने के लिए भी हो सकती है। मैंने तय किया कि मैं नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि खेती को ही करियर बनाऊंगा। गांव लौटने के बाद उदय के पास डिग्री तो थी, लेकिन खेती का अनुभव शून्य था।

ड्रिप इरिगेशन तकनीक पानी की आवश्यकता को 75% तक कम कर देती है।

ड्रिप इरिगेशन तकनीक पानी की आवश्यकता को 75% तक कम कर देती है।

ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और हाइब्रिड बीजों के बारे में जानकारी जुटाई

उन्होंने यूट्यूब को अपना गुरु बनाया। ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग और हाइब्रिड बीजों के बारे में जानकारी जुटाई। हालांकि शुरुआत झटके के साथ हुई। तकनीकी जानकारी की कमी से पहली फसल में एक लाख का घाटा हुआ। उदय ने कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग ली और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ उठाया।

पहले जहां दो जून की रोटी मुश्किल थी, आज अच्छी आमदनी है।

पहले जहां दो जून की रोटी मुश्किल थी, आज अच्छी आमदनी है।

सवा लाख का सिस्टम मात्र 15 हजार में लगवाया

ड्रिप इरिगेशन तकनीक पानी की आवश्यकता को 75% तक कम कर देती है। पाइप के माध्यम से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक जाता है, जिससे उर्वरक का सही उपयोग होता है और किसानों को सीधा फायदा मिलता है। उदय ने 3 एकड़ में मिर्च की खेती शुरू की। 90 फीसदी सरकारी सब्सिडी की मदद से सवा लाख का सिस्टम मात्र 15 हजार में लगवाया।

जुलाई में रोपाई हुई और सितंबर से परिणाम सामने आने लगे। उनकी इस कामयाबी ने उनके माता-पिता के आंसुओं को मुस्कान में बदल दिया है। उदय के पिता भीम साव कहते हैं ‘बेटा पुणे में था तो मन नहीं लगा। अब गांव में है तो हम बहुत खुश हैं। पहले जहां दो जून की रोटी मुश्किल थी, आज अच्छी आमदनी है। शुरू में लगा बेटा ने गलती कर दी, लेकिन जब फसल अच्छी हुई तो समझ आया कि उसका फैसला सही था। घर में अब खुशहाली है।’

सालाना 9 से 10 लाख का शुद्ध मुनाफा कमा रहे

आज उदय के पास अपनी जमीन के अलावा लीज पर कुल 20 एकड़ भूमि है। वह मिर्च के साथ पत्ता गोभी, मटर और टमाटर की खेती कर रहे हैं। इंटरक्रॉपिंग तकनीक से वे एक ही जमीन से दोगुना मुनाफा कमा रहे हैं। जहां कभी खेती में लागत निकालना मुश्किल था, अब उदय सालाना 9 से 10 लाख का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।



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