चंडीगढ़ प्रशासन के राजस्व विभाग ने की 500 एकड़ पंचायती जमीन निगम को देने की सिफारिश।
चंडीगढ़ प्रशासन के राजस्व विभाग ने करीब 500 एकड़ पंचायत जमीन नगर निगम चंडीगढ़ के नाम करने की सिफारिश की है, ताकि जमीन का मालिकाना हक साफ तौर पर नगर निगम के पास आ सके। यह जमीन उन 13 गांवों से जुड़ी है, जिन्हें वर्ष 2018 में नगर निगम में मर्ज किया गया
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पंचायतें खत्म, लेकिन जमीन अब भी उनके नाम
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, 2018 में 13 गांव नगर निगम में शामिल हो गए थे, जिसके बाद ग्राम पंचायतें खत्म हो गईं। लेकिन इसके बावजूद उन गांवों की जमीन के कागज अब भी पंचायतों के नाम पर ही रहे। हालांकि अधिसूचना के जरिए ये संपत्तियां नगर निगम के दायरे में आ गई थीं, लेकिन भूमि रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो पाए।
“गांवों के मर्ज होने के बाद से यह जमीन नगर निगम के पास है, लेकिन कागजों में अब भी पंचायत का नाम है। अब इस प्रक्रिया से यह गलती ठीक की जाएगी।”
विकास कार्यों की राह होगी आसान
राजस्व विभाग ने पंचायत जमीन की पहचान कर उसके कागज पूरे कर लिए हैं और ये दस्तावेज स्थानीय निकाय विभाग को भेज दिए गए हैं। अब अंतिम निर्णय स्थानीय निकाय विभाग करेगा।
जमीन का मालिकाना हक मिलते ही नगर निगम इन पर विकास कार्य और सार्वजनिक सुविधाओं की बेहतर योजना बना सकेगा और जमीन का सही इस्तेमाल कर पाएगा।
कई साल से चल रहे विकास कार्य
पहचानी गई पंचायत जमीन करीब 500 एकड़ है, जो सभी मर्ज हुए गांवों में फैली हुई है। गांवों के नगर निगम में शामिल होने के बाद यहां से पार्षद चुने गए और नगर निगम ने अलग से गांव विकास योजना बनाकर फंड मंजूर किया। पिछले 6–7 साल में इन योजनाओं के तहत कई विकास काम हो चुके हैं।
