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विकसित भारत के संकल्प के साथ रामजी योजना शुरू: केंद्रीय मंत्री नित्यांनद राय बोले- महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का विजन पूरा होगा – Samastipur News

विकसित भारत के संकल्प के साथ रामजी योजना शुरू:  केंद्रीय मंत्री नित्यांनद राय बोले- महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का विजन पूरा होगा – Samastipur News

समस्तीपुर में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यांनद राय ने बयान दिया है। इन्होंने कहा है कि विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए मनरेगा का नाम बदल कर वीबीजी रामजी योजना रखा गया है। यह महात्मा गांधी जी के विचार ग्राम स्वराज को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से बड़े परिवर्तन आये हैं। इस वजह से तीन करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से ऊपर आये हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 4 करोड़ से अधिक घर बने, 11 करोड़ टॉयलेट और 2.23 लाख सामुदायिक परिसर तैयार हुए। 14.9 करोड़ घरों तक नल का जल पहुंचा है। उज्जवला से 10 करोड़ एलपीजी कनेक्शन मिले। सौभाग्य से सभी घरों का विद्युतीकरण हुआ और पीएम किसान के तहत 11 करोड़ से अधिक किसानों को नियमित आय सहायता मिल रही है। आयुष्मान भारत योजना से 36.9 करोड़ लोग स्वास्थ्य सुरक्षा से लाभांवित हुए हैं। विजन के हिसाब से आजीविका गांरटी बढ़ी संवाददाता सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री के विकसित भारत 2047 के विजन के हिसाब से आजीविका गांरटी को 100 दिनों से बढा़कर 125 दिन किया गया है। इससे रोजगार के अधिक अवसर दिए जाएंगे। इससे ग्रामीण ढांचे को सशक्त करने में नई गति मिलेगी। इसके अंतर्गत जल संरक्षण,आधारभूत ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर , आजीविका संबंधी इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधित कार्य और प्राकृतिक आपदाओं में विशेष काम किए जाएगा। इन प्रावधानों से पारदर्शिता और जबावदेही फिक्स होगी। उन्होंने सवाल के जबाव में कहा कि योजना का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति के विकास का है। इससे पहले भी ऐसे बदलाव किए गए हैं। पहले इस योजना का नाम राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम, जवाहर रोजगार योजना, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, काम के बदले अनाज कार्यक्रम, राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम, साल 2005 में इसका नाम बदल का मनरेगा किया गया। एक सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि इस योजना में कई तरह की गड़बड़ी थी, जिसे दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है। गांधी के नाम को बदला नहीं गया है। उनके विचारों को आत्मसात करने की कोशिश की गई है।



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