चंडीगढ़ में मेयर पद के लिए नामांकन आज दाखिल किए जाने हैं। 10 बजे से 5 बजे तक अलग अलग पार्टियों की तरफ से नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे। आम आदमी पार्टी की तरफ से अपना प्रत्याशी तय कर लिया गया है। कांग्रेस ने भी सीनियर व डिप्टी मेयर पदों के लिए नाम तय कर लिए हैं। इसके लिए सांसद मनीष तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष एच एस लक्की की अगुआई में पार्षदों की लंबी बैठक हुई है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की तरफ से आज ही मेयर पद के लिए प्रत्याशी के नाम पर मुहर लगाई जानी है। हार्स ट्रेडिंग से बचाने लिए पंजाब भेजे गए आप के पार्षद
आम आदमी पार्टी के पार्षद अभी भी भाजपा के संपर्क में हो सकते हैं। उन्हें हार्स ट्रेडिंग से बचाने के लिए आम आदमी पार्टी उन्हें विधानसभा के उप स्पीकर जय सिंह रोडी के रोपड़ एरिया के एक होटल में ले जाया गया है। आज दोपहर के समय महज उन पार्षदों को ही लाया जाएगा जिनकी तरफ से नामांकन या फिर प्रस्तावित पार्षदों को लाया जाएगा। जबकि चुनाव तक सभी 11 पार्षद चंडीगढ़ से बाहर रहेंगे। आज नामांकन दाखिल करने की तारीख, वापिस कभी लिए जा सकते, मतदान 29 को आज 22 जनवरी 2026 को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने का दिन है। नामांकन किसी भी दिन मतदान के समय तक वापिस लिए जा सकते हैं। जबकि मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान होना है। पहली बार है कि मतदान हाथ खड़े करके होना है। एक वोट से तय होगा मेयर कांग्रेस और AAP के पास सांसद के वोट को मिलाकर भाजपा के बराबर वोट हैं। ऐसे में मेयर पद के लिए दोनों खेमों को महज एक अतिरिक्त पार्षद की जरूरत है। यही वजह है कि जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। AAP ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए 36 में से 14 सीटें जीती थीं, लेकिन बहुमत नहीं जुटा सकी। अब तक चुने गए चार मेयर में से 3 बार भाजपा का मेयर बना है। AAP के कुलदीप कुमार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एकमात्र मेयर बने है। दिसंबर 2021 के बाद समीकरण पूरी तरह बदल गए। भाजपा ने जोड़-तोड़ की राजनीति में बढ़त बना ली है। मेयर बनाने के लिए गैरहाजिरी बन सकता है हथियार – सबसे मजबूत दावेदारी भाजपा की है, क्योंकि आप के पार्षद अभी भी भाजपा के संपर्क में हैं, अगर एक पार्षद गैर हाजिर भी होता है तो इसका सीधा फायदा भाजपा को होगा। कांग्रेस को भी इसी बात की चिंता सता रही है कि अगर ऐसा हुआ तो मेयर समेत सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का पद भी हाथ से जा सकता है। – कांग्रेस के पार्षदों की आपसी खींचतान भी बन सकती है हार की वजह, सूत्र यह बताते हैं कि कांग्रेस के पास अब छह पार्षद हैं और इनमें से दो को सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का पद दिया जाना है। इसे लेकर भी पार्षदों के बीच खींचतान चल रही है और खुद को सीनियर बनाने के चक्कर में एक पार्षद गैर हाजिर हो सकता है।
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