पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाथियों के लगातार हमलों से परेशान ग्रामीणों ने शुक्रवार को चाईबासा स्थित वन विभाग कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने झारखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और प्रधान मुख्य वन संरक्षक के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसे वन संरक्षक, चाईबासा के माध्यम से भेजा गया। ज्ञापन में हाथियों के बढ़ते आतंक से हो रहे जान-माल के नुकसान पर चिंता जताते हुए अविलंब राहत और स्थायी समाधान की मांग की गई है। हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो से तीन वर्षों से टोंटो, मझगांव, हाटगम्हरिया, झींकपानी, जगन्नाथपुर और मनोहरपुर जैसे प्रखंडों में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। स्थिति यह है कि लोग हर रात डर के साये में रहने को मजबूर हैं। आरोप लगाया गया कि वन विभाग हाथियों के हमले की सूचना मिलने के बावजूद समय पर मौके पर नहीं पहुंचता। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है। साथ ही यह भी कहा गया कि हाथी हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों से अब तक राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने मुलाकात नहीं की है, जिससे पीड़ित परिवार खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने हाथियों के आक्रामक होने के पीछे अवैध खनन और बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई को जिम्मेदार ठहराया। खनन कार्य के बाद जंगलों में पुनः पौधरोपण नहीं किए जाने से हाथियों का प्राकृतिक आवास नष्ट हुआ है और भोजन की तलाश में वे गांवों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं। वन विभाग पर सिर्फ औपचारिकता निभाने और दीर्घकालीन योजना न बनाने का भी आरोप लगाया गया। धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने मांग की कि हाथी हमले में मृतकों के आश्रितों को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए। इसके अतिरिक्त, क्षतिग्रस्त घरों के लिए 10 लाख रुपए की सहायता मिले और जिन घरों को नुकसान हुआ है, उन्हें तत्काल 50 हजार रुपए दिए जाएं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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