स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से पिटाई से नाराज बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 5 पेज के लेटर में लिखा है कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों की चोटी पकड़ी गई। इससे आहत होकर उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने लिखा- ऐसी घटना किसी भी साधारण ब्राह्मण को अंदर से हिला देती है। ऐसा लगता है कि प्रशासन और मौजूदा सरकार ब्राह्मणों और साधु-संतों के खिलाफ काम कर रही है। उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। ब्राह्मणों की बात करने वाला कोई नहीं है। अलंकार अग्निहोत्री ने दैनिक भास्कर से इस्तीफा देने की पुष्टि की। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले अलंकार अग्निहोत्री 2019 में PCS अफसर बने थे। उनकी 15वीं रैंक आई थी। IIT-BHU से बीटेक करने के बाद उन्होंने 10 साल आईटी सेक्टर में काम किया, फिर PCS की तैयारी की और पहले प्रयास में ही एग्जाम क्वालिफाई किया था। अलंकार ऑफिस में भगवान बजरंगबली की तस्वीर लगाकर चर्चा में आए थे। इसका भीम आर्मी ने विरोध किया था। कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट में हंगामा भी किया था। इस दौरान अफसर से नोकझोंक भी हुई थी। पोल में हिस्सा लेकर राय दे सकते हैं- अलंकार अग्निहोत्री से दैनिक भास्कर ने बात की, उन्होंने क्या कहा… सवाल: आपने अचानक इस्तीफा क्यों दिया? जवाब: कुछ समय से प्रदेश में जो स्थितियां बनी हैं, वे बद से बदतर होती जा रही हैं। एक खास वर्ग, विशेषकर ब्राह्मणों के खिलाफ अभियान चल रहा है, जो अब असहनीय हो गया है। कहीं किसी के घर पर बुलडोजर चला दिया जाता है, तो कहीं थाने में पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है। जेल में एक दिव्यांग व्यक्ति और एक अन्य ब्राह्मण की हत्या कर दी गई। सबसे दुखद घटना प्रयागराज माघ मेले की है। अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के शिष्यों की चोटी (शिखा) पकड़कर उनके साथ मारपीट की गई। ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिन्हें देखकर रूह कांप जाए। जब प्रशासन के लोग ही पूज्य संतों और उनके शिष्यों के साथ ऐसा व्यवहार करेंगे, तो समाज में क्या संदेश जाएगा? क्या यह ब्राह्मणों के नरसंहार की तैयारी है? सवाल: आप वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं? जवाब: बिल्कुल, एक तरफ तो असली शंकराचार्य के शिष्यों को पीटा जा रहा है, दूसरी तरफ प्रशासन के आला अधिकारी कुछ कथित संतों के साथ बैठकर रोटियां सेंक रहे हैं, फोटो खिंचवा रहे हैं। क्या प्रशासन अब चापलूसी का अड्डा बन गया है? जो हमारे आराध्य हैं, उनका अपमान हो रहा है। जो सत्ता के करीबी हैं, उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। यह दोहरा मापदंड क्यों? सवाल: UGC रेगुलेशन 2026 को लेकर आपकी क्या आपत्ति है? जवाब: यह रेगुलेशन (13 जनवरी 2026) अत्यंत भेदभावपूर्ण है। इसमें सामान्य वर्ग के मेधावी छात्र-छात्राओं को ‘स्वघोषित अपराधी’ मान लिया गया है। समता समितियों के माध्यम से बच्चों का मानसिक और शारीरिक शोषण होने की पूरी आशंका है। कोई भी निराधार शिकायत करके किसी का भविष्य बर्बाद कर सकता है। क्या हम अपने बच्चों को ऐसी व्यवस्था में पढ़ने भेजेंगे, जहां न्याय के नाम पर शोषण हो? मैं उन जनप्रतिनिधियों से भी पूछना चाहता हूं, जो ब्राह्मण समाज के नाम पर वोट लेकर आज ‘कॉर्पोरेट एम्प्लॉई’ की तरह चुप बैठे हैं। क्या आप अपने आकाओं के आदेश का इंतजार कर रहे हैं? क्या आप तब बोलेंगे, जब स्थिति हाथ से निकल जाएगी? सवाल: भविष्य की स्थिति को आप कैसे देखते हैं? जवाब: आज न जनतंत्र बचा है, न गणतंत्र, यह केवल ‘भ्रम तंत्र’ है। सरकारें अल्पमत में हैं और केवल ‘बांटो और राज करो’ की नीति पर चल रही हैं। भाजपा अब भारतीय नहीं, ‘विदेशी जनता पार्टी’ जैसी हो गई है। मैंने अपना इस्तीफा राज्यपाल, जिलाधिकारी और चुनाव आयोग (ERO होने के नाते) को भेज दिया है। मैं भगवान बजरंगबली को साक्षी मानकर यह कदम उठा रहा हूं। अब समय आ गया है कि समाज और अधिकारी इस अन्याय के खिलाफ ‘असहयोग आंदोलन’ की तरह बॉयकाट करें। अगर हम आज नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। हालत सिविल बार जैसी हो गई है। अब पढ़िए इस्तीफे में अफसर ने क्या कुछ लिखा.. पहला पेज- बटुकों की पिटाई से नाराज होकर इस्तीफा दे रहा मैं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के शिष्यों के साथ प्रशासन द्वारा की गई मारपीट और भारत सरकार के नए कानून UGC 2026 से दुखी होकर सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा दे रहा हूं। मेरा नाम अलंकार अग्निहोत्री है। मैं 2019 बैच का पीसीएस अधिकारी हूं। अभी बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात हूं। मैं यह भी बताना चाहता हूं कि मैंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के IIT-BHU से बीटेक किया है। इसके लिए मैं हमेशा महामना मदन मोहन मालवीय का आभारी रहूंगा। उन्होंने जिन आदर्शों पर BHU की स्थापना की, उन्हीं से प्रेरणा लेकर मैं आगे बढ़ा हूं। दूसरा पेज- सरकार ब्राह्मणों के खिलाफ काम कर रही इस साल प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य बटुक ब्राह्मणों के साथ प्रशासन ने मारपीट की। बुजुर्ग आचार्यों को भी पीटा गया, बटुक ब्राह्मणों को जमीन पर गिराकर उनकी चोटी पकड़कर घसीटा गया। यह उनकी इज्जत का अपमान है। चोटी और शिखा ब्राह्मणों और साधु-संतों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान होती है। मैं खुद भी ब्राह्मण हूं। इस घटना से साफ है कि प्रशासन ने ब्राह्मणों का अपमान किया है। यह बहुत गलत और गंभीर बात है। ऐसी घटना किसी भी साधारण ब्राह्मण को अंदर से हिला देती है। इससे ऐसा लगता है कि प्रशासन और मौजूदा सरकार ब्राह्मणों और साधु-संतों के खिलाफ सोच के साथ काम कर रहे हैं। उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। 13 जनवरी 2026 को यूजीसी ने एक नया नियम जारी किया। इसमें बड़े ही कूटनीतिक तरीके से सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वघोषित अपराधी माना गया है। इससे सामान्य वर्ग के छात्र, जैसे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ, भूमिहार आदि, प्रभावित हो सकते हैं। यह छात्रों के प्रति विषमतापूर्ण गतिविधियों और षड्यंत्रों को जन्म देगी। तीसरा पेज- सरकार “डिवाइड एंड रूल” नीति पर चल रही गजट में बनी समता समिति के कुछ सदस्य फर्जी शिकायत के बहाने सामान्य वर्ग की छात्राओं का शारीरिक शोषण कर सकते हैं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। होनहार सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं से जलन के कारण उनके खिलाफ झूठी शिकायतें करके उनके भविष्य को नुकसान पहुंचाया जा सकता है, इसकी भी आशंका है। ऐसी स्थिति से देश में अंदरूनी विवाद बढ़ सकता है। यह UGC रेगुलेशन 2026 ऐसा लगता है, जैसे हिंदू समाज को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर उन पर शासन करने की सोच के तहत लाया गया हो। सरकार अंग्रेजों की “डिवाइड एंड रूल” नीति पर चलती हुई दिखती है, इसलिए इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। इन दोनों गंभीर मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार में बैठे ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के दूसरे जनप्रतिनिधियों ने कोई विरोध नहीं किया है, जबकि उन्हें उनके समाज के लोगों ने ही चुना है। चौथा पेज- ब्राह्मण की बात करने वाला कोई नजर नहीं आ रहा ऐसा लगता है कि वे अपने समाज के प्रति जिम्मेदार नहीं हैं। किसी कंपनी के कर्मचारी की तरह चुप बैठे हैं, जैसे किसी बड़े अफसर के आदेश का इंतजार कर रहे हों। इससे केंद्र और राज्य सरकार की स्थिति और भी भ्रम की हो गई है। ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के हितों की बात रखने वाला कोई प्रतिनिधि नजर नहीं आ रहा। इसलिए पूरा सामान्य वर्ग खुद को असहाय और असुरक्षित महसूस कर रहा है। अब समय आ गया है कि ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए अलग राजनीतिक व्यवस्था बनाई जाए, ताकि वर्ग के हितों की रक्षा हो सके और सरकारों में फैला भ्रम दूर किया जा सके। इन्हीं दोनों मुद्दों (UGC नियम और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई) से दुखी होकर मैं सिटी मजिस्ट्रेट, बरेली के पद से तुरंत इस्तीफा दे रहा हूं। पांचवां पेज- देश में देसी नहीं, विदेशी जनता पार्टी सरकार जैसी बनी अब केंद्र और राज्य सरकार में न तो सही मायने में लोकतंत्र है और न ही गणतंत्र, बल्कि भ्रम की स्थिति है। देश में अब देसी नहीं, विदेशी जनता पार्टी की सरकार जैसी स्थिति बन गई है। अब आगे क्या?
नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के अधिकारी ने बताया- अगर अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया है, तो सरकार का विवेकाधिकार है कि उसे स्वीकार करे या अस्वीकार करे। अगर सरकार ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया, तो उसी दिन से उनकी सेवाएं समाप्त हो जाएंगी। उन्हें केवल अब तक की सेवा की ग्रेच्युटी और जीपीएफ का लाभ ही मिलेगा। शेष सेवानिवृत्ति लाभ उन्हें नहीं मिलेंगे। उनके पास इस्तीफा वापस लेने का मौका भी नहीं होगा। अलंकार अग्निहोत्री के बारे में जानिए अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में अब तक क्या हुआ, जानिए- —————– अविमुक्तेश्वरानंद विवाद से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें- अविमुक्तेश्वरानंद बोले- समझदार डिप्टी सीएम मौर्य को डांटा जा रहा प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर डिप्टी सीएम केशव मौर्य की तारीफ की। सोमवार सुबह उन्होंने कहा, ‘अगर केशव मौर्य का बस चलता तो वो कब का हमें नहलाकर चले गए होते। उनको डांटा जा रहा है। यहां आने नहीं दिया जा रहा है। एक समझदार नेता को दबा दिया गया।’ पढ़ें पूरी खबर
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