यमुनानगर में जिला प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर-ट्रॉली के कॉमर्शियल उपयोग पर रोक लगाए जाने के आदेशों के खिलाफ प्रतापनगर क्षेत्र के गांव बल्लेवाला स्थित क्रेशर जोन में कार्यरत ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों का धरना प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। खराब मौसम और बारिश के बावजूद सैकड़ों चालक धरनास्थल पर डटे रहे और प्रशासन के खिलाफ जमकर रोष जताया। धरनारत चालकों का कहना है कि माइनिंग जोन में ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से रेत-बजरी की सप्लाई कर वे अपने परिवारों का पालन-पोषण करते थे, लेकिन बीते करीब 20 दिनों से काम पूरी तरह ठप पड़ा है। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। धरने में शामिल राहुल जयधर, दिशांत देवघर, गुरप्रीत फतेहगढ़, सोनू बेगमपुर, रेशम मेहरमाजरा, अनुज तेलीपुरा, कुलदीप जयधरी, लाभ सिंह सहित अन्य चालकों ने बताया कि उपायुक्त यमुनानगर के आदेशों के बाद थाना, आरटीओ और एसडीएम कार्यालयों को ट्रैक्टर-ट्रॉली के कॉमर्शियल उपयोग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत जुर्माना और जब्ती की कार्रवाई की जा रही है। भेदभाव का लगाया आरोप ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों ने सवाल उठाया कि जब सड़कों पर ईंटों, गन्ने और मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली धड़ल्ले से चल रही हैं, तो केवल खनन सामग्री ढोने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली पर ही रोक क्यों लगाई जा रही है। चालकों ने इस निर्णय को भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। चालकों ने बताया कि उन्होंने बैंक से लोन लेकर और कई मामलों में अपने आभूषण गिरवी रखकर ट्रैक्टर-ट्रॉली खरीदी थी। हर महीने भारी किश्तें चुकानी पड़ती हैं, लेकिन काम बंद होने से आमदनी शून्य हो चुकी है। पिछले 15–20 दिनों से ट्रैक्टर-ट्रॉली घरों में खड़ी हैं। 29 जनवरी तक अल्टीमेटम, प्रशासन को सौंप देंगे वाहन धरनारत चालकों ने बताया कि वे अपनी समस्या को लेकर जिला उपायुक्त से भी मिल चुके हैं, जहां उन्हें जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। चालकों का कहना है कि वे पहले भी ई-रवाना और वैध बिल के साथ नियमों के तहत कार्य करते थे और आगे भी नियमों का पालन करने को तैयार हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों ने चेतावनी दी है कि वे 29 जनवरी तक धरना जारी रखेंगे। यदि इस दौरान उनकी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो 300 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर वे जिला उपायुक्त कार्यालय पहुंचेंगे और सभी ट्रैक्टर-ट्रॉली प्रशासन को सौंप देंगे। इसके बाद अपने परिवारों के साथ पलायन करने को मजबूर होंगे।
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