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IAS में इंडक्शन मामले में अंतरिम आदेश बरकरार: चंडीगढ़ CAT में सुनवाई टली, हाईकोर्ट- याचिकाकर्ता की आशंका रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर आधारित नहीं – Chandigarh News

IAS में इंडक्शन मामले में अंतरिम आदेश बरकरार:  चंडीगढ़ CAT में सुनवाई टली, हाईकोर्ट- याचिकाकर्ता की आशंका रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर आधारित नहीं – Chandigarh News

आईएएस में इंडक्शन से जुड़े मामले में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट), चंडीगढ़ बेंच ने अगली सुनवाई की तारीख 27 अप्रैल 2026 तय कर दी है। डॉ. सरिता मलिक बनाम डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग से जुड़े इस मामले में ट्रिब्यूनल ने पहले से पारित अंतरिम आदेश को अगली तारीख तक जारी रखने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट द्वारा 14 जनवरी 2026 को पारित आदेश को रिकॉर्ड पर रखा गया। यह आदेश कैट की को-ऑर्डिनेट बेंच द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर सिविल रिट याचिका से संबंधित है। जानिए IAS में इंडक्शन का मलतब IAS में इंडक्शन का मतलब राज्य सिविल सेवा के अधिकारी को प्रमोशन के जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल करना होता है। इसमें अधिकारी को UPSC की सिविल सेवा परीक्षा नहीं देनी पड़ती, बल्कि उसकी सेवा अवधि, सीनियरिटी और रिकॉर्ड के आधार पर चयन किया जाता है। यह प्रक्रिया राज्य सरकार, केंद्र सरकार और UPSC के स्तर पर पूरी होती है। हाईकोर्ट ने चयन सूची खत्म होने की आशंका जताई हाईकोर्ट में दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा था कि आईएएस में प्रमोशन के लिए जिस चयन सूची में उनका नाम अस्थायी रूप से शामिल है, वह खत्म हो सकती है। उन्हें डर था कि अगर ऐसा हुआ तो बाद में मामला उनके पक्ष में आने पर भी उन्हें इसका फायदा नहीं मिल पाएगा। इसी वजह से उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि चयन सूची को खत्म हुआ न माना जाए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की आशंका के पक्ष में रिकॉर्ड पर कोई ठोस तथ्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर याचिकाकर्ता का नाम पहले से ही चयन सूची में अस्थायी रूप से शामिल है और सूची की अवधि खत्म होने से पहले मामला ट्रिब्यूनल में चल रहा है, तो जरूरत पड़ने पर न्यायालय उचित राहत दे सकता है। जवाब दाखिल करने को मिला समय कैट में हुई सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने अपना पूरा जवाब दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा, जिसे ट्रिब्यूनल ने मंजूर कर लिया। इसके बाद याचिकाकर्ता को दो हफ्ते के भीतर उस जवाब पर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने का मौका दिया गया है। ट्रिब्यूनल ने यह भी साफ किया कि 23 दिसंबर 2025 को दिया गया अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक लागू रहेगा।



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