पन्ना जिले में दक्षिण पन्ना वनमंडल में हाल ही में संपन्न हुई तीन दिवसीय गिद्ध गणना 2026 में 1127 गिद्ध दर्ज किए गए हैं। यह संख्या पिछले दशकों में सर्वाधिक है और संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार 2021 में 614 गिद्ध, 2024 में 648 और 2025 में 762 गिद्ध दर्ज किए गए थे। इस साल यह संख्या बढ़कर 1127 हो गई है, जो लगातार बढ़ती आबादी का संकेत है। तीन दिवसीय गिद्ध गणना में मिलीं सात प्रजातियों गणना के दौरान विशेषज्ञों ने सात अलग-अलग प्रजातियों की पहचान की। इनमें इंडियन (देशी) गिद्ध, इजिप्शियन (सफेद) गिद्ध, व्हाइट-रम्प्ड गिद्ध, हिमालयन ग्रिफन (प्रवासी), यूरेशियन ग्रिफन (प्रवासी), सिनेरेयस (ब्लैक) गिद्ध और रेड-हेडेड (किंग) गिद्ध शामिल हैं। इनमें इंडियन (देशी) गिद्धों की संख्या सबसे अधिक रही। प्रजातियों की यह विविधता बताती है कि दक्षिण पन्ना का पारिस्थितिकी तंत्र गिद्धों के लिए सुरक्षित और अनुकूल बन रहा है। गिद्ध संरक्षण के लिए पहल से मिली सफलता वनमंडल अधिकारी अनुपम शर्मा ने बताया कि गिद्ध संरक्षण के लिए कई पहल की गई हैं। सात गौशालाओं को जोड़कर मृत पशुओं का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित किया गया है। साथ ही, ‘सेफ ड्रग्स’ के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। पिछले डेढ़ सालों से डाइक्लोफेनाक जैसी हानिकारक दवाओं के स्थान पर मेलॉक्सिकैम के इस्तेमाल के लिए मेडिकल स्टोर्स और पशुपालकों के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया।
वैज्ञानिक पद्धति से की गई सटीक गणना विशेषज्ञ दिलशेर खान और मोहनदास नागवानी के मार्गदर्शन में वैज्ञानिक पद्धति अपनाई गई, जिससे सटीक आंकड़े जुटाने में मदद मिली। पवई रेंज के रेंज ऑफिसर नितेश पटेल और उनकी टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पवई क्षेत्र में 900 से अधिक गिद्ध दर्ज किए गए। इस अभियान में महबूब खान, बृजकिशोर खरे, शाहनगर, सलेहा, कल्दा और रैपुरा रेंज के अधिकारियों व कर्मचारियों का योगदान रहा। प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी पंकज चौधरी ने भी पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाई।
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