मेरठ के कपसाड़ मामले के आरोपी को पुलिस रिमांड पर लेकर वारदात में प्रयुक्त हथियार बरामद करेगी। सूत्र बताते हैं कि सरधना पुलिस की तरफ से पीसीआर के लिए काफी पहले आवेदन किया गया था, जिसे मंजूर कर लिया गया है। शनिवार को पुलिस आरोपी को बाहर ला सकती है। हालांकि अफसर मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। पहले एक नजर कपसाड़ मामले पर
मेरठ के सरधना में कपसाड़ गांव है। 8 जनवरी को यहां खेत पर मां सुनीता के साथ काम कर रही दलित युवती रूबी का अपहरण कर लिया गया। गांव के ही ठाकुर समाज के युवक पर आरोप लगे, जिसने विरोध करने पर युवती की मां को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
बाद में उपचार के दौराल सुनीता ने दम तोड़ दिया था। पुलिस ने अपहरण व हत्या का मुकदमा दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने उसे सलाखों के पीछे भेज दिया। दस्तावेजों में आरोपी निकला नाबालिग
आरोपी के जेल जाने के बाद खुलासा हुआ कि वह वारदात के वक्त नाबालिग था। तीन एडवोकेट के पैनल संजीव राणा, बलराम सोम व विजय शर्मा ने उसका केस लड़ने की घोषणा की। तीनों ने कोर्ट के समक्ष आरोपी की उम्र से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए मामले की सुनवाई जेजे बोर्ड में किए जाने की पैरवी की। एक माह में मामला जेजे बोर्ड ट्रांसफर
10 जनवरी को आरोपी जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया। 14 जनवरी को तीनों अधिवक्ताओं ने यह याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया और वादी पक्ष को नोटिस जारी कर दिए। 7 सुनवाई तारीखों में दोनों पक्ष ने अपनी बात रखी। आरोपी पक्ष के पैनल की पैरवी मजबूत रही, जिसके बाद मामला जेजे बोर्ड ट्रांसफर कर दिया गया। पीसीआर पर आरोपी को बाहर लाएगी पुलिस
कोर्ट के बाद यह मामला जेजे बोर्ड में चल रहा है। पुलिस ने भी धीरे-धीरे अपनी जांच को आगे बढ़ा दिया है। अब जब मामला बोर्ड के समक्ष आ गया है तो पुलिस ने आरोपी की पीसीआर के लिए आवेदन कर दिया। जल्द ही पुलिस आरोपी को बाहर लाकर सुनीता की हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर सकती है। जन्म तिथि पर अभी भी असमंजस
मामला भले ही एससी-एसटी कोर्ट से जेजे बोर्ड ट्रांसफर हो गया हो लेकिन आरोपी की जन्म तिथि से जुड़ा पेच अभी भी फसा है। शुक्रवार को भी मामले में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका हालांकि दोनों पक्षों के द्वारा बहस की गई। 10 मार्च अगली तिथि निर्धारित की गई है। आरोपी के एडवोकेट संजीव राणा ने बताया कि उन्होंने बोर्ड के समक्ष हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की कई रूलिंग पेश की है।
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