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ओवैसी बोले- बेनीवाल को लोकसभा उपाध्यक्ष बनाएं: मैं, चंद्रशेखर और राजकुमार रोत मिलकर प्रस्ताव लाएंगे; संसद पर कब्जा करना चाहती है सरकार – Jaipur News

ओवैसी बोले- बेनीवाल को लोकसभा उपाध्यक्ष बनाएं:  मैं, चंद्रशेखर और राजकुमार रोत मिलकर प्रस्ताव लाएंगे; संसद पर कब्जा करना चाहती है सरकार – Jaipur News

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने RLP सांसद हनुमान बेनीवाल को डिप्टी स्पीकर बनाने की पैरवी की है। ओवैसी ने कहा- संविधान के अनुच्छेद 93 में डिप्टी स्पीकर का प्रावधान है। मैं, चंद्रशेखर और राजकुमार रोत मिलकर कल एक प्रस्ताव लाएंगे कि हनुमान बेनीवाल को डिप्टी स्पीकर बनाया जाए। पप्पू यादव भी हैं। वे आएंगे कि नहीं, लेकिन हम मिलकर प्रस्ताव लाएंगे। ओवैसी ने कहा- भारत में पावर सेपरेशन है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि सरकार बार-बार विधायिका (संसद) पर कब्जा करना चाहती है। संसद पर सरकार हावी हो रही है ओवैसी ने कहा- आज संसद पर सरकार हावी हो रही है। आजादी कम होती जा रही है और स्पीकर पर सरकार हावी हो रही है। सोमनाथ चटर्जी ने इसी कुर्सी पर बैठकर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस को नकारा था और कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को कोई अधिकार नहीं है कि लोकसभा की अंदरूनी प्रोसिडिंग में दखल दे। नेहरू के घर के बाहर किया था प्रदर्शन ओवैसी ने कहा- 60 के दशक में मनीराम बागड़ी हिसार से सांसद थे। उन्होंने नेहरू के घर के बाहर प्रदर्शन किया था। पुलिस उन्हें अरेस्ट करना चाहती थी। वे तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष हुकुम सिंह के पास आए। हुकुम सिंह ने उनसे कहा था कि आप संसद परिसर में रहो, कोई अरेस्ट नहीं करेगा। वे टेंट लगाकर संसद परिसर में रहे। पुलिस अरेस्ट नहीं कर सकी। 1965 में जब वे संसद परिसर से बाहर निकले, तब पुलिस ने अरेस्ट किया। यह लोकसभा स्पीकर की ताकत होती है। ओवैसी ने कहा- 2016 में हमने देखा कि उसी संसद भवन के सामने आर्मी के टैंक को खड़ा कर दिया गया। यह विधायिका की तौहीन नहीं है तो क्या है? स्पीकर के नाक, कान और आंख नहीं होती। स्पीकर संसद की आंख से ही देखता है और उसके कान से ही सुनता है। बेनीवाल बोले- उपाध्यक्ष हमारे दलों से बनाएं अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा- लोकसभा उपाध्यक्ष हो जाए तो अध्यक्ष का भार कम हो जाएगा। उपाध्यक्ष अच्छा करे। मेरा तो सुझाव है कि उपाध्यक्ष हमारी तरफ के दलों से ही बनाएं। लोकसभा स्पीकर को अविश्वास प्रस्ताव से हटाया जा सकता है। उपराष्ट्रपति देश में राष्ट्रपति के बाद दूसरा बड़ा पद है। पहले उपराष्ट्रपति से इस्तीफा ले लिया था, क्योंकि वे किसान के बेटे थे, इसलिए बात ही नहीं चली। अब लोकसभा स्पीकर का इस्तीफा ही ले लो। इस्तीफा ले लेते तो इतनी बात ही नहीं होती। इस तरह अविश्वास प्रस्ताव से कितनी बदनामी होती है। हम जैसे सांसदों की हालत ईरान युद्ध में भारत जैसी बेनीवाल ने कहा- लोकसभा स्पीकर की जिम्मेदारी है कि वे सब दलों के सांसदों से बराबरी का व्यवहार करें। स्पीकर राजस्थान के हैं। हम जैसे एक सांसद वाली पार्टी वालों और निर्दलीयों की तो हालत यह हो गई है जैसे ईरान, इजराइल और अमेरिका युद्ध में भारत सरकार की है, यानी तटस्थ।



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