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फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर पीएसी में नौकरी पाने के मामले में अदालत ने 33 वर्ष बाद फैसला सुनाते हुए आरोपी को तीन वर्ष की कैद और 7,500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। मामला थाना ताजगंज में वर्ष 1992 में दर्ज हुआ था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-3 विवेक विक्रम की अदालत ने आरोपी तुकमान सिंह पुत्र प्रताप सिंह निवासी ग्राम हीरापुर, थाना बेबर जिला मैनपुरी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई। अभियोजन के अनुसार तुकमान सिंह 41वीं वाहिनी पीएसी की एफ कंपनी में नंबर 51735 के पद पर तैनात था और उसने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। मामले में तत्कालीन सेना नायक, 41वीं वाहिनी पीएसी ने 7 मई 1992 को थाना ताजगंज में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस का दबाव बढ़ने पर आरोपी ने 13 जनवरी 1993 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था। अदालत ने 24 मार्च 1993 को आरोप तय कर मामले की सुनवाई शुरू की थी। 33 वर्षों तक चले विचारण के बाद अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और एपीओ अमित कुमार के तर्कों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए तीन वर्ष की कैद और 7,500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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