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राजस्थान विधानसभा में उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) का पद 7 वर्ष से खाली है। अंतिम बार वर्ष 2015 में भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार के समय राव राजेंद्र सिंह को उपाध्यक्ष पद पर चुना गया था। इसके बाद से इस पद के लिए चुनाव ही नहीं हुए। पिछली गहलोत सरकार के समय से अब तक यह पद खाली बना हुआ है। इससे पहले भी 2009 से फरवरी 2012 के बीच गहलोत सरकार के दूसरे कार्यकाल में उपाध्यक्ष पद के चुनाव नहीं कराए गए थे। हालांकि गहलोत सरकार ने अंतिम दो वर्ष में रामनारायण मीणा को इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया था। गौरतलब है कि 2008–2012, 2013–2015 और 2019 के बाद यह पद नहीं भरा गया। विधानसभा में अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही संचालित करने की जिम्मेदारी उपाध्यक्ष की ही होती है। हालांकि संविधान में उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं है। ऐसे में कई बार यह पद लंबे समय तक रिक्त रह जाता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कई राज्यों में संसदीय परंपरा के तहत यह पद विपक्ष को दिया जाता है, लेकिन राजस्थान में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनने के कारण कई कार्यकालों में चुनाव नहीं हुआ। ये 5 बड़े कारण… जिससे डिप्टी स्पीकर का पद खाली मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष तय करेंगे गर्ग सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग का कहना है कि यह क्षेत्राधिकार सीएम और प्रदेशाध्यक्ष का है। रही विपक्ष को यह पद देने की बात तो कांग्रेस ने भी कभी यह पद विपक्ष को नहीं दिया। विपक्ष को मिलना चाहिए ये पद: रफीक खान विपक्षी सचेतक रफीक खान का कहना है कि विधानसभा उपाध्यक्ष का चुनाव संसदीय परंपरा और नियम का हिस्सा है। परंपरा रही है कि यह पद विपक्ष के सबसे बड़े दल को दिया जाना चाहिए।
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