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‘तिलहन-दाल पर MSP गारंटी से आत्मनिर्भर बनेगा भारत’: बक्सर सांसद सुधाकर सिंह की लोकसभा में फार्मर रिलेटेड डिमांड – Buxar News

‘तिलहन-दाल पर MSP गारंटी से आत्मनिर्भर बनेगा भारत’:  बक्सर सांसद सुधाकर सिंह की लोकसभा में फार्मर रिलेटेड डिमांड – Buxar News

बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने लोकसभा में किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने सरकार की कृषि नीति पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि तिलहन और दालों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी मिलने से भारत इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन सकता है। सांसद सिंह ने संसद में बताया कि सरकार वर्तमान में धान और गेहूं पर एमएसपी की बात करती है, लेकिन तिलहन और दाल जैसी आवश्यक फसलों को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश हर साल लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये का तिलहन और करीब 50 हजार करोड़ रुपये की दाल विदेशों से आयात करता है। इससे देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बाहर जा रही है, जिसका लाभ भारतीय किसानों के बजाय विदेशी कंपनियों को मिल रहा है। किसान इन फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित नहीं हो पा रहे उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की इच्छाशक्ति की कमी के कारण किसान इन फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित नहीं हो पा रहे हैं। सुधाकर सिंह के अनुसार, यदि सरकार एमएसपी की गारंटी देती है, तो देश के किसान तिलहन और दाल उत्पादन में क्रांति ला सकते हैं, जिससे आयात पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी। सांसद ने यह भी याद दिलाया कि भारत पहले तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर था। उस समय एमएसपी नहीं था, बल्कि आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) बढ़ाकर किसानों को संरक्षण दिया जाता था। उन्होंने बताया कि विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत विकासशील देशों को कृषि क्षेत्र में 3 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की छूट है, जिसका उपयोग वे अपने किसानों की सुरक्षा के लिए कर सकते हैं। आयात शुल्क बढ़ाने और MSP की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने की मांग सुधाकर सिंह ने सरकार से मांग की कि वह इस छूट का लाभ उठाते हुए तिलहन और दाल पर आयात शुल्क बढ़ाए और एमएसपी की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करे। उनका मानना है कि इन कदमों से किसानों की आय में वृद्धि होगी, देश की विदेशी मुद्रा बचेगी और भारत खाद्य तेल व दाल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेगा। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि थोड़े से आर्थिक निवेश और सही नीतिगत फैसलों से देश कृषि क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है, जिसके लिए केवल मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।



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