हरियाणा के भिवानी निवासी पूर्व सांसद चौधरी जंगबीर सिंह का लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया। वे 85 वर्ष के थे। परिवार के मुताबिक, वे अक्टूबर महीने से लगातार बीमार चल रहे थे। इस दौरान इनके बड़े बेटे कमल प्रधान और छोटे बेटे हरिकेश लगातार उनकी देखभाल में लगे थे। शुक्रवार को उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। जंगबीर सिंह का जन्म तोशाम हल्के के खरकड़ी (माखवान) गांव में एक मार्च 1941 को हुआ था। उन्होंने एमए और एलएलबी तक पढ़ाई की और फौज में भर्ती हुए। राज राइफल में रहते उन्होंने 1962 और 1965 की चीन और पाकिस्तान से हुई लड़ाई में दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे। सेना से सेवा निवृत्त होने के बाद उन्होंने जनसेवा का मार्ग चुना और राजनीति में सक्रिय हो गए। उन्होंने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। आपातकाल के दौरान 1975 से 77 तक दो साल हिसार जेल में रहे। चौधरी जंगबीर सिंह, फौजी से राजनेता बनने तक का सफर… दिल्ली LLB करने गए और फौजी बन गए, सात साल सेना में रहे पूर्व सांसद जंगबीर सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे वकील बनना चाहते थे। दिल्ली में एलएलबी करने गए थे। इसी बीच चीन से जंग शुरू हो गई तो फौज में भर्ती हो गए। जंगबीर नेलगभग 7 वर्षों तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1962 में चीन और 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में उन्होंने एक सिपाही के रूप में अग्रिम पंक्ति में रहकर देश की रक्षा की। उनके पिता चौधरी रघुबीर सिंह भी फौज में सूबेदार थे। पिता से मिली प्रेरणा से ही जंगबीर सिंह में भी देश सेवा और समाज सेवा का गजब का जज्बा रहा। पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के खिलाफ दो बार चुनाव लड़ा सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने जनसेवा का मार्ग चुना और राजनीति में सक्रिय हो गए। चौधरी जंगबीर सिंह आम जनता की आवाज बनकर उनके हकों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे। राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई बड़े नेताओं को कड़ी चुनौती दी। जंगबीर सिंह ने वर्ष 1967 और 1968 में विधानसभा चुनाव में तोशाम हलके में चौधरी बंसीलाल को कड़ी टक्कर दी थी। 1967 में करीब पौने तीन सौ और 1968 में करीब पौने छह सौ वोटों के अंतर से हारे। 1991 में भिवानी से सांसद चुने गए, आपातकाल में जेल गए उनकी लोकप्रियता और जनाधार का परिणाम था कि वर्ष 1991 में वे भिवानी से सांसद चुने गए और संसद में क्षेत्र की आवाज बुलंद की। आपातकाल के दौरान भी उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जहां वे 19 माह और 10 दिन तक हिसार जेल में रहे। लंबे समय से चल रहे थे बीमार, कल होगा अंतिम संस्कार बीते अक्टूबर महीने से वो बीमार चल रहे थे। 85 साल की उम्र में चौधरी जंगबीर सिंह ने मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। कमल प्रधान ने बताया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार 28 मार्च को सुबह 11 बजे तोशाम जुई रोड़ स्थित चौधरी रघुबीर सिंह फार्म हाउस पर पेट्रोल पंप के पास किया जाएगा।
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