हरियाणा में तेजी से घटते वन क्षेत्र और बढ़ते पर्यावरणीय संकट को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने हालात को “पर्यावरणीय आपदा” की चेतावनी बताते हुए पूरे राज्य में पेड़ों की कटाई पर 17 अप्रैल तक पूरी तरह रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हरियाणा में वन क्षेत्र घटकर कुल भौगोलिक क्षेत्र का केवल 3.65 प्रतिशत रह गया है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। अदालत ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की निष्क्रियता का परिणाम बताया। हाईकोर्ट बोला: अब हस्तक्षेप जरूरी मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि सरकार और संबंधित अधिकारी इस मुद्दे पर गंभीर नजर नहीं आ रहे। ऐसे में पर्यावरण को बचाने के लिए अब न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी हो गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अदालत ने अपने आदेश में साफ किया कि राज्य में किसी भी प्रकार के पेड़—चाहे वह किसी भी उम्र या प्रजाति के हों-को काटने पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसमें जीरकपुर-पंचकूला बाईपास प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित करीब 5000 पेड़ों की कटाई भी शामिल है। बिना अनुमति नहीं कटेगा कोई पेड़ कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना न्यायालय की अनुमति कोई भी पेड़ नहीं काटा जा सकेगा। यह आदेश फिलहाल 17 अप्रैल तक लागू रहेगा। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार से सख्त सवाल भी पूछे। अदालत ने कहा—क्या आप नहीं चाहते कि आपके बच्चे और आने वाली पीढ़ियां जिंदा रहें? क्या आप चाहते हैं कि वे शुद्ध हवा में सांस ले सकें? अदालत ने यह भी बताया कि कई मामलों में जमानत देते समय पौधारोपण को शर्त बनाया जा रहा है, ताकि लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी बढ़े।
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