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लाहौल-स्पीति के जनजातीय बजट में भारी कटौती: पूर्व विधायक मार्कण्डेय ने सरकार पर जनजातीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाया – Patlikuhal News

लाहौल-स्पीति के जनजातीय बजट में भारी कटौती:  पूर्व विधायक मार्कण्डेय ने सरकार पर जनजातीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाया – Patlikuhal News

लाहौल-स्पीति के पूर्व विधायक डॉ. राम लाल मार्कण्डेय ने प्रदेश सरकार पर जनजातीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष हिमाचल का कुल बजट पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4,000 करोड़ रुपये कम है। मार्कण्डेय ने विशेष रूप से ट्राइबल सब-प्लान (TSP) के तहत बजट आवंटन में भारी गिरावट का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 1974-75 में निर्धारित नियमों के अनुसार, जनजातीय क्षेत्रों को कुल बजट का 9% हिस्सा मिलना चाहिए था, जिसमें लाहौल-स्पीति का नियमानुसार 34% हिस्सा बनता था। हालांकि, इस बार कुल जनजातीय आवंटन को घटाकर मात्र 3.72% (लगभग 302 करोड़ रुपये) कर दिया गया है। मार्कण्डेय ने इसे जनजातीय जनता के साथ बड़ा विश्वासघात बताया।
बिना ‘ब्लू बुक’ के बजट पास, भ्रष्टाचार की आशंका मार्कण्डेय ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिमाचल के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब जनजातीय उप-योजना की ‘ब्लू बुक’ या विस्तृत पुस्तिका के बिना ही बजट पारित कर दिया गया। पहले इस पुस्तिका में कृषि, बागवानी, सड़क और पुल जैसे विभागों के लिए अलग-अलग बजट का प्रावधान होता था। लेकिन यह धीरे धीरे खतम हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना स्कीम और बिना योजना के बजट पास करना यह दर्शाता है कि सरकार के पास विकास का कोई रोडमैप नहीं है, जिससे भ्रष्टाचार और फंड के दुरुपयोग की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में इस क्षेत्र में न केवल विकास की योजनाएं ठप होंगी. किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा क्या बोले पूर्व विधायक, क्षेत्र को भारी नुकसान को लेकर जताई चिंता अधूरे कार्यों की लंबी सूची, विकास पर प्रश्नचिन्ह पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए पूर्व विधायक ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में शुरू हुए हजारों विकास कार्य आज पूरी तरह बंद पड़े हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी योजनाओं के लिए भी सरकार के पास 40% हिस्सा देने के लिए धन नहीं है।
उन्होंने लाहौल-स्पीति की जनता के सामने प्रश्न खड़ा किया कि बिना किसी वित्तीय योजना और बिना बजट के इन जनजातीय इलाकों का विकास कैसे संभव होगा? उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की अनदेखी के कारण आज पूरा जनजातीय क्षेत्र पिछड़ने की कगार पर है।



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