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मणिपुर के उखरुल में फायरिंग से 3 की मौत: मिलिटेंट्स ने कई घर जलाए, नगा-कुकी समुदाय में तनाव; 7 अप्रैल से अब तक 10 मौतें

मणिपुर के उखरुल में फायरिंग से 3 की मौत:  मिलिटेंट्स ने कई घर जलाए, नगा-कुकी समुदाय में तनाव; 7 अप्रैल से अब तक 10 मौतें


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इंफाल6 घंटे पहले

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इंफाल में दो बच्चों की मौत के विरोध में 22 अप्रैल को प्रदर्शन हुए। सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।

मणिपुर के उखरुल जिले में शुक्रवार सुबह दो अलग-अलग फायरिंग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई। मुल्लम गांव के पास सुरक्षाबलों ने करीब 11:25 बजे दो शव बरामद किए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों आर्मी प्रिंट कपड़ों में थे।

उनके शरीर पर गोली के निशान मिले हैं। दूसरी घटना सिनाकेइथेई गांव की है, जहां 29 साल के एच. जमांग नाम के युवक को हमलावरों ने घात लगाकर मार डाला। अधिकारियों ने शव बरामद कर लिया है। कुकी संगठनों ने आरोप लगाया कि नगा मिलिटेंट्स ने सुबह करीब 5:30 बजे उनके गांवों पर हमला किया।

इसमें गांव के वॉलंटियर्स मारे गए और महिलाओं-बच्चों सहित कई लोग घायल हुए। हमलावरों ने फायरिंग के साथ कई घरों में आग भी लगा दी। हालांकि नगा संगठनों ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। दोनों समुदायों के बीच तनाव का माहौल है।

हाल ही में दो नगा समुदाय के लोगों की हत्या के विरोध में 22 अप्रैल को इंफाल में नगा संगठनों ने कैंडल मार्च किया।

हाल ही में दो नगा समुदाय के लोगों की हत्या के विरोध में 22 अप्रैल को इंफाल में नगा संगठनों ने कैंडल मार्च किया।

मणिपुर में अप्रैल में अब तक 10 मौतें-

  • 6-7 अप्रैल– बिष्णुपुर जिले में मिलिटेंट्स ने देर रात एक घर पर बम फेंका। घर में सो रहे 5 साल के लड़के और उसकी 6 महीने की बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हो गई।
  • 7 अप्रैल– दोनों बच्चों की मौत से गुस्साए करीब 400 लोगों ने सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर दिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने फायरिंग की। इसमें दो लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 20 अन्य घायल हो गए
  • 10 अप्रैल– उखरुल जिले के लितान इलाके में मिलिटेंट्स के बीच हुई गोलीबारी में BSF के कांस्टेबल मिथुन मंडल (34) की मौत हो गई।
  • 18 अप्रैल– उखरुल में हाईवे पर दो नगा समुदाय के लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इनमें एक रिटायर्ड सेना कर्मी भी शामिल था।
  • 24 अप्रैल- उखरुल जिले में दो अलग-अलग फायरिंग की घटनाओं में 3 लोगों की मौत हो गई।

मेइरा पाईबी की महिलाएं सड़कों पर उतरीं

बम हमले में दो बच्चों की मौत के बाद से ममिपुर में जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। 18 अप्रैल से राज्य में पूर्ण बंद लागू है। आम-जनजीवन ठप है। इसी बीच मेइरा पाइबी समूह की महिलाएं सड़कों पर उतर आईं हैं।

हजारों महिलाओं का यह समूह शांति-व्यवस्था के लिए न केवल सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा है, बल्कि सामाजिक स्तर पर लोगों को भी जोड़ रहा है। ये महिलाएं दिन में रास्ते रोक रही हैं, धरना दे रही हैं। वहां से न पुलिस निकल सकती है, न कोई और।

वहीं, रात में मशाल रैलियों से इलाकों की पहरेदारी भी कर रही हैं। एक प्रदर्शनकारी महिला ने बताया- घर संभालना, आंदोलन में जाना और रोजी-रोटी की चिंता, तीनों को साथ लेकर चलना चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है और मैं हर चीज संतुलित कर रही हूं।

मेइरा पाईबी मणिपुर में शांति की बहाली की मांग करते हुए सड़कों पर उतरी हैं।

मेइरा पाईबी मणिपुर में शांति की बहाली की मांग करते हुए सड़कों पर उतरी हैं।

बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी

– लगातार बंद के कारण आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। ख्वैरामबंद इमा मार्केट में कुछ महिला विक्रेता दुकानें खोलने को मजबूर हुई हैं। अनीता लौरेंबम ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि वे आंदोलन के खिलाफ हैं। वे इस काम के बाद आंदोलन में शामिल होंगी। – नागरिक संगठन ‘कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ ने 25 अप्रैल को बड़े स्तर पर आंदोलन की घोषणा की है।

मेइरा पाईबी मुख्य रूप से मानवाधिकारों की रक्षा और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भूमिका निभाती हैं।

मेइरा पाईबी मुख्य रूप से मानवाधिकारों की रक्षा और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भूमिका निभाती हैं।

46 सालों से सक्रिय है ‘मेइरा पाइबी’

– 80 के दशक में शराबखोरी और मादक पदार्थ की समस्या से निपटने के लिए यह आंदोलन बना। तब भी मशाल से गश्त की जाती थी। – उद्देश्य सामुदायिक भावना को बढ़ावा देना था, ताकि मुद्दे सुलझाने के लिए लोग मिलकर काम करें। – इस आंदोलन ने मानवाधिकारों के हनन, अफस्पा के तहत कार्रवाई के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया। – इरोम शर्मिला इस आंदोलन का सबसे उल्लेखनीय चेहरा रही हैं, जिनके आंदोलन ने दुनिया का ध्यान मणिपुर की ओर खींचा।

मणिपुर में एक साल राष्ट्रपति शासन रहा, 4 फरवरी को नई सरकार बनी

मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह 2025 के शुरुआती महीनों तक जारी रही। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं। हजारों लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए।

मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी, 2025 को इस्तीफा दे दिया था। दो साल से ज्यादा समय तक जारी हिंसा न रोक पाने के कारण उनपर लगातार राजनीतिक दबाव बन रहा था।

बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा था। करीब एक साल बाद 4 फरवरी 2026 को मणिपुर में नई सरकार का गठन हुआ। भाजपा के युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

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