मुख्य बातें

DMF घोटाला…पूर्व IAS टुटेजा की बेल खारिज: हाईकोर्ट बोला- विभाग के सीनियर अफसर रहे, सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा, जमानत नहीं दे सकते – Chhattisgarh News

DMF घोटाला…पूर्व IAS टुटेजा की बेल खारिज:  हाईकोर्ट बोला- विभाग के सीनियर अफसर रहे, सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा, जमानत नहीं दे सकते – Chhattisgarh News


बिलासपुर44 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

डीएमएफ घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे पूर्व IAS टुटेजा की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है।

छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे पूर्व IAS अनिल टुटेजा की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस एनके व्यास ने कहा कि आरोपी पहले विभाग में सीनियर अफसर रह चुके हैं और यह आर्थिक गड़बड़ी सोच-समझकर की गई है।

कोर्ट ने यह भी माना कि मामले में गवाहों और सबूतों को प्रभावित किए जाने की आशंका है। दरअसल, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच रिपोर्ट के आधार पर कोरबा के डीएमएफ फंड घोटाले में केस दर्ज किया था।

यह मामला उस समय का है, जब अनिल टुटेजा उद्योग विभाग में अतिरिक्त सचिव थे। इस केस में अनिल टुटेजा को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया है। जेल में रहते हुए निलंबित आईएएस टुटेजा ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी।

ईओडब्ल्यू और एसीबी ने ईडी की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएमएफ फंड घोटाले में केस दर्ज किया था।

ईओडब्ल्यू और एसीबी ने ईडी की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएमएफ फंड घोटाले में केस दर्ज किया था।

रानू समेत अन्य आरोपियों को बेल का दिया हवाला

जमानत याचिका में उनके वकील ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस केस के आरोपी रानू साहू सहित अन्य को जमानत दे दी है। साथ ही कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कई मामलों की जांच कर एफआईआर दर्ज की गई है, जिसका कोई सबूत नहीं है। जांच में जान बुझकर देरी की जा रही है। ऐसे में याचिकाकर्ता भी जमानत का हकदार है।

राज्य शासन ने कहा- गवाहों को प्रभावित करने की आशंका

दूसरी तरफ राज्य शासन के तरफ से जमानत देने का विरोध किया, कहा कि डीएमएफ घोटाले के साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग, कोयला लेवी और शराब घोटाले के केस में उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। केस में उन्हें जमानत देने से गवाह और सबूत प्रभावित हो सकता है।

हाईकोर्ट बोला- अपराध में संलिप्लता, नहीं दी जा सकती जमानत

इस मामले की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास की बेंच में हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत लगाए गए आरोपों में आवेदक की भूमिका सामने आती है।

हाईकोर्ट ने केस डायरी का हवाला देते हुए कहा कि सतपाल सिंह छाबड़ा को संबंधित फर्मों से अवैध कमीशन के रूप में करीब 16 करोड़ रुपए मिले थे और इसमें से कुछ राशि आवेदक तक भी पहुंची है।

इस आधार पर अदालत ने माना कि प्रारंभिक रूप से आवेदक की इस अपराध में संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।

सभी पक्षों को सुनने के बाद आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

सभी पक्षों को सुनने के बाद आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

पद का दुरुपयोग और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि आवेदक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी कंपनियों के माध्यम से सार्वजनिक धन का गलत उपयोग किया, जिससे जनता को नुकसान हुआ है। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता आवेदक की भूमिका और गवाहों को प्रभावित करने की संभावना को ध्यान में रखा।

आर्थिक अपराध पर सख्त टिप्पणी

साथ ही यह भी माना कि आवेदक विभाग में वरिष्ठ पद पर रहा है और सप्लायरों के साथ मिलकर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग में शामिल रहा है। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध जानबूझकर किए जाते हैं और इनमें निजी लाभ को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे समाज का भरोसा कमजोर होता है और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी अधिकारी की जमानत याचिका खारिज कर दी।

………………………

इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए…

DMF घोटाला…आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा गिरफ्तार: कोर्ट ने 6 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर भेजा, EOW वित्तीय अनियमितताओं को लेकर करेगी पूछताछ

छत्तीसगढ़ में DMF घोटाला केस में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने गुरुवार को आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है। EOW ने आरोपी को रायपुर के स्पेशल कोर्ट में पेश किया। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *