यूपी के बांदा की चर्चा इन दिनों देश-दुनिया में है। कारण है, भीषण गर्मी। 27 अप्रैल को यहां का तापमान 47.6°C तक पहुंच गया। इस दिन यह दुनिया का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया। सवाल उठा कि दुनिया में भीषण तपने वाले रेगिस्तानों से भी यह गर्म है? अगर हां, तो
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मौसम वैझानिक कहते हैं- बांदा का तापमान पिछले 20 साल से लगातार बढ़ रहा है। जून, 2019 में तो यहां का पारा 49°C पार कर गया था।
मौसम वेबसाइट एक्यूवेदर के मुताबिक, 27 अप्रैल, 2026 को राजस्थान के थार रेगिस्तान का तापमान 46°C और अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान का 30°C था।
ऊपर अधिकतम और नीचे न्यूनतम तापमान दिखाया गया है।
दुनिया में डेथ वैली, लुत रेगिस्तान गर्मी का पर्याय, वहां कितनी गर्मी…
दुनिया में सबसे गर्म स्थानों में डेथ वैली, लुत मरुस्थल और इथियोपिया देश का डलोल है। यहां तापमान अलग-अलग तरीकों से मापा जाता है।
हवा के तापमान के आधार पर- विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, अमेरिका की डेथ वैली को दुनिया की सबसे गर्म जगह माना जाता है। 10 जुलाई, 1913 को यहां हवा का तापमान 56.7°C दर्ज किया गया था। हालांकि, 27 अप्रैल, 2026 को यहां का तापमान 28°C था।
जमीन के तापमान के आधार पर- जमीन के तापमान के आधार पर ईरान का लुत मरुस्थल दुनिया में सबसे ज्यादा गर्म रहता है। नासा के सैटेलाइट ने 2003 से 2009 के बीच यहां की जमीन का तापमान 70.7°C दर्ज किया था। यहां के कुछ हिस्से इतने गर्म हैं कि जीवन असंभव है। 27 अप्रैल को यहां का तापमान 27°C था।
औसत तापमान के आधार पर- औसत तापमान के आधार पर इथियोपिया देश की डलोल एक ऐसी जगह है, जहां सालभर गर्मी रहती है। यहां सालभर तापमान करीब 34-35°C रहता है। 27 अप्रैल को यहां का तापमान 35°C था।

बांदा में इतनी गर्मी क्यों…
लखनऊ के आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के सीनियर साइंटिस्ट अतुल कुमार सिंह कहते हैं- बांदा की जमीनें उबड़-खाबड़ पठार और मैदान हैं। यहां की जमीन में ग्रेनाइट और विंध्य पर्वत की चट्टानें हैं। पत्थर और चट्टानों की खूबी होती है कि ये सूरज के ताप से बहुत जल्दी गर्म हो जाती हैं, लेकिन ठंडी धीरे-धीरे होती हैं। इससे सूरज डूबने के बाद भी वातावरण में भीषण गर्मी महसूस होती रहती है।
बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. दिनेश शाह कहते हैं- राजस्थान से आ रही गर्म हवाएं बांदा का तापमान और बढ़ा रही हैं। तेज धूप और वातावरण में नमी की कमी के कारण तपन ज्यादा महसूस हो रही है।

पारे वाले थर्मामीटर, ऑटोमैटिक सेंसर से मापते हैं तापमान
बांदा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. दिनेश शाह ने बताया- तीन विभाग बांदा में तापमान मापते हैं। मौसम विभाग कलेक्ट्रेट से तापमान रिकॉर्ड करता है, जिसे आधिकारिक डेटा माना जाता है। यूपी डिजास्टर मैनेजमेंट ने हर तहसील में डिजिटल और ऑटोमैटिक सेंसर लगाए हैं।
बांदा कृषि विश्वविद्यालय ऑटोमैटिक सेंसर और पारे वाला थर्मामीटर से तापमान मापता है। ये यूनिवर्सिटी शहर से 5-6 किलोमीटर दूर है। विश्वविद्यालय की रीडिंग देहात क्षेत्र की मानी जाती है।
‘तापमान मापने के लिए लकड़ी के एक बॉक्स में पारे वाला थर्मामीटर रखा जाता है। ये बॉक्स इस तरह से बना होता है कि हवा इसके अंदर से गुजर सके। जिस इलाके का तापमान मापना होता है, वहां इसे 24 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। थर्मामीटर दिनभर तापमान मापता है और सबसे ऊंचे तापमान वाले पॉइंट पर जाकर रुक जाता है। बाद में इसे मौसम वैज्ञानिक रिकॉर्ड कर लेते हैं।’

बांदा से सटे शहर भी क्या इतने ही गर्म हैं
बांदा के आसपास के जिलों में भी तेज गर्मी पड़ रही है। हालांकि, तापमान बांदा से कम है। 27 अप्रैल को जब बांदा का तापमान 47.6°C पहुंचा, तब उससे लगने वाले फतेहपुर, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में भी तापमान 46 के करीब था।
मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में वहां भी तापमान धीरे-धीरे बढ़ेगा। बुंदेलखंड के बांदा, झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में गर्मी का पैटर्न लगभग एक जैसा रहने वाला है। मतलब सारे जिले 44 से 46°C तापमान तक गर्म होते हैं।

बांदा में हीटवेव का असर, अस्पतालों में बढ़े मरीज
बांदा में भीषण गर्मी से अस्पतालों में मरीज बढ़ने लगे हैं। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के. कुमार ने बताया- हर दिन 500-600 मरीज आते हैं। कभी-कभी ये संख्या एक हजार के पार हो जाती है। इनमें सैकड़ों लोगों को भर्ती करना पड़ रहा है। ये मरीज उल्टी, दस्त और पेट दर्द से परेशान हैं।
2024 में गर्मी से 200 चमगादड़ों की मौत हो गई थी। इसके साथ ही कुछ तोते ने भी दम तोड़ दिया था। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी निर्मल कुमार ने इसकी पुष्टि की थी।

बांदा नगर पालिका ने हीटवेव से बचने के किए कूलिंग सेंटर बनाए हैं।

गर्मी से बचने के लिए बच्चे केन नदी में नहाते रहते हैं।

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