मनाली में 2589वीं बुद्ध जयंती के अवसर पर हिमालयन बुद्धिस्ट कल्चरल सोसाइटी मनाली द्वारा एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस दौरान मनाली बौद्ध मठ में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जिसमें लद्दाख से आए बौद्ध धर्म के ज्ञाता डॉ. टशी पलजोर ने प्रवचन दिए। कार्यक्रम में उपायुक्त कुल्लू अनुराग चंद्र शर्मा और एसडीएम मनाली गुंजीत सिंह चीमा भी उपस्थित रहे। सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत पिन वैली के किंगरी गोंपा के छात्रों ने विशेष मुखौटा नृत्य ‘छम नृत्य’ प्रस्तुत किया। बुद्धिस्ट सोसाइटी के सदस्य और रिटायर प्रधानाचार्य रूप सिंह ठाकुर ने बताया कि छम नृत्य बुराई से लड़ने के लिए दैत्य रूप धारण करने का प्रतीक है और यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। बौद्ध मठ को शांति स्थल के रुप में विकसित करने पर प्रशासन करेगा सहयोग मुख्य अतिथि उपायुक्त कुल्लू अनुराग चंद्र शर्मा ने कहा कि यदि सोसाइटी बौद्ध मठ को शांति स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है, तो जिला प्रशासन इसमें पूरा सहयोग करेगा। बौद्ध धर्म के विद्वान डॉ. टशी पलजोर ने उपस्थित जनसमूह को बताया कि बुद्ध जयंती के दिन ही महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था, इसी दिन उन्हें बोधगया में ज्ञान प्राप्त हुआ था, और इसी दिन 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर में उन्हें महापरिनिर्वाण की प्राप्ति हुई थी। दुनियाभर में मनाई जाती है बुद्ध जयंती बता दें कि, महात्मा बुद्ध जयंती वैशाख महीने की पूर्णिमा को भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों द्वारा बड़े उत्साह से मनाई जाती है। महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व लुंबिनी में हुआ था और उन्हें 483 ईसा पूर्व कुशीनगर में महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ था। बुद्ध जयंती पर भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और अहिंसा के संदेशों को याद किया जाता है।
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