भवानीपुर की गलियों में कदम रखते ही महसूस होता है कि कुछ बदल गया। एक तरफ जश्न, दूसरी तरफ खामोशी। ममता की हार के बाद सड़क पर कई जगह TMC के झंडे पड़े दिखे। थोड़ा आगे डीजे की तेज आवाज आई। ‘जय श्री राम’ का उद्घोष और गानों पर नाचते लोग दिखे। बोले, ‘खेला खत्
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भवानीपुर ममता बनर्जी का घर है। यहीं जन्मीं। तीन बार चुनाव जीतीं। इस बार सुवेंदु अधिकारी से हार गईं। BJP ने TMC के डर और भवानीपुर की बदहाली, कचरे के ढेर को ममता के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया।
लेकिन ये हुआ कैसे… उससे पहले हालात की एक कहानी
सुवेंदु घर आए तो TMC वालों ने BJP कार्यकर्ता की पत्नी को सफेद साड़ी भेजी
कालीघाट के टर्फ रोड एरिया में रहने वाली रीता दत्ता के पति 38 साल से BJP में हैं। एक दिन सुवेंदु अधिकारी उनसे मिलने घर आए। रीता बताती हैं कि सुवेंदु दा के लौटने के 10 मिनट बाद ही तीन लड़के आए। उम्र 20-22 साल होगी। हाथ में एक पैकेट था। बोले- TMC की तरफ से है। पैकेट में सफेद साड़ी थी। उस पर लिखा था- सुवेंदु दो दिन, TMC सारा जीवन।
रीता बताती हैं, ‘इसके बाद भी हमें धमकियां मिलती रहीं। कहा गया कि 4 तारीख के बाद देख लेंगे। हाथ-पैर तोड़ देंगे। हमने ये बात सुवेंदु दा तक पहुंचाई। उनकी मदद से कालीघाट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई। उन लोगों को अरेस्ट करवाया।’

ये रीता हैं। उन्होंने अब तक साड़ी संभालकर रखी है, ताकि कभी सबूत के तौर पर काम आए। इस पर लाल स्याही से लिखा है सावधान। नीचे लिखा है- सुवेंदु दो दिन रहेगा और TMC जीवनभर।
ये हालात बदले कैसे… शुरुआत BJP के ऑफिस बनवाने से
राजस्थान के BJP लीडर राजेंद्र राठौड़ भवानीपुर के प्रभारी थे। अमित शाह और सुनील बंसल के करीबी हैं। 7 बार के विधायक हैं। नेता प्रतिपक्ष भी रहे। वे करीब 50 दिन भवानीपुर में रहे। राठौड़ भवानीपुर पहुंचे, तो पता चला कि यहां BJP का ऑफिस ही नहीं है। उनके साथी विधायक गुरबीर बराड़ बताते हैं, ‘TMC के लोग ऑफिस बनने नहीं देते थे। हमने एक जगह तलाशी। उसके मालिक को ऑफिस बनाने के लिए तैयार किया।’
‘ऑफिस बनाना अब भी मुश्किल था। कंस्ट्रक्शन का सामान पुलिस ने रास्ते में रोक लिया। वहां से गाड़ी छूटी, तो TMC के लोगों ने घेर लिया। धमकाने लगे। हमने CRPF की मदद ली और 4-5 दिन में ऑफिस बनकर तैयार हो गया। ममता को हराने से पहले हमने भवानीपुर में ऑफिस बनाकर उनके गुंडों को चैलेंज किया।’

फोटो भवानीपुर में BJP के ऑफिस के उद्घाटन की है। इसका कंस्ट्रक्शन राजस्थान से टीम आने के बाद शुरू हुआ था।
8 रणनीतियां, जिन्होंने भवानीपुर की कहानी बदल दी
1. वोटर से मिलने हर घर तक पहुंचीं तीन-तीन लोगों की टीम
BJP ने कैसे ममता के मजबूत किले में बिना शोर मचाए सेंध लगा दी। इसका जवाब छिपा है, घर-घर पहुंचने वाली रणनीति में। BJP ने प्रचार के लिए डायरेक्ट कनेक्शन पर जोर दिया। तीन-तीन लोगों की टीमें बनाईं, दो पुरुष और एक महिला। इनका काम था हर घर तक पहुंचना, वोटर से बात करना और महसूस कराना कि उसका वोट मायने रखता है। इसके उलट TMC के लोग झुंड में चुनाव प्रचार के लिए जाते थे। इस वजह से लोग उनसे कतराते थे।
2. गलियों से ज्यादा हाईराइज बिल्डिंगों में प्रचार
भवानीपुर की पहचान बहुमंजिला इमारतों से भी है। यहां प्रचार आसान नहीं होता। BJP कार्यकर्ता बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड को साथ लेते, फिर लिफ्ट से सबसे ऊपर जाते और वहां से नीचे आते हुए हर फ्लैट में दस्तक देते। हर घर में प्रधानमंत्री का लेटर, संकल्प पत्र और सुवेंदु अधिकारी की प्रोफाइल वाला पर्चा दिया जाता।

घर-घर जाने वाले BJP कार्यकर्ता ये चीजें लोगों को देते थे। इनमें एक पेन, चाभी का छल्ला, BJP का संकल्प पत्र और प्रधानमंत्री का लेटर होता था।
पूरे प्रचार का सबसे अहम पहलू था सोशल मीडिया से दूरी। BJP ने घर-घर संपर्क की न फोटो पोस्ट कीं और न मीटिंग की जानकारी दी गई। किसी नेता के दौरे को हाईलाइट नहीं किया। पूरा अभियान खामोशी से चला। इससे बिना रुकावट प्रचार चलता रहा।
3. सुबह 10 से शाम 5 बजे का वक्त महिलाओं के लिए
प्रचार के दौरान समझ आया कि सुबह जल्दी या देर शाम जाने पर अक्सर घर के पुरुष ही मिलते हैं। इससे घर की महिलाओं तक पहुंच नहीं बन पाती। तय किया गया कार्यकर्ता सुबह 10 बजे के बाद और शाम 5 बजे से पहले घर-घर जाएंगे। इससे सीधे महिलाओं से बात की गई। उनके मुद्दे सुने गए। पुरुषों के लिए सुबह का वक्त चुना, जब वे टहलने निकलते थे। बुद्धिजीवियों, डॉक्टरों, एडवोकेट, पत्रकारों, शिक्षकों, रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ अलग से मीटिंग की गई।
4. पुराने कार्यकर्ताओं के लिए कॉलसेंटर, फोन करके एक्टिव किया
एक कॉल सेंटर बनाकर पुराने कार्यकर्ताओं को फोन किया गया। उनसे पूछा गया कि वे BJP से कब जुड़े थे। किसने मेंबर बनाया था। अब एक्टिव हैं या नहीं। अगर मीटिंग में बुलाया जाए तो आएंगे या नहीं। ये निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को एक्टिव करने का अभियान था।
5. 5 हजार नए और साइलेंट वोटर, जिन्होंने गेम बदल दिया
SIR की वजह से भवानीपुर में वोटर लिस्ट से करीब 40 हजार नाम कट गए। 5 हजार से ज्यादा नए नाम जुड़े। इनमें ज्यादातर ऐसे युवा थे, जो पढ़ाई या नौकरी के लिए बाहर चले गए थे और चुनाव के लिए लौटे थे। इन लोगों को खास तौर पर टारगेट किया गया और उनसे संपर्क बनाया गया।
भवानीपुर के रहने वाले गौतम कुमार बताते हैं, ‘लोग खुलकर कुछ नहीं बोल रहे थे, लेकिन अंदर ही अंदर फैसला कर चुके थे। इस बार साइलेंट वोटर सबसे बड़ा फैक्टर बने। वे सामने कुछ नहीं बोले, लेकिन वोटिंग के दिन फैसला दे दिया।’
6. गुजराती, मारवाड़ी, राजस्थानी वोटर के हिसाब से टीमें बनाईं
भवानीपुर में लगभग 42% वोटर बंगाली हिंदू और 34% गैर-बंगाली हिंदू हैं। लगभग एक चौथाई वोटर मुस्लिम हैं। बिहार, ओडिशा और झारखंड से आए प्रवासियों के अलावा सिख, मारवाड़ी और राजस्थान के लोग भी रहते हैं। इसलिए टीम में सिख, मारवाड़ी और राज्यों के हिसाब से लीडर रखे गए, ताकि वोटर से सीधा कनेक्ट कर पाएं। 8 वार्ड में 8 अलग-अलग प्रवासी अध्यक्ष भी बनाए। ये सभी राजस्थान से थे।

7. लोगों को भरोसा दिया, जीतें या हारें, सुरक्षा देते रहेंगे
भवानीपुर सीट के प्रभारी राजेंद्र राठौड़ बताते हैं, ‘पिछले चुनाव में जिन लोग पर BJP को वोट डालने का शक था, नतीजे आने के बाद उनके घर की पाइपलाइन कटवा दी गई थी। उनके घरों के सामने कचरा फिंकवाया गया था। काउंसलर्स ने इनसे माफीनामा लिखवाया था। इस बार भी लोग हाथ जोड़कर कहते थे कि आप हमारे घर न आएं। अगर TMC फिर जीती, तो हमें जीने नहीं देंगे। हमने लोगों की सुरक्षा के लिए कार्यकर्ताओं के साथ सेंट्रल फोर्स की मदद ली। कहा कि BJP जीते या हारे, आपकी सुरक्षा होगी।
8. गंदी नाली, कचरे के ढेर को ममता के खिलाफ मुद्दा बना दिया
राजेंद्र राठौड़ बताते हैं, ‘हमने गंदी नालियों और कचरे के ढेर को मुद्दा बनाया। हमने कहा कि क्या ममता बनर्जी के इलाके के लोग गंदी नालियों और कचरे के ढेर के बीच रहने के हकदार हैं।’
और इससे हासिल क्या हुआ…
ममता हार गईं। 15,105 वोट से। भवानीपुर में पहली बार। 20 राउंड की काउंटिंग में ममता सिर्फ 7 राउंड और सुवेंदु 15 राउंड में आगे रहे, यानी एकतरफा जीत। इससे पहले यहां 5 बार चुनाव हुए थे, हर बार TMC जीती थी।

BJP की जीत को कुछ लोग बदलाव और राहत मान रहे हैं, कुछ फिक्रमंद हैं, यानी हर गली की अपनी कहानी है। बबलू दास कहते हैं, ‘माहौल ठीक नहीं है। बहुत तोड़फोड़ हुई है। वहीं राजेश बर्मन कहते हैं, ‘अभी माहौल शांत है, लेकिन लोग थोड़े नाराज जरूर हैं।’
कई महिलाएं और बुजुर्ग मायूस भी नजर आए। कालीघाट की एक गली में मिली लीला शाह बोलीं, ‘हम चाहते थे दीदी जीतें। हमें लक्ष्मी भंडार से फायदा मिलता था, अब पता नहीं क्या होगा।’
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बंगाल में BJP की मौजूदा जीत के 5 किरदार हैं। पहले अमित शाह, दूसरे उनका दाहिना हाथ रहे सुनील बंसल, फिर शिवप्रकाश सिंह, अमित मालवीय और भूपेंद्र यादव। अमित शाह की टीम ने बंगाल में ममता दीदी के खौफ से लेकर BJP के भरोसे तक के सफर के लिए नारे गढ़ने का काम किया। पुलिस को कैसे सरेआम चेतावनी दी जाए। कैसे जनता के बीच ममता के ऊपर शाह की दबंग छवि गढ़ी जाए, ये सब प्लानिंग का हिस्सा थी। पढ़िए पूरी खबर…
