फ़रीदाबाद स्थित इंडिया हैबिटैट सेंटर में शनिवार को राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन सामग्री परिषद द्वारा कंक्रीट निर्माण की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का विषय था- आईएस 456:2025 (मसौदा) के अनुसार कंक्रीट के टिकाऊपन का डिज़ाइन और गुणवत्ता सुनिश्चित करना। इस कार्यक्रम में निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और भारतीय मानक ब्यूरो के अधिकारियों ने भाग लेकर नए मसौदे पर विस्तार से चर्चा की। कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि सीएसआईआर सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रुड़की के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार रामनचारला ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि देश में टिकाऊ और मजबूत निर्माण के लिए कंक्रीट की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना बहुत जरूरी है। विशेषज्ञों ने कंक्रीट निर्माण से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा की इस अवसर पर भारतीय मानक ब्यूरो के उप महानिदेशक ( मानकीकरण) इंजीनियर संजय पंत विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं कार्यक्रम में राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन सामग्री परिषद के महानिदेशक डॉ. एलपी सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों ने कंक्रीट निर्माण से जुड़े अलग-अलग विषयों पर जानकारी साझा की। इन सत्रों में परिषद के संयुक्त निदेशक इंजीनियर पीएन ओझा, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर मनु संथनम, परिषद के पूर्व संयुक्त निदेशक इंजीनियर वीवी अरोरा और टीसीपीएल के अध्यक्ष प्रोफेसर महेश टंडन ने अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने कंक्रीट के टिकाऊपन का डिज़ाइन, निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री, गुणवत्ता की जांच और नियंत्रण प्रणाली तथा पूर्व-तनावग्रस्त कंक्रीट से जुड़े प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की।
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