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अवैध उत्खनन: क्या अपील के लिए 10% जुर्माना भरना जरूरी?: हाईकोर्ट तय करेगा-‘नियम 2022’ पुराने मामलों पर लागू होगा या नहीं – Gwalior News

अवैध उत्खनन: क्या अपील के लिए 10% जुर्माना भरना जरूरी?:  हाईकोर्ट तय करेगा-‘नियम 2022’ पुराने मामलों पर लागू होगा या नहीं – Gwalior News


मध्य प्रदेश में अवैध उत्खनन और परिवहन के मामलों में जुर्माना वसूलने और अपील की प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा कानूनी पेंच फंस गया है। ग्वालियर हाईकोर्ट की युगल पीठ अब यह तय करेगी कि क्या साल 2022 से पहले के मामलों में भी अपील दायर करने के लिए जुर्माने की 1

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मामला: 6.43 करोड़ का जुर्माना और ‘नियम 2022’ की चुनौती ग्वालियर के खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन के एक मामले में 20 गुना पेनल्टी लगाते हुए 6 करोड़ 43 लाख 50 हजार रुपए का भारी-भरकम जुर्माना ठोका था। याचिकाकर्ता स्मिता नीखरा ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। शासन का कहना है कि ‘नियम 2022’ के तहत अपील के लिए पहले जुर्माने का 10% जमा करना होगा। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चूंकि घटना और कारण 2022 के नियमों के लागू होने से पहले के हैं, इसलिए नई कठोर शर्तें उन पर थोपी नहीं जा सकतीं।

हाईकोर्ट के सामने दो बड़े कानूनी सवाल जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ अब निम्नलिखित बिंदुओं पर सुनवाई कर रही है। क्या अपील करने का अधिकार एक ‘प्रक्रियात्मक’ अधिकार है या ‘मौलिक/निहित अधिकार? क्या 2022 के नियम अपने लागू होने की तिथि से पहले के मामलों पर जुर्माना जमा करने की शर्त लगा सकते हैं?

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला याचिकाकर्ता के अधिवक्ता महेश गोयल ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों (मुकुंद देव बनाम महादु एवं ईसीजीसी लिमिटेड) का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि अपील का अधिकार उस दिन तय हो जाता है जिस दिन ‘कॉज ऑफ एक्शन’ (विवाद का कारण) पैदा होता है। ऐसे में पुराने मामलों में नए नियमों की ‘प्री-डिपॉजिट’ (अग्रिम जमा) की शर्त लगाना मनमाना और असंवैधानिक है।

अब आगे क्या? अतिरिक्त महाधिवक्ता ने प्रारंभिक आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता को सीधे हाईकोर्ट आने के बजाय नियम-27 के तहत विभागीय अपील करनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट अब इस ‘जुर्माना अनिवार्यता’ के कानूनी बिंदु पर विस्तार से सुनवाई करेगा।

कोर्ट की टिप्पणी “मामला गंभीर है क्योंकि यह अपील के अधिकार और उस पर लगाई गई वित्तीय शर्तों के बीच संतुलन से जुड़ा है। कोर्ट अब यह देखेगा कि क्या नए नियम पुराने अधिकारों को संकुचित कर सकते हैं।”



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