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सियासी दबाव में नियम ताक पर: झूठ बोलकर 50 करोड़ रुपए के दवा टेंडर में शामिल हुई फर्म, हाईकोर्ट से राहत नहीं, फिर भी जब्त 1 करोड़ लौटाने की तैयारी – Bikaner News

सियासी दबाव में नियम ताक पर:  झूठ बोलकर 50 करोड़ रुपए के दवा टेंडर में शामिल हुई फर्म, हाईकोर्ट से राहत नहीं, फिर भी जब्त 1 करोड़ लौटाने की तैयारी – Bikaner News

स्व. शकुंतला देवी के पुत्र नवीन शर्मा की रिपोर्ट पीबीएम अस्पताल में दवाओं के 50 करोड़ रुपए के टेंडर में फर्जीवाड़ा करके शामिल होने वाली फर्म पर मेहरबानी दिखाने का खेल शुरू हो गया है। ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद गलत शपथ पत्र (अंडरटेकिंग) देकर टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने वाली अमृतसर की फर्म ‘मैसर्स जैक्सन लैबोरेट्रीज’ की जब्त की गई 1 करोड़ रुपए की धरोहर राशि (ईएमडी) रिलीज करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने फाइल चला दी है। ऐसा भाजपा के एक विधायक के दबाव में हो रहा है। दिलचस्प यह है कि इस मामले में हाईकोर्ट से फर्म की याचिका खारिज हो चुकी है। हाईकोर्ट ने इस मामले में फर्म को सिविल सूट दायर करने को कहा था। इसके बावजूद अब चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (डीएमई) से मार्गदर्शन मांगकर राशि लौटाने का रास्ता निकाला जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने भी फाइल तलब की है। यह पूरा प्रकरण वर्ष 2024 में 1400 प्रकार की दवाओं के लिए जारी रेट कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा है। फर्म ने स्थानीय फर्म बटुक फार्मा के पक्ष में शपथ पत्र पर यह लिखकर दिया था कि वह या उसका कोई प्रोडक्ट पिछले तीन साल में कहीं भी ब्लैकलिस्टेड नहीं है। जांच में सामने आया कि फर्म को ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान स्टेट मेडिकल कॉर्पोरेशन द्वारा पहले ही डिबार किया जा चुका था। तथ्य छिपाने पर तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान ने आरटीपीपी एक्ट के तहत फर्म के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे। इसी आधार पर 1 करोड़ की राशि जब्त की गई थी। दो अधीक्षक और कई लेखाधिकारी बदल गए, लेकिन किसी ने राशि लौटाने की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई। अब अचानक एक महीने से अस्पताल के अधिकारियों और उपापन समिति के सदस्यों की सक्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि भारी राजनीतिक दबाव के चलते नियमों को ताक पर रखकर यह राशि लौटाने की तैयारी है। भास्कर इनसाइट – सिस्टम का फेलियर या भ्रष्टाचार की सेटिंग? यह केवल ₹1 करोड़ लौटाने का मामला नहीं है, बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता का है, जिसके दम पर सरकारी टेंडर होते हैं। जब हाईकोर्ट ने फर्म की याचिका खारिज कर दी और उसे केवल सिविल सूट (दीवानी वाद) का विकल्प दिया, तो अस्पताल प्रशासन खुद पहल करके पैसा लौटाने की जद्दोजहद क्यों कर रहा है? यदि ऐसे मामलों में राहत दी गई, तो भविष्य में कोई भी दागी फर्म झूठे दस्तावेज लगाकर टेंडर में घुस जाएगी और पकड़े जाने पर सियासी रसूख के दम पर जब्त की गई राशि वापस ले लेगी। क्या है नियम : आरटीपीपी अधिनियम-2012 और आरटीपीपी नियम-2013 के तहत सख्त सजा और दंडात्मक प्रावधान हैं। डीएमई ने दिए थे आरटीपीपी एक्ट के तहत कार्रवाई के आदेश चिकित्सा शिक्षा विभाग के तत्कालीन आयुक्त इकबाल खान के समक्ष इस प्रकरण को लेकर दूसरी अपील दायर हुई थी। उसकी सुनवाई के दौरान फर्म जैक्सन की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्र पर तथ्य झूठे पाए गए। इसके अलावा अधिकृत डीलर का टर्नओवर प्रस्तुत नहीं करने को निविदा की शर्त संख्या पांच का उल्लंघन माना गया। प्रथम अपील अधिकारी तत्कालीन कॉलेज प्रिंसिपल के उस निर्णय को भी खारिज कर दिया गया, जिसमें फर्म को तकनीकी रूप से योग्य माना गया था। फर्म का झूठ सामने आया तो डिबार हुई क्या कहते हैं ईएमडी जब्त करने वाले दो अधिकारी “टेंडर प्रक्रिया आरटीपीपी एक्ट से ही चलती है। इस मामले में कमेटी ने नियमों का हवाला देते हुए 1 करोड़ की ईएमडी सीज की थी।”
-डॉ. प्रमोद कुमार सैनी, पूर्व अधीक्षक, पीबीएम हॉस्पिटल “आरटीपीपी एक्ट के तहत उपापन दूषित होने पर कार्रवाई का प्रावधान है। अधीक्षक फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होता है।”
-विजय शंकर गहलोत, पूर्व मुख्य लेखाधिकारी, पीबीएम हॉस्पिटल क्या कहते हैं ईएमडी रिलीज का प्रयास करने वाले अधिकारी “फर्म ने ईएमडी के लिए आवेदन किया था। डीएमई को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है। फाइल संभागीय आयुक्त को भेजी जा रही है।”
-डॉ. बीसी घीया, अधीक्षक, पीबीएम हॉस्पिटल “जब्त की गई ईएमडी वापस लौटाने का प्रावधान मेरी नॉलेज में नहीं है। इसलिए मार्गदर्शन के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।”
-ललिता ननकानी, कार्यवाहक सीनियर एओ, पीबीएम हॉस्पिटल



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