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UCC की कमेटी इसी महीने शुरू करेगी जिलों में जनसुनवाई: आदिवासियों की परंपराओं का अध्ययन करेगी, दिल्ली और भोपाल में शुरू होंगे दो दफ्तर – Bhopal News

UCC की कमेटी इसी महीने शुरू करेगी जिलों में जनसुनवाई:  आदिवासियों की परंपराओं का अध्ययन करेगी, दिल्ली और भोपाल में शुरू होंगे दो दफ्तर – Bhopal News

मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की रूपरेखा तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक मंगलवार को दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में हुई। करीब दो घंटे चली इस बैठक में कमेटी के सभी सदस्यों को उत्तराखंड और गुजरात में लागू किए गए UCC मॉडल तथा प्रक्रिया से अवगत कराया गया। बैठक में मध्य प्रदेश की स्थानीय परिस्थितियों, सामाजिक, सांस्कृतिक प्रथाओं, मान्यताओं और परंपराओं की विस्तृत जानकारी साझा की गई। सदस्यों को उत्तराखंड और गुजरात के UCC ड्राफ्ट भी अध्ययन के लिए उपलब्ध करा दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य दिवाली 2026 तक प्रदेश में UCC लागू करने का है। बैठक में ये रहे मौजूद 10 दिन के भीतर होगी दूसरी बैठक बैठक में तय हुआ कि अगले 10 दिनों के भीतर कमेटी की दूसरी बैठक होगी। इस बीच सभी सदस्य मप्र के आदिवासी कानूनों, प्रथाओं और मान्यताओं का गहन अध्ययन करेंगे। दूसरी बैठक के बाद कमेटी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जनसुनवाई शुरू करेगी। शुरुआत संभागीय मुख्यालयों या जिला मुख्यालयों से हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, कमेटी चाहती है कि 30 मई से पहले ही जनसुनवाई और परामर्श बैठकें शुरू कर दी जाएं ताकि ड्राफ्ट तैयार करने में जनता की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। भोपाल और दिल्ली में शुरू होंगे दफ्तर
कमेटी को कामकाज के लिए दिल्ली (मप्र भवन) और भोपाल (वल्लभ भवन, थर्ड फ्लोर) में अलग-अलग कार्यालय उपलब्ध कराए जाएंगे। बैठक में अपर सचिव अजय कटेसरिया ने भोपाल में जनसुनवाई की सुरक्षा व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि भोपाल संवेदनशील शहर है, यहां पहले से तारीख तय करके सुरक्षा बंदोबस्त किए जाएं। कमेटी क्या करेगी वो भी समझिए कमेटी का मुख्य काम 60 दिनों के अंदर मध्य प्रदेश के लिए UCC का पूरा ड्राफ्ट बिल और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके राज्य सरकार को सौंपना है। इसके लिए विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना, संपत्ति अधिकार आदि) का अध्ययन करेगी। विशेष रूप से आदिवासी समुदायों की प्रथाओं, कानूनों और मान्यताओं का गहराई से अध्ययन तथा उनके लिए उचित प्रावधानों पर विचार करेगी। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक जनसुनवाई और परामर्श बैठकें आयोजित की जाएगी। लिव-इन रिलेशनशिप, महिला एवं बाल अधिकारों की सुरक्षा जैसे समसामयिक मुद्दों पर सुझाव लिए जाएंगे। राज्य की सामाजिक- सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए एक समावेशी और व्यावहारिक UCC ड्राफ्ट तैयार करना।



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