हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की हंगरंग घाटी एक बार फिर अपनी सामाजिक एकता और भाईचारे के लिए चर्चा में है। पूह ब्लॉक के सात गांवों हांगो, चुलिंग, लियो, नाको, चांगो, शलखर और सुमरा-में ग्रामीणों ने आपसी सहमति से बिना किसी चुनावी मुकाबले के प्रधान और उपप्रधान का चयन किया है। जानकारी के अनुसार, इन गांवों में नंबरदार और हेड लामा की अध्यक्षता में बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में ग्रामीणों ने सामूहिक सहमति और आपसी विश्वास के आधार पर अपने प्रतिनिधियों को चुना। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जिसमें किसी भी प्रकार का चुनावी तनाव या प्रतिस्पर्धा देखने को नहीं मिली। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय केवल पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हंगरंग घाटी की पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को भी दर्शाता है। गांववासियों ने विकास और एकता को प्राथमिकता देते हुए सर्वसम्मति से नेतृत्व चुनने का फैसला लिया। लोगों की सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल बुजुर्गों और युवाओं ने इस पहल को पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात बताया। उनका कहना है कि आज के समय में जहां चुनावों के दौरान अक्सर मतभेद और गुटबाजी देखने को मिलती है, वहीं हंगरंग घाटी के लोगों ने बिना चुनाव के प्रतिनिधि चुनकर समाज के सामने एक सकारात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रधान और उपप्रधान चुनना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय हालांकि किन्नौर के अन्य गांवों में भी समय-समय पर सर्वसम्मति से प्रधान चुने जाते रहे हैं, लेकिन हंगरंग घाटी के सातों गांवों द्वारा एक साथ बिना चुनाव प्रधान और उपप्रधान चुनना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का मानना है कि इस पहल से गांवों में विकास कार्यों को नई दिशा मिलेगी और समाज में भाईचारा तथा आपसी विश्वास और अधिक मजबूत होगा। यह पहल लोकतांत्रिक व्यवस्था को बिना विवाद और प्रतिस्पर्धा के भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने का एक मजबूत संदेश देती है।
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