चित्रकूट ग्राम पंचायत सिकरी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। प्रयागराज से पधारे परम पूज्य बालकृष्ण भार्गव महाराज ने भक्तों को सत्संग, भक्ति और भगवान की कृपा का महत्व समझाया। कथा के यजमान विजयपाल सिंह और हेमराज सिंह सहित उनके पूरे परिवार ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। महाराज ने शुकदेव भगवान के आगमन प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि सत्संग के बिना विवेक प्राप्त नहीं होता। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई “बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई” का उल्लेख किया। महाराज ने बताया कि सत्संग भगवान की विशेष कृपा से ही मिलता है, और जब प्रभु की कृपा होती है, तभी मनुष्य को जीवन सफल बनाने का मार्ग मिलता है। कथा के दौरान उन्होंने विदुर चरित्र, वराह अवतार, कपिल-देवहूति संवाद, सती चरित्र और ध्रुव चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। ध्रुव चरित्र सुनाते हुए महाराज ने बताया कि मात्र पांच वर्ष के बालक ध्रुव ने अपमान के बाद भगवान की कठोर तपस्या कर अटल स्थान प्राप्त किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भक्ति के लिए उम्र, जाति या शिक्षा कोई बाधा नहीं होती। महाराज ने अपने प्रवचन में कहा, “यदि भगवान आयु देखते तो ध्रुव को दर्शन न देते, जाति देखते तो शबरी को न मिलते और विद्या देखते तो गजेंद्र की पुकार नहीं सुनते।” उन्होंने समझाया कि सच्ची श्रद्धा, विश्वास, तप और समर्पण से की गई भक्ति व्यक्ति को अमर बना देती है। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस आयोजन के प्रमुख सहयोगियों में विजयपाल सिंह, हेमराज सिंह, पुष्पराज सिंह, हरीशचंद्र सिंह, रामनिवास सिंह और मनोज सिंह शामिल रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।
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