बक्सर जिले के डुमरांव अनुमंडल कार्यालय परिसर में स्थापित स्वर्गीय महाराज कमल बहादुर सिंह की प्रतिमा का बहुप्रतीक्षित अनावरण शनिवार को संपन्न हो गया। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बक्सर दौरे के दौरान वर्चुअल माध्यम से प्रतिमा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अनुमंडल कार्यालय सभागार में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, राजपरिवार के सदस्य और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। वर्षों के इंतजार के बाद हुए इस अनावरण से क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है। सचिवालय स्तर पर संज्ञान लिया गया यह प्रतिमा पिछले करीब चार वर्षों से प्लास्टिक से ढकी हुई थी, जिसके अनावरण की मांग स्थानीय स्तर पर लगातार उठ रही थी। डुमरांव विधायक राहुल कुमार सिंह की पहल इसमें निर्णायक साबित हुई। मुख्यमंत्री के बक्सर आगमन से पूर्व उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मिलकर प्रतिमा के उद्घाटन की मांग रखी थी। विधायक ने यह सवाल भी उठाया था कि जब प्रतिमा का निर्माण और स्थापना वर्षों पहले पूरी हो चुकी थी, तो उसका उद्घाटन अब तक क्यों नहीं कराया गया। इस मुद्दे के उठने के बाद सचिवालय स्तर पर संज्ञान लिया गया और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया गया। इसके बाद प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आई और अंततः प्रतिमा का अनावरण संभव हो सका। निर्माण का कार्य लगभग चार वर्ष पहले ही पूरा कर लिया जानकारी के अनुसार, तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर महाराज कमल बहादुर सिंह की स्मृति में लगभग साढ़े सात फीट ऊंची धातु की प्रतिमा स्थापित कराई गई थी। भवन निर्माण विभाग की देखरेख में करीब 19.29 लाख रुपये की लागत से चबूतरा, फूलों की सजावट और प्रतिमा निर्माण का कार्य लगभग चार वर्ष पहले ही पूरा कर लिया गया था। महाराज कमल बहादुर सिंह का राजनीतिक और सामाजिक जीवन क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत माना जाता है। वे स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव 1952 में बक्सर से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सांसद निर्वाचित हुए थे। वर्ष 1957 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। बाद में उनका जुड़ाव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से हुआ और उन्होंने जनसंघ की सदस्यता ग्रहण की। कार्यक्रम में एसडीएम राकेश कुमार, राजपरिवार के सदस्य मान विजय सिंह, महारानी कनिका सिंह, महारानी अरुणिमा सिंह, पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। ऐतिहासिक तालाबों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही डुमरांव के विकास में उनका योगदान आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है। शिक्षा, स्वास्थ्य और जल संरक्षण के क्षेत्र में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों की स्थापना के लिए कई एकड़ भूमि दान की थी। प्रतापसागर में तपेदिक रोग के इलाज और अनुसंधान के लिए मेथोडिस्ट चर्च को 15 एकड़ जमीन दान देना उनकी दूरदर्शिता का उदाहरण माना जाता है। इसके अलावा राज अस्पतालों की स्थापना तथा कई ऐतिहासिक तालाबों के निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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