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फरसगांव में लाखों के ओपन जिम बदहाल: देखरेख के अभाव में कबाड़ में बदल रहे उपकरण, लोगों ने नगर पंचायत को घेरा – Kondagaon News

फरसगांव में लाखों के ओपन जिम बदहाल:  देखरेख के अभाव में कबाड़ में बदल रहे उपकरण, लोगों ने नगर पंचायत को घेरा – Kondagaon News

कोंडागांव जिले के फरसगांव नगर पंचायत में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए ओपन जिम अब बदहाली का शिकार हो गए हैं। लोगों को फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने के उद्देश्य से स्थापित ये जिम देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं। कई उपकरण टूट चुके हैं, उन पर जंग लग गई है और जिम परिसर झाड़ियों व गंदगी से भर गए हैं। नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 05, 06 और 07 में स्थापित ओपन जिम की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। खासकर वार्ड क्रमांक 07 के जिम परिसर में कचरे का ढेर, उगी झाड़ियां और क्षतिग्रस्त मशीनें साफ तौर पर लंबे समय से लापरवाही की तस्वीर पेश कर रही हैं। जिस जगह सुबह-शाम लोगों की आवाजाही और व्यायाम होना चाहिए था, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। धीरे-धीरे मशीनें खराब होने लगीं स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में कुछ दिनों तक युवाओं और बच्चों ने जिम का उपयोग किया, लेकिन धीरे-धीरे मशीनें खराब होने लगीं। समय पर मरम्मत और रखरखाव नहीं होने से लोग वहां जाना बंद कर दिए। कई मशीनों के पाइप और बोल्ट टूट चुके हैं, जिससे हादसे का खतरा भी बढ़ गया है। चुनावी वादों पर उठे सवाल वार्डवासियों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन अब जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी इस सुविधा की अनदेखी कर रहे हैं। लोगों ने सवाल उठाया कि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सरकारी संपत्ति की ऐसी दुर्दशा के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है। स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत प्रशासन से मांग की है कि जिम परिसरों की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, खराब मशीनों की मरम्मत हो और नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो नगर पंचायत के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। सीएमओ बोले- सफाई के निर्देश दिए गए इस मामले में नगर पंचायत सीएमओ मयंक बसन्तवानी ने कहा कि ओपन जिम उनकी पदस्थापना से पहले लगाए गए थे। जिम परिसरों में गंदगी और झाड़ियों की जानकारी मिलने के बाद स्वच्छता टीम को तत्काल सफाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि दो-तीन दिनों के भीतर साफ-सफाई का काम पूरा करा लिया जाएगा। साथ ही खराब और अनुपयोगी उपकरणों को भी व्यवस्थित किया जाएगा, ताकि बच्चे और युवा दोबारा इनका उपयोग कर सकें।



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