ईद-उल-अज़हा यानी बकरा ईद गुरुवार को मनाई जाएगी। पर्व से एक दिन पहले मंदसौर शहर में एक अनोखी और वर्षों पुरानी परंपरा निभाई गई। देर रात तक शहर के बाजारों में बड़ी संख्या में युवा और बच्चे अपने बकरों को लेकर पहुंचे, जहां उन्हें फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और गुब्बारों से सजाया गया। सजे-धजे बकरों ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। फूल, लाइट और गुब्बारों से बढ़ाई जा रही बकरों की खूबसूरती बाजार में बकरों को खास अंदाज में सजाने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। कहीं बकरों के गले में फूलों की मालाएं डाली जा रही थीं, तो कहीं रंगीन लाइटों और आकर्षक सजावटी सामान से उन्हें सजाया जा रहा था। बच्चे और युवा अपने पसंदीदा बकरों को सजवाकर बाजार में घूमते नजर आए। इस दौरान बाजार में उत्साह और त्योहार की रौनक साफ दिखाई दी। बकरा सजवाने पहुंचे अयान, पिता अब्दुल हमीद ने बताया कि वे बचपन से ही ईद के एक दिन पहले बकरा सजवाने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि बकरों को खुशी और उत्साह के साथ सजाया जाता है। यह त्योहार की परंपरा और खुशी का हिस्सा है। कई लोग 20 वर्षों से कर रहे बकरों की सजावट बकरा सजाने का काम कर रहे इकबाल शाह ने बताया कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से लगातार यह कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईद से एक दिन पहले समाज के लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं और अपने बकरों को सजवाते हैं। सजावट की कीमत 151 रुपए से शुरू होकर 1100 रुपए तक रहती है। इकबाल शाह ने बताया कि पहले उनके पिता यह काम किया करते थे, जिसके बाद उन्होंने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। हालांकि, इस बार बकरा सजवाने आने वालों की संख्या पहले की तुलना में कुछ कम दिखाई दी। फरदीन ने बताया कि बकरों को सजाने के बाद लोग उन्हें लेकर बाजार में घूमते हैं और अगले दिन ईद पर उनकी कुर्बानी दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और लोग इसे उत्साह के साथ निभाते हैं। सुबह 7:20 बजे होगी मुख्य ईद की नमाज मंदसौर शहर काजी आसिफउल्लाह ने बताया कि शहर की मुख्य ईद की नमाज ईदगाह में सुबह 7:20 बजे अदा की जाएगी। इसके अलावा शहर की विभिन्न मस्जिदों में भी ईद की नमाज अदा होगी। प्रमुख स्थानों में नयापुरा मस्जिद, मदारपुरा मस्जिद, बिलाल मस्जिद, नाहर सैयद दरगाह और घंटाघर के समीप स्थित मदीना मस्जिद शामिल हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में भी गांवों की ईदगाहों और प्रमुख मस्जिदों में नमाज अदा की जाएगी। कुर्बानी के गोश्त के किए जाते हैं तीन हिस्से इस्लामी मान्यता के अनुसार, ईद-उल-अज़हा पर कुर्बानी के बाद गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं। पहला हिस्सा स्वयं के लिए रखा जाता है, दूसरा दोस्तों और रिश्तेदारों में बांटा जाता है, जबकि तीसरा हिस्सा जरूरतमंदों और गरीबों को दिया जाता है। इस्लाम में कुर्बानी को फर्ज माना गया है।
Source link
