मुख्य बातें

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस: केरल के तीन गांव का कहानी, यहां हिंदी भाषा विवाद मुद्दा नहीं, घर-घर संविधान की शिक्षा

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस:  केरल के तीन गांव का कहानी, यहां हिंदी भाषा विवाद मुद्दा नहीं, घर-घर संविधान की शिक्षा


तिरुवनंतपुरम1 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

2011 की जनगणना के मुताबिक, 7 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति जो किसी भी भाषा को समझकर पढ़ और लिख सकता है, उसे साक्षर माना जाता है। हालांकि, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में साक्षरता के मायने अलग-अलग हैं। सिर्फ अक्षर ज्ञान को ही साक्षरता नहीं माना जाता।

यूनेस्को ने साल 2025 में डिजिटल लिटरेसी को थीम बनाया है। आज इंटरनेशनल लिटरेसी डे पर पढ़ें केरल की उन गांवों की कहानियां, जिन्होंने साक्षरता को बड़े पैमाने में अपनाया…

  1. पुल्लमपाराः पहला डिजिटल साक्षर गांव अगस्त में केरल देश का पहला डिजिटल लिटरेट राज्य बना। इसकी शुरुआत 2021 में तिरुवनंतपुरम के पुल्लमपारा से हुई थी। यहां 3489 लोगों को डिजिटल साक्षरता की जरूरत थी। इनके लिए 2021 में ‘डिजि पुल्लमपारा’ अभियान शुरू हुआ। ये बाद में ‘डिजि केरलम’ नाम से राज्य में लागू हुआ। पुल्लमपारा पंचायत अध्यक्ष पीवी राजेश बताते हैं, बुजुर्गों को वॉलंटियर्स ने सोशल मीडिया चलाना, वीडियो कॉल करना सिखाया। अब गांव के बुजुर्ग गैजेट आत्मनिर्भर बन गए हैं।
  2. चेल्लानुर में लाइब्रेरी, आंगनवाड़ी और स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाती है मलयाली भाषी केरल में चेल्लानुर गांव में सभी को हिंदी आती है। 2021-25 में पंचायत ने हिंदी शिक्षक, हिंदी भाषी अधिकारी, सैनिक और खाड़ी देशों में काम कर चुके लोगों की मदद से प्रोजेक्ट चलाया। पंचायत अध्यक्ष पीपी नौशीर बताते हैं, गैर हिंदी भाषियों ने हिंदी सीखी तो कम्युनिकेशन गैप घटा, भाषा की दूरियां खत्म हुईं।
  3. चिराकाडावुः संविधान साक्षर गांव कोट्टायम के चिराकाडावु में हर घर की दीवार पर संविधान की प्रस्तावना लगी है। इसी साल चिराकाडावु देश की पहली ‘कॉन्स्टिट्यूशनल लिटरेट’ पंचायत बनी है। पंचायत प्रेसिडेंट एडवोकेट सी. आर. शिवकुमार ने बताया कि जुलाई 2024 में चिराकाडावु ने संवैधानिक साक्षरता का अभियान शुरू किया। 30 हजार से ज्यादा लोग हिस्सा बने। इसके बाद लोगों ने संविधान से जुड़ी परीक्षा भी दी। अब गांव से जुड़े हर फैसले, चर्चाओं के केंद्र में संविधान रहता है।

………………………………

सारक्षता से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

भारत में ऊंचे पदों पर केवल 19% महिलाएं कार्यरत: नौकरी में स्थिरता के लिए लम्बा संघर्ष करती है, शिक्षा में कमी और असमानता बड़ी चुनौतियां

भारत में महिलाओं की जनसंख्या 65 करोड़ से ज्यादा है। इसके बाद भी केवल 19 प्रतिशत यानी 12 करोड़ महिलाएं ही ऊंचे पदों पर काम कर रहीं है। ​​​​​​​टीमलीज की एक रिपोर्ट के अनुसार एंट्री लेवल पर केवल 46 प्रतिशत पदों पर महिलाएं है। ये रिपोर्ट महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर पर भी प्रकाश डालती है, जो 2.9 प्रतिशत से बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई है। ​​​​​​​पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *