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‘मार्च में इंडियन आर्मी करेगी बड़ा ऑपरेशन’: कश्मीर में आतंकियों को मैसेज, क्या है जैश-लश्कर-हिजबुल मुजाहिदीन का ‘हाइब्रिड टेरर मॉडल’

‘मार्च में इंडियन आर्मी करेगी बड़ा ऑपरेशन’:  कश्मीर में आतंकियों को मैसेज, क्या है जैश-लश्कर-हिजबुल मुजाहिदीन का ‘हाइब्रिड टेरर मॉडल’


‘हमारे लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। हम जानते हैं कि किसी भी इम्तिहान का मुश्किल हिस्सा आखिर में होता है। अल्लाह की मर्जी से हम इसे जीतकर, और मजबूत होकर निकलेंगे। ये सिर्फ आपकी लड़ाई है। जो भी करना है, खुद करना है। जल्द ही हम कब्जे से निपटने के

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ये मैसेज कश्मीर में एक्टिव आतंकियों के लिए है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन कश्मीरियों को अपने साथ जोड़ने के लिए प्रोपेगैंडा चला रहे हैं। दैनिक भास्कर को कुछ मैगजीन और डॉक्यूमेंट मिले हैं, जिनसे नौजवानों को संगठन से जोड़ने और हमले की तैयारी का खुलासा हुआ है। ये मैगजीन दिसंबर में आतंकी नेटवर्क के जरिए पब्लिश की गई थी।

ये मैगजीन या एक-दो पेज के स्टेटमेंट वाले पेज का पीडीएफ बनाकर अलग-अलग ग्रुप तक पहुंचाया जा रहा है। ये कंटेंट उर्दू और अंग्रेजी में है। सुरक्षा एजेंसियों के सोर्स बताते हैं कि इसका मकसद पढ़े-लिखे नौजवानों को टारगेट करना है। मैगजीन के जरिए आतंकियों को आर्मी के ऑपरेशन और आगे की तैयारी की जानकारी दी जा रही है। इसमें 33 साल से फरार आतंकी जहांगीर का इंटरव्यू भी है।

घुसपैठ का प्लान तैयार, लिखा- जवाब नहीं दिया तो हालात खराब हो जाएंगे आतंकी संगठन मैसेज देने के लिए ZUV नाम से एक लेटर भेज रहे हैं। ZUV का मतलब है- मेरी जिंदगी, मेरी रूह की मौजूदगी से है। एक महीने के भीतर ही इस नेटवर्क की तरफ से कई बार स्टेटमेंट बनाकर आतंकी ग्रुपों में भेजे गए हैं। इनमें से एक स्टेटमेंट 9 पेज का है। इसके आखिरी पेज पर भारतीय सेना की तैयारी का जिक्र है। 10 नवंबर को हुए दिल्ली ब्लास्ट का जिक्र करते हुए अलर्ट भी किया गया है।

इस पेज पर Zuv का मतलब बताया गया है। इसमें लिखा है कि Zuv शुरू करने का मकसद कश्मीरियों को जागरूक करना है।

इस स्टेटमेंट में लिखा है, ‘नवंबर की घटना ने इंडिया को और भड़का दिया है। वे कश्मीर पर अपनी मशीनरी से पकड़ मजबूत कर रहे हैं। हमारे लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। जल्द ही हम कब्जे से निपटने के लिए पूरा प्लान बताएंगे। हम अपने लोगों से आने वाले इवेंट्स के लिए मेंटली और फिजिकली तैयारी शुरू करने के लिए कहेंगे।’

‘खासकर नौजवानों से कहेंगे कि वे इस सर्दी का समझदारी से इस्तेमाल करें। ये बताना जरूरी है कि इंडियन आर्मी और कश्मीर पुलिस को ऑर्डर दिए गए हैं कि जैसे ही रास्ता बर्फ से साफ होना शुरू हो, वो ऊपर के इलाकों में ऑपरेशन शुरू कर दें। मार्च 2026 से इसकी शुरुआत हो सकती है। इस बारे में हमने अगस्त में ही ऑपरेशन प्लान के बारे में बताया था। इसलिए अगर हम जल्दी जवाब नहीं देते हैं, तो हालात और खराब हो जाएंगे।

ऑथर्स नोट टाइटल वाले इस पेज पर आखिरी पैरा में लिखा है कि भारतीय सेना और कश्मीर पुलिस मार्च 2026 में ऑपरेशन शुरू कर सकती है।

ऑथर्स नोट टाइटल वाले इस पेज पर आखिरी पैरा में लिखा है कि भारतीय सेना और कश्मीर पुलिस मार्च 2026 में ऑपरेशन शुरू कर सकती है।

‘सभी ऑर्गेनाइजेशन मिलकर एक्टिव हों’ 14 दिसंबर को जारी ZUV के लेटर में नौजवानों को नेटवर्क में भर्ती करने की बात कही गई है। इसमें लिखा है कि हथियारों के साथ विरोध करने वालों को खत्म करने के लिए इंडियन आर्मी को ऑर्डर मिला है। आर्मी कश्मीर के ऊपरी इलाकों में बड़ा ऑपरेशन शुरू कर सकती है। इसलिए हम भी सेना की एक्टिविटी पर नजर बनाए हुए हैं।

आगे लिखा है कि हम सभी भाइयों को बदलते हालात के बारे में अलर्ट कर रहे हैं। चाहे वे किसी भी ऑर्गनाइजेशन से जुड़े हों। सभी आर्मी का प्लान रोकने के लिए काउंटर स्ट्रैटजी बनाने में आगे आएं। इसके अलावा कश्मीरी युवाओं से सोशल मीडिया पर कुछ भी संदिग्ध एक्टिविटी पोस्ट नहीं करने की गुजारिश की गई है।

इस पेज पर लिखा है कि कश्मीर के लोग ऐसा कोई काम न करें जिससे उन्हें फायदा न हो और नुकसान पहुंचे।

इस पेज पर लिखा है कि कश्मीर के लोग ऐसा कोई काम न करें जिससे उन्हें फायदा न हो और नुकसान पहुंचे।

दिल्ली और नौगाम में हुए ब्लास्ट का जिक्र, एजेंसियों पर सवाल डॉक्यूमेंट के पेज नंबर-8 पर दिल्ली ब्लास्ट और फिर नौगाम में हुए धमाके का जिक्र है। इसमें लिखा है कि हाल में पुलिस की हिंसा में इजाफा हुआ है। दिल्ली और नौगाम धमाकों के बाद पुलिस काफी निराश है। हम जानते हैं कि भारतीय एजेंसियों को महीनों तक इसकी भनक तक नहीं लगी कि उनकी नाक के नीचे क्या होने वाला है। पुलिस केमिकल्स (विस्फोटक) को भी ठीक से नहीं संभाल पाई। इसलिए छापेमारी कर रही है।

इस पेज पर दिल्ली और कश्मीर के नौगाम में हुए ब्लास्ट का जिक्र है। 10 नवंबर को दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत हो गई थी।

इस पेज पर दिल्ली और कश्मीर के नौगाम में हुए ब्लास्ट का जिक्र है। 10 नवंबर को दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट में 15 लोगों की मौत हो गई थी।

33 साल से वांटेड आतंकी का इंटरव्यू, पहाड़ों का बेटा बताया जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बन रहे रतले पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले तीन लोगों का लिंक आतंकी जहांगीर सरूरी से मिला था। इनमें एक जहांगीर का सगा भाई, दूसरा चचेरा भाई और तीसरा भतीजा है।

मोहम्मद अमीन उर्फ ​​जहांगीर सरूरी को हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर बताया जाता है। वह 1992 से एक्टिव है। जहांगीर को जम्मू में सबसे लंबे वक्त तक जिंदा रहने वाले आतंकवादियों में से एक माना जाता है। उस पर डोडा-किश्तवाड़ में कई हत्याओं में शामिल होने का केस है।

जहांगीर सरूरी का प्रोपेगैंडा इंटरव्यू द रिवोल्यूशन रिसर्जेंस मैगजीन में पब्लिश हुआ है। 29 पेज की मैगजीन में 24 नंबर पेज पर ओवैस बिलाल ने ये इंटरव्यू किया है। ये बातचीत कहां हुई, इसका जिक्र नहीं है। जहांगीर के बारे में लिखा है कि वह पिछले 33 साल से जम्मू के किश्तवाड़ और डोडा में आजादी की लड़ाई लड़ रहा है। उसे पहाड़ों का बेटा बताया गया है। इंटरव्यू में लिखा है कि 1992 में मुजाहिदीन में शामिल होने के बाद उसने कई ऑपरेशन किए।

‘गोला-बारूद और हथियार कम, इसलिए किसी भी तरह हथियार चाहिए’ इंटरव्यू के दौरान जहांगीर से 1992 से अब तक के सफर के बारे में पूछा गया। उसने जवाब दिया, ‘मैं मुजाहिदीन में शामिल हुआ, तब आगे का रास्ता कुर्बानी का था। अल्लाह ने हमें कई मोर्चों पर जीत दिलाई। इंडियन आर्मी और उनकी खुफिया एजेंसियों ने हमें रोकने के लिए हर कोशिश की, लेकिन हम कभी पीछे नहीं हटे। मैंने जो कुछ भी हासिल किया है, वह अल्लाह की मदद और मेरे दोस्तों की कुर्बानी की बदौलत है। दुश्मन आज भी हमसे डरता है। यही डर हमारी कामयाबी का सबूत है।’

भारतीय सेना के एक्शन पर जहांगीर ने जवाब दिया, ‘हमें पता चला है कि भारतीय सेना कुछ खास लोगों को उधमपुर जैसे कैंप में मिलिट्री ट्रेनिंग दे रही है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में शराब की दुकानों और नशीली दवाओं के अड्डों से हमारे लोगों को दिक्कत आ रही है। हमारे पास अब काफी लिमिटेड गोला-बारूद है। उसी से ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारी संख्या अब कम हो गई है। रिसोर्स भी कम हैं, लेकिन हम लड़ाई लड़ रहे हैं।’

इसके बाद जहांगीर कहता है कि हमारे पास हथियार कम हैं, लेकिन ये सच है कि सिर्फ हथियार ही हथियार से मुकाबला कर सकते हैं। इसलिए किसी भी तरह कश्मीर के हर कोने तक हथियार पहुंचने चाहिए। हमारा विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक कश्मीर को भारत के कंट्रोल से बाहर नहीं करा देते। उनके हथियारों का इकलौता जवाब हमारा अपना हथियार है।

आतंकियों के मददगारों पर एक्शन, इसलिए प्रोपेगैंडा चला रहे: सोर्स आखिर आतंकी संगठन नौजवानों को नए-नए तरीके से क्यों टारगेट कर रहे हैं। इसे समझने के लिए हमने जांच एजेंसियों के कुछ अधिकारियों से बात की। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों पर कार्रवाई हो रही है। उनके मददगारों की प्रॉपर्टी जब्त हो रही है। आतंकियों के घरों को तोड़ा जा रहा है।

इससे जम्मू-कश्मीर में लोकल नेटवर्क से आतंकियों को मदद मिलने में काफी कमी आई है। यही वजह है कि आतंकी अब लोगों को अपने नेटवर्क से जोड़ने के लिए नए हथकंडे अपना रहे हैं। इसके लिए वे प्रोपेगैंडा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

खुफिया इनपुट है कि जम्मू में 30 से 35 पाकिस्तानी आतंकी एक्टिव हैं। इस लिहाज से सेना ने बर्फीले इलाकों में गश्त बढ़ा दी है।

खुफिया इनपुट है कि जम्मू में 30 से 35 पाकिस्तानी आतंकी एक्टिव हैं। इस लिहाज से सेना ने बर्फीले इलाकों में गश्त बढ़ा दी है।

अनंतनाग में दिखा पाकिस्तानी आतंकी, एजेंसियां अलर्ट 25 दिसंबर को कश्मीर के अनंतनाग में दो संदिग्ध आतंकी देखे गए थे। इनमें एक लोकल आतंकी मोहम्मद लतीफ भट्ट कुलगाम का रहने वाला है। उसने इसी साल नवंबर में आतंकी संगठन जॉइन किया है। दूसरा आतंकी हंजुल्ला पाकिस्तानी है। दोनों लश्कर-ए-तैयबा के संगठन कश्मीर रिवोल्यूशन आर्मी से जुड़े हैं।

दोनों की तलाश के लिए अनंतनाग और कुलगाम के आसपास के इलाके में छापेमारी की गई। एक CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें लतीफ और हंजुल्ला के दिखने का दावा है। हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

दोनों आतंकियों का अब तक पता नहीं चला है। सोर्स बताते हैं कि दोनों अनंतनाग से भागकर कुलगाम के जंगलों की ओर चले गए हैं। ये एरिया पीर पंजाल रेंज से जुड़ा है, जहां आतंकी छिपते रहे हैं। आतंकियों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

वीडियो में दिख रहे दोनों युवकों को आतंकी बताया गया है। हालांकि, पुलिस अभी इसकी पुष्टि नहीं कर रही है।

वीडियो में दिख रहे दोनों युवकों को आतंकी बताया गया है। हालांकि, पुलिस अभी इसकी पुष्टि नहीं कर रही है।

पाकिस्तान में एक मंच पर दिखे आतंकी, महिला विंग की भी मीटिंग हाल में लाहौर में हुए एक कार्यक्रम में हाफिज सईद का बेटा हाफिज तल्हा सईद, सैफुल्लाह कसूरी और आतंकी मुजम्मिल इकबाल हाशिमी एक साथ मंच पर दिखे। इस मंच से युवाओं को कट्टरपंथी का मैसेज दिया गया।

इसके अलावा आतंकी मसूद अजहर की छोटी बहन सादिया अजहर की अगुआई में बनी महिला विंग भी साजिश रच रही है। ऑपरेशन सिंदूर में हवाई हमले में सादिया का पति यूसुफ अजहर मारा गया था। वह जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वॉर्टर बहावलपुर में मौजूद था।

सादिया ने जैश की महिला विंग जमात उल मोमिनात शुरू की है। इसकी हाल में ही मीटिंग भी हुई थी। इसमें बहावलपुर, सियालकोट, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली से महिलाएं आई थीं।

सादिया ने जैश की महिला विंग जमात उल मोमिनात शुरू की है। इसकी हाल में ही मीटिंग भी हुई थी। इसमें बहावलपुर, सियालकोट, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली से महिलाएं आई थीं।

मीटिंग के बारे में सोर्स से पता चला कि मीटिंग में महिलाओं से परिवार के नौजवानों को जिहाद के रास्ते पर लाने के लिए तैयार करने के लिए कहा गया। महिलाओं को ट्रेनिंग देने के साथ उनके बच्चों को जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ने की बात कही जा रही है। इससे जैश के ट्रेनिंग सेंटर पर युवाओं को लाने में आसानी होगी। इससे पहले जमात उल मोमिनात ने 8 अक्टूबर से भर्तियां शुरू की थीं। इसे बहावलपुर में जैश के ट्रेनिंग सेंटर मरकज-उस्मान-ओ-अली में शुरू किया गया।



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