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भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा का अरेस्ट वारंट: 16 सितंबर को कोर्ट में पेश करना होगा; पूर्व मंत्री पर चेक बाउंस के 70 से ज्यादा केस – Bhopal News

भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा का अरेस्ट वारंट:  16 सितंबर को कोर्ट में पेश करना होगा; पूर्व मंत्री पर चेक बाउंस के 70 से ज्यादा केस – Bhopal News


भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा की कंपनी ने 15 सितंबर 2014 को बैंक से 36 करोड़ का लोन लिया था, लेकिन किस्तें जमा नहीं की।

भोजपुर विधायक और पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा के खिलाफ इंदौर एमपी एमएलए कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एमएलए कोर्ट ने मंगलवार को यह वारंट जारी किया है। विधायक पटवा पर धारा 420, 409,120 B के तहत यह वारंट जारी किया

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विधायक सुरेंद्र पटवा के खिलाफ चेक बाउंस के 70 से ज्यादा मामले कोर्ट में लंबित हैं। ज्यादातर में मामला हाईकोर्ट तक जा चुका है। कुछ में उन्हें राहत भी मिली है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है।

गिरफ्तारी वारंट का यह कोर्ट ऑर्डर वायरल हो रहा है।

7 साल पहले संपत्ति कुर्क करने का आदेश एमपी के पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा के खिलाफ 7 साल पहले भी तत्कालीन इंदौर कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव की कोर्ट ने उनकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया था। यह आदेश 33.45 करोड़ रुपए का बैंक लोन नहीं चुकाने पर जारी किया गया था। कोर्ट ने कहा था कि गिरवी रखी गई संपत्ति बैंक को फौरन सौंपी जाए। बैंक इसकी कुर्की कर लोन की वसूली करेगा।

कोर्ट ने मेसर्स पटवा ऑटोमेटिव प्रा.लि. लसूड़िया मोरी देवास नाका और जमानतदार मेसर्स स्टार सिटी कंस्ट्रक्शन, सुरेंद्र पटवा, मोनिका पटवा, भरत पटवा, महेंद्र पटवा और फूलकुंवर बाई पटवा को संबंधित संपत्ति बैंक को तुरंत सौंपने का आदेश जारी किया था।

कंपनी ने 36 करोड़ रुपए का लोन लिया था 15 सितंबर 2014 को पटवा की कंपनी ने बैंक से 36 करोड़ का लोन लिया था। किस्तें नहीं चुकाने पर 2 मई 2017 को इसे एनपीए में डालते हुए संबंधित को 33.45 करोड़ जुलाई 2017 तक चुकाने का नोटिस जारी हुआ। लोन नहीं चुकाए जाने पर बैंक ने डीएम कोर्ट में संपत्ति का कब्जा दिलाने का आवेदन दिया था। इसमें लगातार सुनवाई हुई और मामला डीआरटी में गया। डीआरटी ने जनवरी 2019 तक लाेन चुकाने का मौका दिया था।

सुप्रीम कोर्ट से भी लगा था पटवा को झटका अप्रैल 2025 में भी सुरेंद्र पटवा को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा था। तब अलग-अलग बैंकों में फर्जी खाते खोलने के मामले में CBI की FIR को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को पलट दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 25 अप्रैल 2025 को दिए अपने आदेश में कहा था कि आपराधिक मामलों में FIR दर्ज करने से पहले आरोपी का पक्ष सुनना जरूरी नहीं है। अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामला फिर से हाईकोर्ट को भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हाईकोर्ट ने जिस आधार पर FIR रद्द की थी, वह मामला पूरी तरह अलग था।

फर्जी खाते खोलने का यह था मामला रिजर्व बैंक के निर्देश पर संदिग्ध बैंक खातों की जांच के दौरान एसबीआई सहित अन्य बैंकों में सुरेंद्र पटवा, विजय सोनी और राजीव सोनी के नाम पर फर्जी खाते पाए गए थे। मामले में सीबीआई ने FIR दर्ज की थी। FIR के खिलाफ पटवा समेत अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे 25 जुलाई 2023 को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने FIR निरस्त कर दी थी।



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