नेपाल की संसद, सुप्रीम कोर्ट, पॉलिटिकल पार्टियों के ऑफिस, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री-मंत्रियों के घर और सबसे खास काठमांडू का सिंह दरबार, सब एक दिन में जल गया। पूरे काठमांडू के आसमान में काला धुंआ दिख रहा है।
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पूर्व पीएम झालानाथ खनाल की पत्नी को जिंदा जला दिया गया। एक और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी को घर में घुसकर पीटा। वित्तमंत्री विष्णु पौडेल को दौड़ा-दौड़ाकर मारा गया।
ये नेपाल की राजधानी काठमांडू की हालत है। 20 से 25 साल के लड़के-लड़कियां सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं। हर तरफ एक नारा है- केपी चोर, देश छोड़। केपी यानी 9 सितंबर की दोपहर तक देश के प्रधानमंत्री रहे केपी ओली।
दोपहर बाद उन्होंने राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंप दिया। कुछ देर बाद राष्ट्रपति ने भी इस्तीफा दे दिया। आर्मी और पुलिस है, लेकिन सरेंडर मोड में। दो दिन में 22 मौतें हो चुकी हैं। 400 से ज्यादा घायल हैं।
नेपाल में राजशाही खत्म होने के बाद ये सबसे बड़ा आंदोलन है। दैनिक भास्कर इसे कवर करने काठमांडू पहुंचा है। पढ़िए नेपाल की राजधानी में क्या चल रहा है…
9 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में जगह-जगह आगजनी और तोड़फोड़ की। प्रदर्शन की आड़ में लूटपाट की भी खबरें हैं।
सरकार के खिलाफ गुस्सा, सोशल मीडिया बैन से ज्यादा करप्शन वजह नेपाल में 8 सितंबर को भीड़ ने प्रोटेस्ट शुरू किया। सोशल मीडिया पर बैन और सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ 12 हजार से ज्यादा युवा संसद भवन परिसर में घुस गए। सरकार ने कर्फ्यू लगा दिया और तोड़फोड़ करने वाले को देखते ही गोली मारने के आदेश दे दिए।
दरअसल, नेपाल सरकार ने 3 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया साइट्स पर बैन लगाने का फैसला किया था। कहा गया कि प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इसी बैन के खिलाफ है।
दैनिक भास्कर ने लोगों से इस पर बात की। जवाब मिला, सोशल मीडिया सिर्फ फौरी वजह है। असली वजह करप्ट सरकार है। प्रदर्शन में शामिल मोहम्मद फारुक काठमांडू में नौकरी करते हैं।

ये मोहम्मद फारुक हैं। मधेश प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन काम काठमांडू में करते हैं। प्रोटेस्ट में शामिल फारुक सरकार से गुस्सा हैं।
फारुक कहते हैं, ‘नेपाली सरकार साउथ एशिया की सबसे करप्ट सरकार है। ये नेता विदेशी दलाल है। उनके बच्चे ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, यूरोप जा रहे हैं। हमारे खाने के लाले पड़ रहे हैं। हमें पलायन करना पड़ रहा है। अब नौजवान जाग गए हैं। नेताओं की शामत आने वाली है।’
काठमांडू के रहने वाले मनोज जेरगी का गुस्सा केपी ओली के लिए है। हमने उनसे बात की, तब तक ओली ने इस्तीफा नहीं दिया था। मनोज कहते हैं-
खूनी PM केपी ओली को देश छोड़कर जाना होगा। हमारा नारा है, केपी चोर, देश छोड़। उसने बच्चों के पैरों पर नहीं, बल्कि सीने पर गोली चलाने का आदेश दिया।

काठमांडू पहुंचते ही पता चला, अगले दिन कुछ बड़ा होने वाला है 8 सितंबर को प्रदर्शनकारी नेपाली संसद में घुसने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट चलाईं। यही नहीं पुलिस ने स्टील बुलेट भी इस्तेमाल कीं। इससे भीड़ भड़क गई।
कवरेज के लिए हम 8 सितंबर की रात 12 बजे काठमांडू पहुंच गए थे। होटल में काम करने वाले आयुष आचार्य के माथे पर पट्टी बंधी थी। हाथ-पैर में चोट के निशान थे। आयुष भी दिन में प्रोटेस्ट में शामिल हुआ था। उसने कहा, ‘आज लोगों को बहुत मारा है। आप कल देखना क्या होता है। कुछ बड़ा होगा।’
आयुष की बात, अगले दिन सच साबित हो गई। काठमांडू ही नहीं, नेपाल के हर जिले, शहर, कस्बे, गांव तक हिंसा, आगजनी, उत्पात हुआ। भीड़ सरकारी इमारतों और सांसदों, विधायकों पर हमले करती रही। कोई खास पार्टी नहीं, हर पार्टी के लोग टारगेट पर हैं।
9 सितंबर की सुबह 7 बजे फिर जुटी भीड़ सुबह 6 बजे हम काठमांडू का हाल देखने निकले। संसद भवन के रास्ते में आगजनी और प्रदर्शन के निशान दिख रहे थे। फिर भी शहर शांत था। सड़कों पर लोग घूमते दिख रहे थे। रोज की तरह सफाई हो रही थी।
सुबह 7 बजे संसद भवन के पास प्रदर्शनकारी जुटने लगे। यहीं कॉलेज स्टूडेंट मनोज रेगनी मिले। मनोज 8 सितंबर को हुए प्रोटेस्ट में शामिल थे। बोले- ‘हम संसद भवन में दाखिल होना चाहते थे, लेकिन नहीं हो पाए। जो कल नहीं हुआ, वो आज होगा।’
मनोज ने जो कहा था, वही हुआ। भीड़ संसद के अंदर घुस गई और आग लगा दी।

मनोज कहते हैं, ‘जेनजी के लिए सोशल मीडिया मुद्दा ही नहीं था। करप्शन और भाई-भतीजावाद ज्यादा बड़ा मुद्दा है। करप्ट नेताओं को उनके किए का भुगतना होगा। ये नेपाल की राजनीति का सबसे खराब दौर है। बच्चों पर सीधे गोली चला दी गई। राजशाही खत्म हुई थी, तब 19 दिन आंदोलन चला था। तब भी इतनी मौतें नहीं हुई थीं।’
नेपाल में शुरू हुए आंदोलन को जेनजी प्रोटेस्ट कहा जा रहा है। यानी इसमें नई उम्र के लड़के-लड़कियां शामिल हैं। संसद भवन के पास हमें करीब 55 साल के सुदर्शन मिले। वे कहते हैं, ‘ये प्रदर्शन अब जेनजी का नहीं, पूरे नेपाल का है। सरकार कुछ देशों की एजेंट की तरह काम कर रही है। ये करप्ट लोग हैं।’

सुजिता बोलीं- रातभर सो नहीं पाई, सुबह होते ही प्रोटेस्ट में आ गई संसद के बाहर मिली सुजिता पुडाल प्रोटेस्ट में शामिल होने संसद भवन आई थीं। वे कहती हैं, ‘पुलिस ने खुलेआम गोलियां चलाईं। मेरे अंदर इतना गुस्सा था कि रात भर नहीं सो पाई। सुबह ही स्कूटी से संसद भवन आ गई।’

सुबह 8 बजे तक पुलिस ने कंट्रोल किया, फिर नहीं संभाल पाई सुबह 8 बजे तक प्रोटेस्ट सामान्य तरीके से चल रहा था। पुलिस ने सिक्योरिटी फोर्स के साथ हालात संभाल लिए। शुरुआत में भीड़ को पीछे हटा दिया। करीब सवा ८ बजे पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया। कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस और फोर्स की गाड़ियां संसद भवन में जाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन भीड़ उनके आगे खड़ी हो गई।

भीड़ के आगे फोर्स को अपनी गाड़ियां पीछे करनी पड़ीं। वे संसद भवन की सिक्योरिटी के लिए अंदर नहीं जा पाए।
इसके कुछ देर बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई। यहीं से भीड़ पुलिस पर हावी हो गई। भीड़ बढ़ती जा रही थी। गलियों से निकलकर लोग संसद, सुप्रीम कोर्ट, सिंह दरबार, और सरकारी बिल्डिंगों के सामने जुटने लगे।’
पत्थरबाजी से बचते हुए हम एक हॉस्पिटल में चले गए। बाहर पुलिस टियर गैस इस्तेमाल कर रही थी। हॉस्पिटल में लोगों ने कहा कि यहां रुकना भी सेफ नहीं है। एक दिन पहले पुलिसवाले हॉस्पिटल के अंदर घुस आए थे। उन्होंने अंदर टियर गैस के गोले दागे, ताकि घायलों का इलाज न हो पाए।
10 बजे से आर्मी सरेंडर मोड में आ गई सुबह 10 बजे हम काठमांडू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। प्रोटेस्ट में घायल हुए लोगों को इलाज के लिए यहीं लाया गया था। पहले दिन सबसे ज्यादा 6 मौतें ट्रॉमा सेंटर में ही हुई थीं। इसके ठीक सामने आर्मी की छावनी है। फोर्स ने रास्ते बंद कर रखे थे।
आर्मी के दस्ते के साथ वॉटर कैनन व्हीकल भी था। दूसरी तरफ से भीड़ छावनी की तरफ बढ़ने लगी। अब आर्मी ने भी हाथ खड़े कर दिए। प्रदर्शनकारियों को बिना रोक-टोक आगे जाने दिया।
यहां से हम गोशाला इलाके में गए। यहां माहौल शांत लग रहा था, लेकिन अचानक भीड़ बढ़ती गई। ट्रैफिक लाइट तोड़ने के साथ हिंसा शुरू हो गई। फिर सांसद के घर की तरफ बढ़ने लगी।

गोशाला के रास्ते में भीड़ ने ट्रैफिक बूथ में तोड़फोड़ कर आग लगा दी।
ठीक उसी वक्त काठमांडू के अलावा नेपाल के अलग-अलग जिलों में भीड़ नेताओं, मंत्री, विधायकों, सांसदों और मेयर के घरों की तरफ जाने लगी। इसके बाद हर तरफ आगजनी और तोड़फोड़ होने लगी।
दोपहर 12:30 बजे आर्मी-पुलिस ने मोर्चा छोड़ दिया गोशाला के पास कुछ प्रदर्शनकारियों ने हमें घेर लिया। उनका गुस्सा भारतीय मीडिया के लिए था। वे चिल्लाकर कहने लगे, ‘तुम लोग सच्चाई नहीं दिखा रहे हो। जेनजी का प्रोटेस्ट सिर्फ सोशल मीडिया पर बैन की वजह से नहीं हुआ। ये करप्शन और वंशवाद के खिलाफ हुआ है।’
हम भीड़ से बचकर आगे निकल गए। करीब 12.30 बजे तक आर्मी और पुलिस ने मोर्चा छोड़ दिया। अब प्रदर्शनकारियों को रोकने वाला कोई नहीं था। लोगों ने सरकारी इमारतें जलानी शुरू कर दीं।
ये सब करीब चार घंटे तक चला। ज्यादातर सरकारी इमारतें जला दी गईं। उनमें तोड़फोड़ की गई। कई थानों में आग लगा दी और अंदर से सारा सामान लेकर भाग गए। हमने ऐसे कई लोग देखे, जो कम्यूटर, लेपटॉप, चेयर और ऑफिस का सामान लेकर जा रहे थे।

दोपहर बाद 4 बजे से ‘विजय यात्रा’ शुरू अब तक प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे की खबर आ चुकी थीं। इसके बाद दोपहर बाद 4 बजे से प्रदर्शनकारियों ने विजय यात्राएं निकालनी शुरू कर दीं। वे पुलिस की गाड़ियों और ट्रकों पर सवार होकर काठमांडू की सड़कों पर निकलने लगे। लोग हाथ हिलाकर उनका स्वागत कर रहे थे।

रात 8 बजे तक आगजनी, अभी हिंसा थमने के आसार नहीं रात 8 बजे हम एयरपोर्ट के पास होटल की तरफ लौट रहे थे। तभी एयरपोर्ट से पहले पड़ने वाले चौक के पास प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में आग लगाना शुरू कर दिया। पूरे रास्ते भर सिर्फ आगजनी करती, शोर मचाती भीड़ दिखी। नेपाल के लिए 9 सितंबर का दिन मुश्किल भरा रहा, लेकिन यहां की हालत देखकर अंदाजा हो गया कि आगे भी ये रुकने वाला नहीं है।

काठमांडू के मेयर बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनाने की मांग शुरुआत में सरकार विरोधी प्रोटेस्ट का कोई लीडर नहीं था। काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने इसका सपोर्ट किया है। बालेन शाह युवाओं में पॉपुलर हैं। वे बिना किसी पॉलिटिकल पार्टी की मदद के मेयर बने थे। प्रदर्शनकारी उन्हें अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले बालेन शाह बॉलीवुड फिल्म आदिपुरुष के विरोध से चर्चा में आए थे। उन्होंने आदिपुरुष की वजह से सभी हिंदी फिल्में रिलीज करने पर रोक लगा दी थी। वे आदिपुरुष में सीता को भारत की बेटी बताए जाने से नाराज थे। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने यहां तक कह दिया कि उनके बस में होता तो वे आदिपुरुष पर दुनियाभर में रोक लगवा देते।
एयर इंडिया और इंडिगो ने काठमांडू जाने वाली उड़ानें रद्द कीं एयर इंडिया और इंडिगो ने 9 सितंबर को काठमांडू जाने वाली उड़ानें रद्द कर दीं। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच काठमांडू एयरपोर्ट अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है। यहां की सुरक्षा सेना ने संभाल ली है। नेपाल एयरलाइंस ने भी दिल्ली से काठमांडू जाने वाली उड़ान रद्द कर दी।
इंडिगो ने कहा कि मौजूदा स्थिति और काठमांडू एयरपोर्ट बंद होने की वजह से काठमांडू आने-जाने वाली सभी उड़ानें 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक रद्द कर दी गई हैं।
फोटोज में देखिए कैसे जला काठमांडू…








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न लीडर, न चेहरा; संसद तक कैसे पहुंचे नेपाली GenZ

8 सितंबर को नेपाल में हुए आंदोलन में ज्यादातर स्टूडेंट थे। इनमें से कुछ तो स्कूली ड्रेस में ही पहुंचे थे। शुरू में इनकी संख्या 15 से 20 हजार के करीब थी। देखते ही देखते ये 40-50 हजार पहुंच गई। इस प्रोटेस्ट का न कोई लीडर था और न कोई बड़ा चेहरा। फिर भी नेपाल के इतिहास में ये पहला मौका है, जब आंदोलनकारी संसद में घुस गए। पढ़िए पूरी खबर…
