अररिया जिले के समाहरणालय परिसर में स्वर्ण समाज ने केंद्र सरकार के नए यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) नियमों के खिलाफ एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इन नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए उच्च शिक्षा में सवर्ण व मेधावी छात्रों के हितों के विरुद्ध बताया। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने ‘यूजीसी काला कानून वापस लो’ के नारे लगाए और अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि इन नियमों को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ये नियम मेधावी छात्रों के हितों के खिलाफ
सवर्ण समाज के प्रमुख नेता अजय झा ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि यूजीसी के ये नए नियम उच्च शिक्षा में सवर्ण और मेधावी छात्रों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नियम सवर्ण समाज के साथ सीधे तौर पर भेदभाव करने का प्रयास हैं। झा ने बताया कि यह एक दिवसीय धरना केवल शुरुआत है और आगे की रणनीति पर विचार किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक केंद्र सरकार इन नियमों को वापस नहीं लेती, तब तक चरणबद्ध तरीके से विरोध जारी रहेगा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ
यह प्रदर्शन देश भर में चल रहे यूजीसी नियमों के विरोध का हिस्सा है। विभिन्न राज्यों में स्वर्ण समाज के संगठन, करणी सेना और स्वर्ण आर्मी जैसे समूह इन नियमों को ‘सवर्ण विरोधी’ और ‘तानाशाहीपूर्ण’ बता रहे हैं। विरोधियों का आरोप है कि ये नियम उच्च शिक्षा में जाति आधारित भेदभाव रोकने के नाम पर सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय कर रहे हैं और योग्यता को नजरअंदाज करने की आशंका पैदा कर रहे हैं। अररिया में आयोजित इस धरने में सवर्ण समाज के बड़ी संख्या में युवा, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। स्वर्ण समाज के नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका किसी अन्य जाति या वर्ग से कोई विरोध नहीं है, बल्कि आपत्ति केवल उस कानून से है जो मेधावी छात्रों और सवर्ण समाज के भविष्य को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक विस्तार दिया जाएगा।
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