विकास अवस्थी | कन्नौज3 मिनट पहले
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कन्नौज में दो दिनों से गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। गुरूवार सुबह जलस्तर खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया। जलस्तर घटने से बाढ़ ग्रस्त गांव के लोगों की परेशानियां कम होंगी। 4 दिन पहले गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया था।
हालांकि उसके बाद से लगातार जलस्तर में गिरावट दर्ज की जाने लगी। गुरुवार सुबह गंगा का जलस्तर 125.930 मीटर डर किया गया, जोकि खतरे के निशान 125.970 मीटर से 4 सेंटीमीटर कम हो गया। जलस्तर घटने से अधिकारियों ने राहत की सांस ली है, हालांकि अभी भी गावों में जलभराव बना हुआ है।

मामले को लेकर नायब तहसीलदार भरत मौर्या ने बताया कि दो दिनों से गंगा का जलस्तर कम हो रहा है। ये राहत की बात है। हालांकि बाढ़ का खतरा टलने के बाद भी गावों का जनजीवन सामान्य होने में समय लगेगा। जबकि दूसरी ओर जलभराव होने से बाढ़ ग्रस्त गावों में बीमारियां फैलने का भी खतरा मंडराने लगा है।

इन गावों में न तो स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम पहुंची और न ही कोई हेल्थ कैम्प लगाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि जलभराव में मच्छर और तमाम तरह के कीड़े पनपने लगे है, जोकि स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। गावों में एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जाना चाहिए, ताकि लोगों को मच्छर जनित बीमारियों से बचाया जा सके।

फसलों के नुकसान का मुआवजा मिले-
बाढ़ ग्रसित गांव सदिकापुर, दनियापुर, अलियापुर, बछुइयां, मटकौरा, जुकैया, अडंगापुर, कटरी गंगपुर, अमरापुर, रिक्खापुरवा, टुइयाँपुर, कासिमपुर, बख्शीपुरवा समेत कई गावों के आसपास के खेतों में पानी भरा हुआ है। यहां बोई गई सब्जी की फसलें बाढ़ के कारण नष्ट हो गईं। जिससे किसानों का तगड़ा नुकसान हुआ। किसानों ने इसकी भरपाई के लिए मुआवजे की मांग की है।
