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शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं: कश्मीरी मूल की हैं; एपस्टीन फाइल्स विवाद से PM स्टार्मर की कुर्सी खतरे में

शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं:  कश्मीरी मूल की हैं; एपस्टीन फाइल्स विवाद से PM स्टार्मर की कुर्सी खतरे में


लंदनकुछ ही क्षण पहले

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अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों के कारण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है। अब उनकी अपनी लेबर पार्टी के एक धड़े ने ही इस्तीफे की मांग कर दी है। हालांकि स्टार्मर अभी पद छोड़ने से इनकार कर रहे हैं।

इस बीच, नए प्रधानमंत्री पद की होड़ में गृह मंत्री शबाना महमूद के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट स्ट्रीटिंग और पूर्व उपप्रधानमंत्री अंगेला रेनर का नाम सामने आ रहा है।

शबाना महमूद PoK के मीरपुर मूल की हैं और ब्रिटेन की गृह मंत्री बनने वाली पहली मुस्लिम महिला हैं। अगर वह प्रधानमंत्री बनती हैं, तो ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री भी होंगी।

दरअसल, ब्रिटेन में एपस्टीन फाइल से जुड़े विवाद की वजह से पीएम स्टार्मर के सबसे भरोसेमंद सहयोगी और डाउनिंग स्ट्रीट के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा है।

मैकस्वीनी पर आरोप है कि उन्होंने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन का समर्थन करने वाले पीटर मंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाकर भेजा था। मैकस्वीनी ने भी माना है कि यह नियुक्ति गलत थी।

अमेरिका में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ पीटर मंडेलसन। मंडेलसन पर आरोप है कि जेफ्री एपस्टीन को बच्चों के यौन शोषण के मामलों में सजा होने के बाद भी मंडेलसन उसके संपर्क में रहे और उसका समर्थन किया।

अमेरिका में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ पीटर मंडेलसन। मंडेलसन पर आरोप है कि जेफ्री एपस्टीन को बच्चों के यौन शोषण के मामलों में सजा होने के बाद भी मंडेलसन उसके संपर्क में रहे और उसका समर्थन किया।

स्टार्मर को चुनौती देने के लिए 20% सदस्यों का समर्थन जरूरी

लेबर पार्टी के नियमों के अनुसार, अगर कोई कीर स्टार्मर के खिलाफ चुनौती देना चाहता है, तो इसके लिए कुछ सख्त शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है कि चुनौती देने वाले उम्मीदवार को पार्टी के संसदीय सदस्यों से कम से कम 20% का समर्थन हासिल करना जरूरी है।

यह नियम 2021 में पार्टी कॉन्फ्रेंस में बदलाव के बाद लागू हुआ था। पहले यह सीमा सिर्फ 10% थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 20% कर दिया गया है ताकि कोई भी आसानी से लीडरशिप चुनौती न दे सके और पार्टी में स्थिरता बनी रहे।

अभी लेबर पार्टी के कुल सांसदों की संख्या लगभग 404-405 के आसपास है, इसलिए किसी भी चुनौती को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 81 लेबर सांसदों का लिखित समर्थन जुटाना पड़ता है।

इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच होम मिनिल्टर शबाना महमूद को उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। 45 वर्षीय शबाना महमूद पहले न्याय मंत्री और लॉर्ड चांसलर रह चुकी हैं।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ शबाना महमूद। वह स्टार्मर की करीबी सहयोगी मानी जाती हैं।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ शबाना महमूद। वह स्टार्मर की करीबी सहयोगी मानी जाती हैं।

शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली महिला मुस्लिम सांसदों में शामिल

बर्मिंघम में पाकिस्तानी माता-पिता के यहां जन्मी शबाना महमूद ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। वह पेशे से बैरिस्टर हैं। 2010 में रुशानारा अली और यास्मिन कुरैशी के साथ वह ब्रिटेन की पहली महिला मुस्लिम सांसदों में शामिल हुईं।

लेबर पार्टी में वे कीर स्टार्मर की करीबी सहयोगी मानी जाती हैं और पार्टी के दक्षिणपंथी (राइट-विंग) गुट से जुड़ी हैं। वे इमिग्रेशन (प्रवासन) नीतियों पर काफी सख्त रवैया रखती हैं और कहती हैं कि ब्रिटेन में रहना एक विशेषाधिकार है।

2010 में संसद पहुंचने के कुछ ही महीनों बाद उन्हें पार्टी की अहम जिम्मेदारी दे दी गई थी। बाद में वह लेबर पार्टी की राष्ट्रीय चुनाव अभियान की जिम्मेदार बनीं और पार्टी की चुनावी रणनीति में उनकी बड़ी भूमिका रही।

अब जानिए पीएम कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में क्यों है…

मैकस्वीनी के बाद स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव

मैकस्वीनी को स्टार्मर का सबसे मजबूत सहारा माना जाता था। उन्हें प्रधानमंत्री का ‘दिमाग’ कहा जाता है और सत्ता तक पहुंचाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। उनके जाने के बाद लेबर पार्टी के सांसद पूछ रहे हैं कि अब स्टार्मर कितने दिन टिक पाएंगे।

पार्टी के वामपंथी धड़े ने सीधे प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग कर दी है। सांसद ब्रायन लीशमैन ने कहा कि पार्टी की दिशा बदलनी है और इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री से होनी चाहिए। सांसद किम जॉनसन ने माना कि स्टार्मर के लिए हालात संभालना मुश्किल हो गया है, जबकि रैचेल मास्केल ने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है।

PM स्टार्मर देश को संबोधित कर सकते हैं

इस पूरे विवाद के बीच पीएम स्टार्मर देश को संबोधित करने की तैयारी कर रहे हैं। वे राजनीति को साफ करने की बात रखेंगे और यह संकेत देंगे कि वह इस्तीफा नहीं देने जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि नीतियों में कोई बदलाव नहीं होगा। प्रधानमंत्री आज लेबर सांसदों की बैठक में भी बात रखेंगे।

इधर, पार्टी के अंदर लीडरशिप की रेस तेज हो गई है। उपप्रधानमंत्री एंजेला रेनर और स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग के नाम चर्चा में हैं। विदेश मंत्री डेविड लैमी ने साफ किया है कि उन्होंने मंडेलसन की नियुक्ति का विरोध किया था। ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड को संभावित किंगमेकर बताया जा रहा है।

स्टार्मर के समर्थक चेतावनी दे रहे हैं कि बड़ी चुनावी जीत के सिर्फ 18 महीने बाद प्रधानमंत्री को हटाने से देश और पार्टी दोनों में भारी अस्थिरता आ सकती है। वर्क एंड पेंशन सेक्रेटरी पैट मैकफैडन ने कहा कि इससे आर्थिक और राजनीतिक अराजकता फैल सकती है।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ मॉर्गन मैकस्वीनी। तस्वीर पिछले साल मई की है।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ मॉर्गन मैकस्वीनी। तस्वीर पिछले साल मई की है।

स्टार्मर ने मंडेलसन को झूठा बताया था

इससे पहले स्टार्मर ने 5 फरवरी को मंडेलसन को झूठा बताया था। उन्होंने कहा कि उन्हें मंडेलसन ने झूठ बोला था और उन्होंने उस झूठ पर भरोसा करके उन्हें राजदूत बनाया। मुझे इस फैसले पर गहरा अफसोस है।

स्टार्मर ने अपने भाषण में कहा कि अब उन्हें समझ आया है कि मंडेलसन और एपस्टीन के रिश्ते कितने गहरे और अंधेरे थे। उन्होंने लेबर सांसदों और एपस्टीन के पीड़ितों से माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें इस नियुक्ति पर अफसोस है।

स्टार्मर ने यह भी कहा कि वह सुरक्षा जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना चाहते हैं, लेकिन पुलिस जांच के चलते ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि राजनीतिक फायदा कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह पीड़ितों को न्याय मिलने के रास्ते में कोई कदम नहीं उठाएंगे।

इस पूरे विवाद के बाद ब्रिटेन की उधारी लागत भी बढ़ गई है, क्योंकि निवेशकों को डर है कि स्टार्मर सरकार टिक पाएगी या नहीं।

स्टार्मर पर गलती का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने आरोप

विपक्षी कंजर्वेटिव नेता केमी बेडेनोक ने कहा कि असली जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की है। उनका आरोप है कि स्टार्मर हर बार गलती का ठीकरा दूसरों पर फोड़ देते हैं।

PM स्टार्मर के कार्यकाल में दूसरे चीफ ऑफ स्टाफ का इस्तीफा है। इससे पहले 2024 के चुनाव के बाद सू ग्रे को हटाया गया था।

मैकस्वीनी के इस्तीफे के बाद जिल काथबर्टसन और विध्या अलकेसन को कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया है।

वहीं, मैकस्वीनी के करीबी मानते हैं कि उन्हें हटाना बड़ी गलती थी। एक नेता ने कहा, यह अपनी ही टीम के सबसे मजबूत खिलाड़ी को बाहर करने जैसा है। कुछ सांसदों को डर है कि उनके जाने से पार्टी और ज्यादा वामपंथी रास्ते पर चली जाएगी।

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