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अनवर ढेबर का सहयोगी दीपेन चावड़ा गिरफ्तार: कस्टम मिलिंग स्कैम में EOW की कार्रवाई, 7 दिन की मिली रिमांड, एजेंसी करेगी पूछताछ – Raipur News

अनवर ढेबर का सहयोगी दीपेन चावड़ा गिरफ्तार:  कस्टम मिलिंग स्कैम में EOW की कार्रवाई, 7 दिन की मिली रिमांड, एजेंसी करेगी पूछताछ – Raipur News


राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने कस्टम मिलिंग स्कैम में बड़ी कार्रवाई करते हुए अनवर ढेबर के करीबी सहयोगी दीपेन चावड़ा को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद विशेष अदालत में उसे पेश किया गया।

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गुरुवार को सुनवाई के दौरान जज ने दीपेन को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इस दौरान ब्यूरो के अधिकारी आरोपी से घोटाले के संबंध में पूछताछ करेंगे।

चावड़ा की भूमिका

जांच एजेंसी के अनुसार, दीपेन चावड़ा पहले से ही ईओडब्ल्यू में दर्ज अन्य मामलों में 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध धनराशि का प्रबंधक रहा है। कस्टम मिलिंग स्कैम में भी उसके खिलाफ गंभीर साक्ष्य मिले हैं। आरोप है कि उसने 20 करोड़ रुपए लोक सेवकों की ओर से एकत्र किए, जिसे घोटाले में शामिल अधिकारियों और नेताओं तक पहुंचाया गया।

फरवरी 2025 की बड़ी कार्रवाई

कस्टम मिलिंग स्कैम की जांच में फरवरी 2025 में तत्कालीन प्रबंध संचालक मनोज सोनी और रोशन चन्द्राकर के खिलाफ विशेष न्यायालय (भ्र.नि.अ) में चालान प्रस्तुत किया गया था। वहीं, इस मामले में अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के खिलाफ जांच जारी है।

जनवरी 2024 को EOW ने दर्ज की FIR

ED के खुलासे के बाद EOW ने कस्टम मिलिंग घोटाले में 29 जनवरी 2024 को पहली FIR दर्ज की। इसमें रोशन चंद्राकर, प्रीतिका, रिटायर सीनियर IAS अनिल टुटेजा, एजाज ढेबर, सिद्धार्थ सिंघानिया, रामगोपाल अग्रवाल के नाम शामिल हैं।

EOW की जांच में पता चला कि कस्टम मिलिंग राशि मिलर्स को देने के नाम पर यह वसूली की गई है। 2020-21 से पहले कस्टम मिलिंग के बदले मिलर्स को प्रति क्विंटल 40 रुपए भुगतान किया जाता था। मिलर्स की मांग पर कांग्रेस सरकार ने इस राशि को 3 गुना बढ़ाया।

अधिकारियों ने प्रति क्विंटल 20 रुपए कट लिया

इसके बाद मिलर्स को मार्कफेड से 40 रुपए की जगह 120 रुपए भुगतान किया जाने लगा। राशि बढ़ने पर मार्कफेड के अधिकारियों ने प्रति क्विंटल 20 रुपए ‘कट’ लेना शुरू किया, जो मिलर्स ‘कट’ देते थे, उसका भुगतान कर दिया जाता था, जो कट नहीं देते थे, उनका पैसा रोक दिया जाता था। इस पैटर्न पर मार्कफेड के अधिकारियों ने प्रदेश के 2700 मिलर्स से 140 करोड़ से ज्यादा की उगाही कर ली।

कस्टम मिलिंग, डीओ काटने, मोटा धान को पतला, पतले धान को मोटा करने, एफसीआई को नान में कंवर्ट करने का पैसा लिया जाता था। मनोज सोनी और उनके सहयोगियों का खेल 2 साल से चल रहा था। इस खेल में मार्कफेड के अफसर और छत्तीसगढ़ स्टेट इन मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी भी शामिल थे।



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