नीमच जिले के मनासा तहसील स्थित ग्राम जूना मालाहेड़ा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लगाए शिविर में जब स्कूली बच्चों से उनकी सगाई के बारे में पूछा गया, तो वहां सन्नाटा पसर गया। देखते ही देखते 50 से ज्यादा बच्चों ने हाथ उठाकर यह स्वीकार किया कि उनकी सगाई हो चुकी है। हैरान करने वाली बात यह है कि इन बच्चों की उम्र महज 5 से 10 साल के बीच है। जिस उम्र में बच्चों को ‘सगाई’ का अर्थ भी ठीक से नहीं पता, समाज के बड़ों ने उनके भविष्य के फैसले अभी से कर दिए हैं। विडंबना यह रही कि बच्चे हाथों में ‘बाल सगाई अभिशाप है’ और ‘बाल विवाह मुक्त नीमच’ की तख्तियां पकड़े जागरूकता का संदेश दे रहे थे, जबकि वे खुद इन्हीं बेड़ियों में जकड़े हुए थे। कानून की चेतावनी और शिक्षा पर जोर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव और जज शोभना मीणा ने बंजारा समाज में व्याप्त ‘झगड़ा प्रथा’ और ‘बाल सगाई’ जैसी कुरीतियों पर चिंता जताई। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि केवल शिक्षा के जरिए ही इन बुराइयों को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि बचपन में हुई सगाई के कारण किसी बच्चे को प्रताड़ित किया गया, तो कानून सख्ती से निपटेगा। ग्रामीणों का संकल्प और बुनियादी समस्याएं शिविर के दौरान ग्रामीणों ने भविष्य में नाबालिग बच्चों की सगाई न करने का संकल्प लिया। हालांकि, इस मौके पर ग्रामीणों ने गांव की मूलभूत समस्याओं का अंबार भी लगा दिया। पीने के पानी की कमी, खराब सड़कें, अस्पताल की असुविधा और आवास योजनाओं का लाभ न मिलना जैसी शिकायतें प्रमुखता से उठाई गईं। सचिव ने इन समस्याओं को दर्ज कर लोक अदालत के माध्यम से समाधान का भरोसा दिलाया।
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