शाहजहांपुर में स्वास्थ्य विभाग के दो बड़े घोटालों में शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले में वरिष्ठ सहायक सतीश चंद्र को निलंबित किया गया है, वहीं 30 लाख रुपये के चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाले में लिपिक साजिद को निलंबित किया गया है। दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। यह मामला वर्ष 2022-23 का है, जब मिर्जापुर के मजरा बढऊ निवासी 16 लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाए थे। शिकायत के बाद जिलाधिकारी (डीएम) ने जांच कराई तो 14 लोग स्वस्थ पाए गए। इस फर्जीवाड़े में विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई थी, जहां मेडिकल बोर्ड के परीक्षण के बिना कंप्यूटर ऑपरेटरों की मदद से प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर दिव्यांग पेंशन और आवास का लाभ लेने की बात भी सामने आई थी। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह के आदेश पर इस मामले में 12 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, जिनमें वरिष्ठ सहायक सतीश चंद्र और डीईआईसी संतोष कुमार सिंह शामिल थे। डीएम ने आरोपियों के निलंबन और सेवा समाप्ति के भी आदेश दिए थे। हालांकि, एफआईआर के बाद भी कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही थी। डीएम के सख्त रुख अपनाने और सीएमओ से जवाब मांगने के बाद वरिष्ठ सहायक सतीश चंद्र को निलंबित किया गया। दूसरा मामला सीएमओ कार्यालय में 12 सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा नवंबर-दिसंबर माह में इलाज के नाम पर 30 लाख रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति लेने का है। जांच में सामने आया कि जिन अस्पतालों में इलाज कराना दर्शाया गया था, वे वास्तव में मौजूद ही नहीं थे, जबकि एक अस्पताल का संचालन ही नहीं पाया गया। जांच के बाद डीएम के निर्देश पर इस मामले में 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसमें लिपिक साजिद भी शामिल था। एफआईआर के बाद से लिपिक साजिद बिना सूचना के अनुपस्थित चल रहा था। इस मामले में निदेशक प्रशासन, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने संज्ञान लेते हुए लिपिक साजिद को निलंबित कर दिया है। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने दोहराया है कि कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।
Source link
