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क्या BJP से अलग होंगे कुलदीप बिश्नोई?: 12 साल पहले सीट बंटवारे पर विवाद, अब पिता भजनलाल पर बयानबाजी; एक्सपर्ट बोले- छोड़ने का विकल्प नहीं – Hisar News

क्या BJP से अलग होंगे कुलदीप बिश्नोई?:  12 साल पहले सीट बंटवारे पर विवाद, अब पिता भजनलाल पर बयानबाजी; एक्सपर्ट बोले- छोड़ने का विकल्प नहीं – Hisar News


हरियाणा में भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई अपनी ही पार्टी से नाराज हैं। इसकी वजह है भाजपा की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल पर दिया गया “बदमाशी” वाला बयान। कुलदीप भाजपा को स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि अगर रेखा शर्मा ने माफी नहीं

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कुलदीप के बागी तेवर देखते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली भी कह चुके हैं कि कुलदीप बिश्नोई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।

कुलदीप बिश्नोई का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। 2005 में कांग्रेस द्वारा भजनलाल को मुख्यमंत्री न बनाने पर उन्होंने 2007 में हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) का गठन किया। 2014 में हजकां ने भाजपा के साथ गठबंधन किया, लेकिन विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर सहमति न बनने के कारण गठबंधन टूट गया।

2016 में कुलदीप ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया, लेकिन 2021 में प्रदेश अध्यक्ष न बनाए जाने से नाराजगी और 2022 में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोपों के बाद भाजपा में शामिल हो गए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कुलदीप बिश्नोई आगे क्या फैसला करेंगे?

पॉलिटिक एक्सपर्ट्स का माना है कि कुलदीप के पास भाजपा छोड़ने का विकल्प नहीं है। कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के होते हुए वे दोबारा वहां नहीं जाएंगे। भाजपा को भी पता है कि उनके लिए आगे की राह आसान नहीं है।

रेखा शर्मा का वह बयान, जिससे कुलदीप बिश्नोई नाराज…

जानिए हजकां बनाने के बाद भाजपा से गठबंधन कैसे हुआ…

भजनलाल को सीएम न बनाने पर बनाई हजकां

कांग्रेस ने साल 2005 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष भजनलाल के नेतृत्व में 67 सीटें जीती थी, लेकिन उनकी जगह भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा को हाईकमान ने मुख्यमंत्री बनाया। हाईकमान ने भजनलाल के बड़े बेटे चंद्रमोहन को डिप्टी सीएम का ऑफर दिया। साथ ही कुलदीप को केंद्र में मंत्री पद का ऑफर। भजन लाल इस पर नाराज नहीं थे, लेकिन समर्थक विधायकों के टूटने का डर था। इसके बाद भजनलाल ने 2007 में हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) का गठन किया।

2009 में हजकां ने 6 सीटें जीतीं

2009 में विधानसभा चुनाव हुए तो हजकां ने 6 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 40 सीटें मिलीं और वह बहुमत से दूर रह गई। सरकार बनाने के लिए 46 विधायक चाहिए थे, लेकिन हजकां के 5 विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए। कुलदीप बिश्नोई ने सदस्यता रद्द करवाने के लिए हरियाणा विधानसभा में स्पीकर के पास याचिका दायर की, लेकिन स्पीकर ने यह मामला काफी समय तक लंबित रखा और बाद में खारिज कर दिया।

इसके बाद कुलदीप पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में गए। कोर्ट ने अक्टूबर 2014 को पांचों विधायकों की सदस्यता दल बदल कानून के तहत रद्द कर दी। 3 जून 2011 को भजनलाल का निधन हो गया। इसके बाद पार्टी की कमान कुलदीप बिश्नोई के हाथ में आ गई।

लोकसभा चुनाव में हजकां ने भाजपा से गठबंधन किया

2014 में हरियाणा जनहित कांग्रेस का भाजपा के साथ गठबंधन हुआ। मोदी लहर में 2014 के लोकसभा चुनाव में इस गठबंधन ने सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ा। भाजपा ने 7 सीटें जीतीं, जबकि एक सीट कांग्रेस और 2 सीटें इनेलो के पास आईं। हजकां अपने कोटे की हिसार और सिरसा लोकसभा सीट हार गई।

कुलदीप बिश्नोई ने दो साल पहले यह फोटो अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया था, जिसमें नरेंद्र मोदी और चौधरी भजनलाल को बातचीत करते दिखाया था।- फाइल

कुलदीप बिश्नोई ने दो साल पहले यह फोटो अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया था, जिसमें नरेंद्र मोदी और चौधरी भजनलाल को बातचीत करते दिखाया था।- फाइल

2014 में भाजपा से गठबंधन टूटने और फिर कांग्रेस में जाने की कहानी…

विधानसभा चुनाव में 45-45 फार्मूला न मिलने पर गठबंधन तोड़ा

2014 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों के बीच 45-45 सीटों पर चुनाव लड़ने का समझौता लागू न होने पर गठबंधन टूट गया। कुलदीप ने दावा किया कि भाजपा ने 20 से ज्यादा सीटें देने से मना कर दिया, जिसके कारण गठबंधन टूट गया। इसके बाद कुलदीप बिश्नोई की पार्टी ने 65 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। इस चुनाव में आदमपुर से कुलदीप और हांसी से उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई को जीत मिली।

2016 में हजकां का कांग्रेस में विलय

कुलदीप बिश्नोई ने 2016 में अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। 2019 में कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस के टिकट पर आदमपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 9 अप्रैल 2021 को कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा के इस्तीफे के बाद कुलदीप बिश्नोई प्रदेशाध्यक्ष पद की दौड़ में थे।

2014 में अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने के बाद राहुल और सोनिया गांधी के साथ कुलदीप बिश्नोई। (फाइल)

2014 में अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने के बाद राहुल और सोनिया गांधी के साथ कुलदीप बिश्नोई। (फाइल)

जानिए कांग्रेस छोड़कर दोबारा भाजपा में कैसे गए…

2021 में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष न बनने पर नाराज

राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि हुड्‌डा भी अपने बेटे दीपेंद्र हुड्‌डा को प्रदेशाध्यक्ष बनाना चाहते थे, परंतु राज्यसभा सांसद होने और खुद हुड्‌डा के नेता प्रतिपक्ष होने के कारण यह संभव नहीं था। इसलिए कुलदीप बिश्नोई इस दौड़ में सबसे आगे थे। हुड्‌डा ने उदयभान का नाम हाईकमान के सामने रख दिया और 27 अप्रैल 2021 को अपनी बात मनवाने में कामयाब रहे।

क्रॉस वोटिंग के आरोपों पर 2022 में भाजपा में गए

2022 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान कुलदीप बिश्नोई पर निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा को वोट देने के आरोप लगे, जिसके बाद वह कांग्रेस से दूर होते चले गए। उन्होंने आदमपुर सीट से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद आदमपुर में उपचुनाव हुए, जिसमें उनके बेटे भव्य बिश्नोई ने जीत दर्ज की।

4 अगस्त 2024 को कुलदीप बिश्नोई भाजपा में शामिल हो गए थे।

4 अगस्त 2024 को कुलदीप बिश्नोई भाजपा में शामिल हो गए थे।

अब जानिए पॉलिटिकल एक्सपर्ट ने क्या कहा…

भाजपा छोड़ने का फैसला नहीं करेंगे

हरियाणा की राजनीति के जानकार और पॉलिटिकल एक्सपर्ट सतीश त्यागी बताते हैं कि कुलदीप बिश्नोई अभी भाजपा छोड़ने का फैसला नहीं करेंगे, क्योंकि उनके पास फिलहाल कोई और विकल्प नहीं है। कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के होते हुए वह दोबारा वहां जाने की गलती नहीं करेंगे। हालांकि, कुमारी सैलजा की तरफ बिश्नोई परिवार का एक सॉफ्ट कॉर्नर है और चंद्रमोहन भी कांग्रेस में सैलजा खेमे में हैं। इस विकल्प का बिश्नोई परिवार इस्तेमाल कर सकता है।

समर्थकों को आश्वसत करने के लिए बयान दिया

सतीश त्यागी ने आगे बताया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव 2029 में होंगे। ऐसे में वह भाजपा में ही रहकर अपनी लड़ाई जारी रख सकते हैं। जहां तक उनके बयान की बात है, तो हो सकता है कि वह अपने समर्थकों को आश्वस्त करने के लिए कड़े बयान दे रहे हों। भाजपा को भी कहीं न कहीं पता है कि कुलदीप बिश्नोई के लिए आगे की राह कठिन है। वहीं, इनेलो और जजपा अभी खुद ही जमीन पर संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा में बने रहने का विकल्प ही उनके पास है, क्योंकि वह खुद की हजकां पार्टी का कांग्रेस में पहले ही विलय कर चुके हैं।

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