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एसबीआई कर्मचारियों की 25-26 मई को देशव्यापी हड़ताल: 16 सूत्रीय मांगों को लेकर बैंककर्मी करेंगे प्रदर्शन, 4 दिन ठप रहेगा बैंकिंग कामकाज – Jodhpur News

एसबीआई कर्मचारियों की 25-26 मई को देशव्यापी हड़ताल:  16 सूत्रीय मांगों को लेकर बैंककर्मी करेंगे प्रदर्शन, 4 दिन ठप रहेगा बैंकिंग कामकाज – Jodhpur News

ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) के आह्वान पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी 16 सूत्रीय मांगों को लेकर 25 और 26 मई को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। इससे पहले शनिवार और रविवार का अवकाश होने के कारण लगातार चार दिन तक बैंकिंग कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा। जोधपुर में गुरुवार को यूनियन के प्रदेश पदाधिकारी अजात शत्रु और प्रदेश महासचिव भवानीसिंह सोलंकी ने बैंक प्रबंधन पर द्विपक्षीय समझौतों के लगातार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यूनियन ने 16 सूत्रीय मांग पत्र जारी कर बैंक की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों की भारी कमी और ग्राहकों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए हैं। ये सभी मांगें बैंक और बैंक के ग्राहकों के हितों से जुड़ी है, न कि सीधे कर्मचारियों के व्यक्तिगत हित से। स्टाफ की भारी कमी और सुरक्षा पर खतरा यूनियन पदाधिकारी अजात शत्रु ने बताया कि पिछले 29 वर्षों से बैंक में ‘मैसेंजर’ की भर्ती नहीं की गई है, जिससे क्लेरिकल स्टाफ को ही मैसेंजर का काम करना पड़ रहा है। क्लर्क संवर्ग में भी भर्तियां लगातार घटने से कर्मचारियों पर काम का भारी दबाव है। वहीं, बैंक द्वारा ‘सशस्त्र गार्ड्स’ की आखिरी भर्ती वर्ष 2022 में की गई थी। एटीएम चोरी और बैंक डकैती के बढ़ते प्रयासों के बावजूद गार्ड्स की संख्या कम होना बैंक की संपत्ति और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है। आउटसोर्सिंग से डेटा लीक और क्रॉस-सेलिंग का दबाव प्रदेश महासचिव भवानीसिंह सोलंकी ने बताया- प्रबंधन द्वारा स्थायी प्रकृति के कार्यों को आउटसोर्स किया जा रहा है। बाहरी कर्मचारियों की बैंक के संवेदनशील डेटा और केवाईसी तक पहुंच होने से डेटा लीक, धोखाधड़ी और पहचान चोरी का गंभीर जोखिम पैदा हो गया है। इसके अलावा व्यापारिक टार्गेट के भारी दबाव में ‘क्रॉस-सेलिंग’ के नाम पर ग्राहकों को गलत बीमा उत्पाद बेचे जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक और बीमा नियामक के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है। भेदभावपूर्ण नीतियां और वेतन विसंगति यूनियन का आरोप है कि वित्त मंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद एसबीआई अपने कर्मचारियों को एनपीएस के तहत ‘पेंशन फंड मैनेजर’ चुनने का विकल्प नहीं दे रहा है। 12वें द्विपक्षीय समझौते में सभी के लिए 17 प्रतिशत वेतन वृद्धि तय हुई थी, लेकिन बैंक ने अधिकारियों को ‘स्पेशल पे’ देकर उनकी वृद्धि 22 प्रतिशत कर दी है, जिससे समानता खत्म हो गई है। इसके अलावा 100 प्रतिशत मेडिकल रीइम्बर्समेंट, इलाज में ‘पंचकर्म’ को शामिल करने और 2019 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के रोके गए ‘इंटर सर्कल ट्रांसफर’ को दोबारा शुरू करने की मांग की गई है। इस दौरान डिप्टी जनरल सेक्रेटरी देवेंद्र कुमार, एजीएस राजेंद्रसिंह कच्छवाहा, निर्मल कुमार गहलोत, रीजनल सेक्रेटरी नेमीचंद गहलोत और सदस्य कैलाश सोलंकी सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। आंदोलन की यह रहेगी टाइमलाइन



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