नाम: कैप्टन राकेश वालिया उम्र: 65 साल काम: रिटायर्ड आर्मी अफसर
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बात 2021 की है। 44 साल की एक महिला ने सोशल इनफ्लुएंसर बनकर राकेश को फोन किया और मिलने का वक्त मांगा। 29 दिसंबर, 2021 को 45 मिनट की मुलाकात हुई और राकेश पर रेप की FIR हो गई। केस सेशन कोर्ट, हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट गया। पड़ताल शुरू हुई, तो सिर्फ दिल्ली में ही महिला की झूठी FIR के 9 शिकार मिले। राकेश 10वें टारगेट थे।
4 साल केस चलने के बाद फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कैप्टन राकेश वालिया के खिलाफ FIR रद्द कर दी। इससे पहले उन्होंने 2022 में ही आरोप लगाने वाली महिला के खिलाफ रिवर्स केस की एप्लीकेशन दी थी। पुलिस ने 3 साल बाद FIR तब की, जब सुप्रीम कोर्ट ने कैप्टन वालिया को बरी कर दिया।
45 मिनट की मुलाकात, जिसके बाद रेप की FIR हुई
कैप्टन वालिया बताते हैं, ‘2017 में मेरी एक किताब पब्लिश हुई। 2019 के आखिर में किसी सिदरा मंसूर का फोन आया। खुद को सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर बताया और कहा कि मेरी किताब का प्रमोशन और ट्रांसलेशन करेंगी। उसने मुझसे मिलने की इच्छा जताई। व्यस्तताओं की वजह से अपॉइंटमेंट टलता रहा, आखिरकार 29 दिसंबर 2021 को मिलना तय हुआ।’
‘सिदरा ने कहा कि वो पति के साथ आएंगी और गाड़ी में ही मेरा इंटरव्यू करेंगी। मैं नहीं जानता था कि ये मुलाकात मेरी जिंदगी और मान-सम्मान को तहस-नहस कर देगी। दोपहर 3.30 बजे पिकअप के लिए मैं छतरपुर मेट्रो स्टेशन पहुंचा, तो सिर्फ सिदरा मिलीं। उन्होंने बताया कि पति को किसी काम से जाना पड़ा। फिर मेरी ही गाड़ी में इंटरव्यू शुरू हुआ।’
‘सिदरा के पास 2 फोन और एक वॉइस रिकॉर्डर था। सब सामान्य था, लेकिन शक तब हुआ, जब सिदरा ने कहा कि आपके लगातार फोन कॉल आने की वजह से हम ज्यादा बात नहीं कर सके। क्या किसी पार्क या होटल में चलकर डीटेल में बात कर सकते हैं। मैंने आगे बिना कोई बात किए शाम 4.15 बजे नोएडा के बोटैनिकल गार्डन (सेक्टर 38) पुलिस थाने के सामने उन्हें ड्रॉप कर दिया।’
‘कुल 45 मिनट की मुलाकात थी। घर भी नहीं पहुंचा था कि नोएडा सेक्टर-37 थाने से फोन आया। पुलिस ने कहा कि शबनम नाम की महिला ने मुझ पर रेप का आरोप लगाया है। मैंने पुलिस को बताया कि मैं उन्हें नहीं जानता। फिर रात 11.30 बजे महरौली पुलिस स्टेशन से फोन आया। बताया गया कि शबनम ने मेरे खिलाफ रेप की FIR की है। तब मुझे सिदरा मंसूर की असली पहचान पता चली।’

रिटायर्ड आर्मी अफसर कैप्टन राकेश वालिया के रिवर्स FIR करने के बाद शबनम का पूरा खेल सामने आया।
FIR में दर्ज कहानी और तथ्यों में 3 गड़बड़ियां मिलीं…
1. कैप्टन वालिया बताते हैं, ‘FIR में लिखा था कि मैंने शबनम को दोपहर 3.30 बजे गाड़ी में बैठाया। 20 मिनट बाद 3.50 बजे प्यास लगने पर उसे कोल्ड ड्रिंक दिया, जिसमें नशा था। 15 मिनट बाद उसे नशा चढ़ने लगा, यानी अब तक 4.05 बज चुके थे। 10 मिनट बाद यानी 4.15 बजे वो बेहोश हुई, जिसका फायदा उठाकर मैंने रेप किया। जबकि असल में मैंने 4.15 बजे उसे ड्रॉप कर दिया था।‘
गड़बड़ी: ड्रॉप करने का समय और बेहोशी का समय एक है, तो रेप कब हुआ।
2. FIR के मुताबिक, रेप का स्पॉट नोएडा सेक्टर-34 या 35 था। यहीं मैंने नशे की हालत में महिला को आगे की सीट से उतारकर पीछे बैठाया। फिर इसी व्यस्त इलाके में गाड़ी घूमती रही।
गड़बड़ी: क्या 60-62 साल का व्यक्ति 44 साल की महिला को बैक सीट पर इतनी सफाई से बैठा देगा कि कोई देख भी न सके। वो भी तब, जब वो नशे में है।
3. नशे में महिला दोपहर 4.15 से रात 11 बजे तक एक थाने से दूसरे और फिर तीसरे थाने घूमती रहीं। नोएडा में सेक्टर-37 और दिल्ली के घिटोरनी थाने में FIR नहीं लिखी गई। वो दिल्ली के महरौली थाने में रात 11 बजे पहुंची और महज 13 मिनट में यानी 11.13 बजे FIR दर्ज हो गई।
गड़बड़ी: कोई व्यक्ति नशे की हालत में इतना ट्रैवल कैसे कर सकता है।

कैप्टन वालिया के मुताबिक, उनके खिलाफ FIR दर्ज होते ही अलग-अलग लोगों के जरिए ब्लैकमेल कर पैसों की डिमांड आनी शुरू हो गई।
रेप का आरोप लगाया, लेकिन मेडिकल नहीं कराया
कैप्टन राकेश वालिया ने आगे बताया, ‘FIR में दर्ज घटना की रात 10.55 बजे बेटे को फेसबुक पर एक मैसेज मिला। लिखा था- ‘Are you Rakesh Walia’s son, your father raped me. फैमिली तक ये बात पहुंचाकर, डराने की कोशिश हुई।’
‘थाने गया, तो पूछताछ और मेडिकल हुआ। जबकि शिकायत करने वाली महिला ने मेडिकल कराने और जांच के लिए कपड़े देने से मना कर दिया। वो रेप का स्पॉट तक नहीं पहचान सकी। ’
2022 में सबूत जुटाए और महिला पर केस किया
कैप्टन वालिया आगे बताते हैं, ‘2022 में मैंने इस महिला के खिलाफ सबूत तलाशने शुरू किए और 3-4 FIR भी जुटा ली। ये महिला ने दूसरे पुरुषों पर की थीं। सभी को फंसाने का एक सा ही तरीका था। 25 फरवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने मेरे खिलाफ हुई FIR रद्द कर दी।‘
‘मैंने भी महिला के खिलाफ झूठी FIR दर्ज कराने और एक्सटॉर्शन की शिकायत की थी, लेकिन पुलिस को केस दर्ज करने में 3 साल लग गए। इसी पुलिस ने मेरे खिलाफ महज 13 मिनट में FIR लिख दी थी, जबकि महिला के पास सबूत के नाम पर सिर्फ उसका बयान था। मेरे पास 9 FIR थीं, जिनमें और भी लोगों को फंसाने के सबूत थे। आखिरकार मार्च 2025 में महिला पर FIR हुई।‘
कैप्टन वालिया के वकील भारत चुग की लीगल टीम के मेंबर अमित लखानी कहते हैं, ‘ये केस इतना कमजोर था कि सुप्रीम कोर्ट में दूसरी सुनवाई में रद्द हो गया।’

वे आरोप लगाते हुए कहते हैं, ‘पुलिस ने महिला को गिरफ्तार किया, लेकिन एक घंटे में छोड़ दिया। उसके बाद क्राइम ब्रांच ने जो प्रेस रिलीज जारी की, वो भी मजेदार है। उन्होंने लिखा था- क्राइम ब्रांच ने हनीट्रैप करने वाले एक रैकेट का भंडाफोड़ किया। ये एक बड़ा ऑर्गनाइज्ड रैकेट है। मतलब आप मान रहे हैं कि ये एक बड़ा रैकेट है, लेकिन गिरफ्तार करके छोड़ भी दिया?’

कैप्टन वालिया का केस सामने आने से पहले नवंबर 2020 को दिल्ली पुलिस ने सर्कुलर एक जारी कर दिया था, जिसमें जांच अधिकारियों (IOs) और SHOs को हनीट्रैप के मामलों का डेटा तैयार को कहा गया था, लेकिन डेटाबेस तैयार नहीं हुआ।
रेप केस के जरिए सरकारी फंड से पैसों ऐंठने का खेल
इन केसेज के पीछे क्या असल में कोई गिरोह एक्टिव है, ये समझने के लिए हम ऐसे मामलों पर काम कर रहे RTI एक्टिविस्ट सोनी कपूर से मिले। वे बताते हैं, ‘झूठी रेप की FIR लिखवाकर पैसे कमाना एक ऑर्गेनाइज्ड क्राइम बन गया है। दिल्ली के आंकड़े तो कम से कम यही बताते हैं।’
‘देखिए अगर कोई महिला थाने में पहुंचकर कहती है कि किसी व्यक्ति ने मेरा रेप किया है, तो FIR दर्ज करना पुलिस की मजबूरी है, वरना उस अधिकारी को ही सजा हो जाएगी। इसे जीरो ऑवर FIR कहते हैं। अब ये सब सहमति से हुआ या नहीं, ये महिला ही बताएगी। उसी की बात सच मानी जाएगी। उसे किसी गवाह की भी जरूरत नहीं।’
‘FIR लिखे जाने के बाद ही कोर्ट के निर्देश पर रेप पीड़ित को सरकारी मुआवजे के तौर पर आर्थिक मदद मिलने लगती है। दिल्ली में ये रकम 5 से 10 लाख रुपए है। चार्जशीट फाइल होने तक 50% तक पैसा मिल जाता है। आरोप सिद्ध न होने पर पैसों की रिकवरी करने का नियम है, लेकिन कम ही मामलों में हो पाती है।’

दिल्ली में 3097 रेप केस का ट्रायल, 133 में ही सजा
सोनी कपूर आगे बताते हैं, ‘मैंने पुलिस से उन महिलाओं का डेटा मांगा था, जो अलग-अलग पुरुषों पर रेप केस लगाती हैं। फिर पॉलिसी के तहत सरकार से पैसा ऐंठती हैं। ये नाम के अक्षरों में थोड़ा हेरफेर कर लेती हैं, ताकि सॉफ्टवेयर में पकड़ में ना आए।’
‘दिल्ली में हमने तीन जगह- पुलिस, दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (DSLSA) और कोर्ट से ऐसे केसेज का डेटा निकालने की कोशिश की। पुलिस मुख्यालय ने साफ मना कर दिया। ऐसे में हर थाने में RTI लगाकर डेटा निकलना नामुमकिन जैसा था। लिहाजा हम DSLSA गए। वहां से जवाब मिला कि हम ऐसा कोई डेटा मेंटेन नहीं करते।‘
‘इसके बाद हम दिल्ली के 11 अलग-अलग कोर्ट गए। 10 से डेटा मिला, लेकिन द्वारका कोर्ट से अब तक नहीं मिला। इन सबमें करीब 4 महीने का वक्त लगा। अभी सिर्फ दिल्ली का डेटा देखें, तो 4 साल में कुल 3097 रेप केस के ट्रायल हुए, लेकिन सजा सिर्फ 133 मामलों में हुई, यानी दोषी ठहराए जाने का रेट महज 4.3% है।‘
क्या आपने दूसरे राज्यों का भी डेटा निकालने की कोशिश की? सोनी बताते हैं, ‘दिल्ली के अलावा सिर्फ कर्नाटक से ऐसा डेटा मिला है। वहां कन्विक्शन रेट और भी कम महज 0.36% है। ये भी किसी ने RTI से निकाला है। दो महीने पहले हमने हरियाणा में भी RTI लगाई है। देशभर का डेटा निकालने के लिए बड़ा नेटवर्क चाहिए, जबकि हमारे पास काफी छोटी टीम है।‘

‘फर्जी रेप केस का डेटा नहीं, मुआवजे की रिकवरी कोर्ट का काम’
दिल्ली में हनीट्रैप के केसेज का डेटा मांगने पर नॉर्थ दिल्ली के एडिशनल DCP रविनंदन कहते हैं, ‘ये जानकारी पुलिस हेडक्वार्टर से मिलेगी। मेरी जानकारी में ऐसा कोई डेटा तैयार नहीं होता। मेरी यहां एक हफ्ते पहले ही पोस्टिंग हुई है, इसलिए ज्यादा नहीं बता सकता।‘
हम पुलिस हेडक्वार्टर से पहले ही कॉन्टैक्ट कर चुके थे, लेकिन कोई डेटा नहीं मिला। फिर हमने रेप केस झूठा साबित होने पर पीड़ित को मिलने वाली रकम की रिकवरी के बारे में पूछा। इस पर जवाब मिला, ‘पैसा देना और रिकवर करना कोर्ट का काम है, ये हम नहीं बता सकते।‘
‘आपको ये आंकड़ा दिल्ली की कोर्ट से लेना होगा या फिर DSLSA से मिल सकता है। DSLSA से हमने उसके सरकारी नंबर पर संपर्क करने की कोशिश, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।’

उगाही के लिए पुरुषों को हनीट्रैप करतीं कॉनवुमैन
हनीट्रैप के शिकार पुरुषों के लिए काम करने वाली एडवोकेट दीपिका नारायण कहती हैं, ‘पूरे देश से हमारे पास ऐसे मामले आए हैं। जबलपुर, जयपुर, गुड़गांव और दिल्ली में केसेज की भरमार है। अभी मेरे पास 25-28 केस हैं, जहां औरतों ने 3 से लेकर 15 पुरुषों पर केस कर रखा है। हम इन्हें फॉलो कर रहे हैं।’
क्या सटीक डेटा है? हमारी कैपेसिटी सरकार के बराबर नहीं, जो पूरे देश का डेटा इकट्ठा कर सकें। हमने हरियाणा के सभी जिलों से ऐसे मामलों की लिस्ट मांगी थी, लेकिन 8 जिलों से जवाब मिला। सिर्फ इन जिलों में 51 ऐसी महिलाएं मिलीं, जिन्होंने 3-15 पुरुषों के खिलाफ रेप, गैंगरेप और छेड़छाड़ के केस दर्ज कराए हैं।

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