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रिटेल महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.48% पर पहुंची: खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर; अमेरिका-ईरान जंग से महंगाई और बढ़ सकती है

रिटेल महंगाई अप्रैल में बढ़कर 3.48% पर पहुंची:  खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर; अमेरिका-ईरान जंग से महंगाई और बढ़ सकती है


नई दिल्ली10 मिनट पहले

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अप्रैल की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई है। इससे पहले मार्च में यह 3.40% थी। आज 12 मई को ये आंकड़े जारी किए गए हैं।

महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। यह तनाव लंबा चला तो महंगाई आगे और बढ़ सकती है।

खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ी

महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना है। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में बढ़कर 4.20% पर पहुंच गई। मार्च में यह आंकड़ा 3.87% था।

  • शहरी महंगाई दर 3.11% से बढ़कर 3.16% पहुंच गई है।
  • ग्रामीण महंगाई दर 3.63% से बढ़कर 3.74% पहुंच गई है।

पर्सनल केयर वाले सामान सबसे ज्यादा 17.66% महंगे हुए

सेक्टर महंगाई दर (%)
पर्सनल केयर, सोशल प्रोटेक्शन और अन्य सामान 17.66
पान, तंबाकू और नशीले पदार्थ 4.76
खाद्य और पेय पदार्थ 4.01
एजुकेशन सर्विसेज 3.15
कपड़े और जूते 2.8
रेस्टोरेंट और होटल सेवाएं 4.2
मनोरंजन, खेल और संस्कृति 2.11
स्वास्थ्य 1.64
आवास, पानी, बिजली और गैस 1.71
घरेलू उपकरण और रख-रखाव 1.61
सूचना और संचार 0.50
ट्रांसपोर्ट -0.01

मार्च में प्याज सस्ता और आलू महंगा हुआ

नंबर वस्तु महंगाई % (मार्च, 2026) महंगाई % (अप्रैल, 2026)
1 प्याज -27.78 -17.67
2 आलू -19.03 -23.69
3 मोटर कार और जीप -6.91 -7.12
4 मटर, चने -7.88 -6.75
5 एयर कंडीशनर -5.81 -5.06

चांदी के गहनों की महंगाई दर घटकर 144.34% पर आई

नंबर वस्तु महंगाई % (मार्च, 2026) महंगाई % (अप्रैल, 2026)
1 चांदी के गहने

148.42

144.34
2 नारियल: खोपरा

45.54

44.55
3 सोने/हीरे/प्लैटिनम

45.88

40.72
4 टमाटर

36.00

35.28
5 फूलगोभी

34.16

25.58

नए तरीके से मापी जा रही महंगाई, OTT शामिल

यह महंगाई के नए फॉर्मूले (2024 बेस ईयर) के तहत जारी तीसरा आंकड़ा है। सरकार ने महंगाई नापने के बास्केट में भी बदलाव किया है।

खाने-पीने की चीजों का वजन (वेटेज) 45.9% से घटाकर 36.75% कर दिया गया है, जबकि हाउसिंग और बिजली-गैस का वेटेज बढ़ा दिया गया है।

क्या हटा: वीसीआर और ऑडियो कैसेट जैसे पुराने सामान हटा दिए गए हैं।

क्या जुड़ा: OTT सब्सक्रिप्शन, डिजिटल स्टोरेज जैसे खर्चे शामिल किए हैं।

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।

3.48% महंगाई दर का क्या मतलब है?

1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल)

जब हम कहते हैं कि अप्रैल 2026 में महंगाई 3.48% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना मार्च 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 3.48% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं:

किसी चीज के दाम बहुत ज्यादा बढ़े होंगे।

किसी चीज के दाम घटे भी होंगे।

जब इन सबको एक साथ मिलाया गया, तो औसतन खर्च 3.48% बढ़ गया।

2. ₹100 की चीज अब ₹103.48 की हो गई

इसका गणित बहुत सीधा है। अगर अप्रैल 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन ₹100 में खरीदा था, तो वही सामान अप्रैल 2026 में ₹103.48 का हो गया है।

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वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,592 रुपए चढ़कर 1,51,954 रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले 11 मई को इसकी कीमत 1,50,362 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। पूरी खबर पढ़ें…

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