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राजकीय स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा: हाईकोर्ट ने महिला के बजाय पुरुष भरने की भूल पर परीक्षा की दी अनुमति – Prayagraj (Allahabad) News

राजकीय स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा:  हाईकोर्ट ने महिला के बजाय पुरुष भरने की भूल पर परीक्षा की दी अनुमति – Prayagraj (Allahabad) News

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जानबूझकर की गई झूठी घोषणा और लापरवाही, अनदेखी या टेक्निकल रुकावट से हुई मानवीय गलती के बीच काफी अंतर है । इसलिए चयन प्राधिकारियों को इसे दुरुस्त करने के लिए व्यावहारिक और न्यायिक तरीका अपनाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने वशिष्ठ नारायण कुमार बनाम बिहार राज्य केस में कहा है कि ऑनलाइन एप्लीकेशन फॉर्म में हुई छोटी-मोटी और अनजाने में हुई गलतियों को इतना खतरनाक नहीं माना जा सकता कि वे किसी और तरह से योग्य अभ्यर्थी के लिए सही न हों। अनजाने में गलती हो सकती है कोर्ट ने कहा कि मामूली लिपिकीय गलतियों के लिए अभ्यर्थित निरस्त करना सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जहां किसी अभ्यर्थी की बेसिक अर्हता पर कोई सवाल नहीं है और आन लाइन फार्म भरने में अनजाने में गलती हुई है जिसे ठीक किया जा सकता है, तो अभ्यर्थिता निरस्त नहीं की जा सकती। याची महिला है ,राजकीय स्कूलों में सहायक अध्यापक एल टी ग्रेड भर्ती में आनलाइन आवेदन भरा। जेंडर कालम में महिला के बजाय पुरुष लिख गया।उसका फोटोग्राफ भी लगा है। बाद में दुरुस्त करने की अर्जी भी दी। फिर भी उसका फार्म निरस्त कर दिया गया।16 मई से परीक्षा होने वाली है। शिवांगी की याचिका पर आदेश शिवांगी उपाध्याय की याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने याची को 16.मई.2026 को होने वाली परीक्षा में बैठने देने का निर्देश दिया है और कहा यदि मानवीय भूल जिसका उसे अनुचित लाभ नहीं मिलने वाला है ,उसके आधार पर परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया तो अपूरणीय क्षति होगी। याची ने आनलाइन आवेदन के समय गलती से महिला के बजाय पुरुष भर दिया।जिस पर उसकी अभ्यर्थिता निरस्त कर दी गई थी।जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी। सरकारी वकील का कहना था कि आन लाइन आवेदन की गलती दुरुस्त करने की अवधि तय की गई थी।याची ने समय बीत जाने के बाद गलती सुधारने की अर्जी दी इसलिए उसे राहत पाने का अधिकार नहीं है। किंतु कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को अपने विवेक का इस्तेमाल कर मानवीय भूल सुधारने का मौका देना चाहिए।



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