हिमाचल प्रदेश में तेल (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी के बाद पर्यटन और परिवहन क्षेत्र में सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ने लगी है। मंडी टूरिज्म वेल्फेयर सोसायटी ने इस फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सोसायटी के अध्यक्ष महेंद्र गुलेरिया ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस मूल्य वृद्धि से प्रदेश का टैक्सी कारोबार बुरी तरह प्रभावित होगा और पहले से ही मंदी झेल रहे ऑपरेटरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह टैक्सी चालकों को तुरंत राहत प्रदान करने के लिए व्यवस्था की जाए, अन्यथा वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि दाम बढ़ने से उनकी लागत बढ़ गई है। इससे उनको गाडि़यों की किश्त भरना भी मुश्किल हो गया है। लंबे समय से लंबित है किराया बढ़ाने की मांग सोसायटी के अध्यक्ष महेंद्र गुलेरिया ने बताया कि ईंधन के दाम लगातार बढ़ने के कारण टैक्सी किराए में बढ़ोतरी की मांग लंबे समय से सरकार और प्रशासन के समक्ष उठाई जा रही है। इसके बावजूद अब तक सरकार की तरफ से कोई भी स्थायी या संतोषजनक समाधान नहीं निकाला गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का टैक्सी व्यवसाय पहले से ही मंदी, विभिन्न प्रकार के भारी-भरकम करों और कड़े नियमों के बोझ तले दबा हुआ है, ऊपर से तेल के दाम बढ़ाकर उनकी कमर तोड़ दी गई है। सड़कों की हालत खस्ता, जबकि कई टैक्स वसूल रही सरकार टैक्सी ऑपरेटरों को होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों का जिक्र करते हुए गुलेरिया ने उन पर लगने वाले अनगिनत करों (टैक्स) का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक टैक्सी चालक को बैरियर टैक्स, टोल टैक्स, ग्रीन टैक्स, पैसेंजर टैक्स, स्पेशल रोड टैक्स और साडा (SADA) टैक्स जैसे कई तरह के कर चुकाने पड़ते हैं। इतने टैक्स देने के बावजूद प्रदेश के पर्यटन रूटों की सड़कों की स्थिति बेहद खराब है। इसके अतिरिक्त, गाड़ियों में जीपीएस (GPS) और स्पीड गवर्नर लगाने जैसे अनिवार्य नियमों के कारण भी ऑपरेटरों का फालतू खर्च काफी बढ़ गया है। पर्यटन की रीढ़ हैं टैक्सी चालक पर सरकार कर रही अनदेखी महेंद्र गुलेरिया ने हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी में पर्यटन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटकों पर निर्भर है। टैक्सी चालक बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों को दूर-दराज के पर्यटन स्थलों तक सुरक्षित पहुंचाकर इस पूरी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में सबसे अहम योगदान देते हैं। इसके बावजूद, सरकार टैक्सी ऑपरेटरों की इन जमीनी समस्याओं और जायज मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है। केवल टैक्स वसूली का माध्यम समझ रही है सरकार सोसायटी ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन टैक्सी चालकों को जन-प्रतिनिधि या सेवा प्रदाता मानने के बजाय केवल टैक्स वसूली का एक आसान माध्यम समझ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने टैक्सी ऑपरेटरों को तत्काल कोई वित्तीय राहत या टैक्स में छूट प्रदान नहीं की, तो प्रदेश का यह सबसे बड़ा स्वरोजगार (रोजगार) क्षेत्र पूरी तरह संकट में आ जाएगा, जिससे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी छिन जाएगी। आगामी रणनीति के लिए जल्द होगी बैठक भविष्य के कदम की घोषणा करते हुए महेंद्र गुलेरिया ने जानकारी दी कि सरकार के इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ जल्द ही जिला मंडी की सभी छोटी-बड़ी टैक्सी यूनियनों की एक विशेष आपातकालीन बैठक बुलाई जा रही है। इस जिला स्तरीय बैठक के बाद, हिमाचल प्रदेश की अन्य जिलों की यूनियनों के साथ एक संयुक्त महाबैठक की जाएगी, जिसमें सरकार के खिलाफ एक बड़े और निर्णायक आंदोलन की आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।
Source link
