हिमाचल प्रदेश के प्रख्यात साहित्यकार, पत्रकार और समाज सुधारक कृष्ण कुमार “नूतन” का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने शनिवार शाम 7:15 बजे अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से हिमाचल सहित पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार रविवार सुबह 10 बजे मंडी के हनुमान घाट में किया जाएगा। कृष्ण कुमार “नूतन” का जन्म वर्ष 1928 में मंडी रियासत में हुआ था। उन्हें हिमाचल का पहला कहानीकार माना जाता है। उनकी पहली पुस्तक 1948 में प्रकाशित हुई थी, जो हिमाचल प्रदेश के गठन से पहले का समय था। उन्होंने लगभग 20 साहित्यिक पुस्तकें लिखीं, जिनमें उपन्यास, कहानी संग्रह, कविता संग्रह, नाटक और लेख संग्रह शामिल हैं। उनके प्रमुख उपन्यासों में ‘मन एक प्यासी मछली’, ‘युद्धला’ और ‘संस्कार’ शामिल हैं, जबकि ‘यादगार’, ‘आदर्श कहानियां’ और ‘परिभाषा’ उनके चर्चित कहानी संग्रह रहे। उनकी कहानी “यादगार” पर आधारित हिंदी फिल्म “गीत गाया पत्थरों ने” ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने 1949 से 1957 तक मुंबई फिल्म जगत में पृथ्वी थिएटर के साथ सह-निर्देशक के रूप में भी काम किया। इस अवधि में उनके गुलजार, बलराज साहनी, रामानंद सागर और आनंद बख्शी जैसे प्रमुख हस्तियों से घनिष्ठ संबंध रहे। समाज सुधारक और कर्मचारी आंदोलनों के मजबूत सूत्रधार साहित्य के अलावा, नूतन जी एक समाज सुधारक और कर्मचारी आंदोलनों के मजबूत सूत्रधार भी थे। उन्होंने छुआछूत और अन्य सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। वर्ष 1966 में गठित हिमाचल कर्मचारी महासंघ के वे संस्थापक सदस्य थे और उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। डॉ. यशवंत सिंह परमार राज्य सम्मान का मिला था ऑनर उनकी पुस्तक “इतिहास साक्षी है” के लिए हिमाचल सरकार ने उन्हें डॉ. यशवंत सिंह परमार राज्य सम्मान से सम्मानित किया था। इसके अतिरिक्त, देश भर की कई साहित्यिक संस्थाओं ने भी उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने रानी खैरगढ़ी, स्वामी कृष्णानंद और भाई हिरदा राम जैसी ऐतिहासिक शख्सियतों पर भी महत्वपूर्ण लेखन किया। “नूतन” का निधन हिमाचल की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
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